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राजगढ़ RTO में महा फर्जीवाड़ा,बिना OTP और जाली दस्तखत से हड़प लिया किसान का ट्रैक्टर; जिला परिवहन अधिकारी और बाबू पर मिलीभगत एफआईआर की तलवार !

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RTO-दलाल साठगांठ का सनसनीखेज खुलासा, ₹5.50 लाख के फेर में अपनों ने ही रची साजिश, अब डीएसपी ने दिए जांच के आदेश ।

घनश्याम शर्मा माचलपुर 

राजगढ़ / माचलपुर :- राजगढ़ जिला परिवहन कार्यालय (RTO) में बैठे जिम्मेदार अधिकारियों और दलालों के गठजोड़ का एक ऐसा खतरनाक डिजिटल फर्जीवाड़ा सामने आया है, जिसने सरकारी ‘वाहन पोर्टल’ की सुरक्षा दांव पर लगा दी है । यहाँ एक किसान के ट्रैक्टर को बिना उसकी मर्जी, बिना किसी भुगतान और बिना मोबाइल पर ओटीपी आए, फर्जी दस्तावेज और जाली दस्तखत के सहारे दूसरे के नाम ट्रांसफर कर दिया गया । सूचना के अधिकार से निकले सरकारी कागजों ने जब आरटीओ के इस संगठित भ्रष्टाचार की पोल खोली, तो पीड़ित ने सीधे पुलिस अधीक्षक राजगढ़ की चौखट पर न्याय की गुहार लगाई । मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस प्रशासन भी अलर्ट मोड पर आ गया है ।

“₹5.50 लाख का मौखिक सौदा और अपनों की दगाबाजी”

जटियाखेड़ी निवासी मुकेश वर्मा के पास एक जॉनडियर ट्रैक्टर नंबर MP39AD1264 था जिसे दिसंबर 2025 में मुकेश ने इस ट्रैक्टर का सौदा जोगन बावड़ी,मकसूदनगढ़ गुना के पवन अहिरवार के साथ ₹5,50,000 में मौखिक रूप से तय किया था । पवन के नाम पर बैंक लोन पास नहीं हुआ,तो उसने अपने ससुर शांतिलाल अहिरवार निवासी ग्राम महू को आगे कर दिया । मार्च 2026 में शांतिलाल ने ट्रैक्टर पर लोन तो मंजूर करवा लिया, लेकिन लोन की मिली हुई मोटी रकम असली मालिक मुकेश वर्मा को देने के बजाय खुद डकार गया ।

“थाने में खाई कसम,फिर पीठ पीछे किया डिजिटल वार”

जब शांतिलाल ने पैसे देने में आनाकानी की, तो पीड़ित मुकेश वर्मा ने 28 मई 2026 को मकसूदनगढ़ थाने में शिकायत की । पुलिस ने दोनों पक्षों को बुलाकर समझाइश दी, तो आरोपियों ने जून 2026 तक पाई-पाई चुकाने का वादा किया । लेकिन पैसा देने के बजाय आरोपियों ने आरटीओ के भीतर बैठे अपने आकाओं के साथ मिलकर पीड़ित की पीठ में छुरा घोंप दिया ।

“RTI ने खोला राज: RTO अधिकारी ज्ञानेंद्र वैश्य और बाबू राजदेव शर्मा नामजद”

जून की समय सीमा बीतने के बाद जब पैसा नहीं मिला, तो पीड़ित को गहरा शक हुआ । उसने 07 जुलाई 2026 को आरटीओ राजगढ़ में अपने वाहन के ट्रांसफर से जुड़े दस्तावेजों के लिए आवेदन किया 13 जुलाई 2026 को जो सरकारी रिकॉर्ड पीड़ित के हाथ लगा, उसने सबके होश उड़ा दिए ।दस्तावेजों से साफ हुआ कि आरोपी शांतिलाल ने राजगढ़ के जिला परिवहन अधिकारी ज्ञानेंद्र वैश्य और कार्यालय सहायक (बाबू) राजदेव शर्मा के साथ मिलकर एक बड़ा प्रशासनिक षड्यंत्र रचा था । मुकेश वर्मा के फर्जी और जाली दस्तखत कर कागजात तैयार किए गए और बिना गाड़ी मालिक की मौजूदगी के ट्रैक्टर का नामांतरण शांतिलाल के नाम कर दिया गया ।

“बिना OTP ट्रांसफर,सीधे बड़े भ्रष्टाचार की गवाही”

परिवहन विभाग के नियमों के अनुसार ‘वाहन’ पोर्टल पर बिना रजिस्टर्ड मोबाइल ओटीपी या बायोमेट्रिक ऑथेंटिकेशन के गाड़ी ट्रांसफर होना नामुमकिन है। पीड़ित मुकेश वर्मा का साफ कहना है,”मेरे पास कोई ओटीपी नहीं आया, मैंने कहीं साइन नहीं किए और न ही मुझे एक रुपया मिला । इसके बावजूद आरटीओ ने ट्रैक्टर किसी और के नाम चढ़ा दिया, यह साफ तौर पर करोड़ों के संगठित भ्रष्टाचार और आरटीओ-दलाल साठगांठ का जीवंत उदाहरण है ।”

“पीड़ित ने की नामजद FIR और नामांतरण रद्द करने की माँग”

इस जालसाजी से आहत मुकेश वर्मा ने पुलिस अधीक्षक राजगढ़ के समक्ष लिखित आवेदन देकर तीन प्रमुख मांगें रखी हैं:
धोखाधड़ी का केस: मुख्य आरोपी शांतिलाल अहिरवार और पवन अहिरवार के खिलाफ जालसाजी और आपराधिक षड्यंत्र का केस दर्ज हो ।
भ्रष्ट अफसरों पर जेल की गाज: फर्जी दस्तावेज बनाने और सरकारी क्रेडेंशियल्स का दुरुपयोग करने वाले आरटीओ ज्ञानेंद्र वैश्य और बाबू राजदेव शर्मा के खिलाफ प्रकरण दर्ज कर कार्रवाई हो ।
अवैध नामांतरण निरस्त हो: जालसाजी से किए गए इस अवैध ट्रांसफर को तुरंत रद्द कर ट्रैक्टर का मालिकाना हक पीड़ित को वापस मिले।

“प्रशासन का आधिकारिक पक्ष, जांच के बाद दोषियों पर होगी कड़ी कार्रवाई”

इस हाई-प्रोफाइल मामले में राजगढ़ पुलिस ने मुस्तैदी दिखाते हुए शिकायत को जांच के दायरे में ले लिया है और आरोपियों पर शिकंजा कसना शुरू कर दिया है ।
वर्जन:——-
“पीड़ित की ओर से प्राप्त शिकायती आवेदन को संबंधित थाने में जांच के लिए भिजवा दिया गया है। मामले के सभी पहलुओं और दस्तावेजों की बारीकी से जांच की जा रही है। जांच में जो भी तथ्य सामने आएंगे, उनके आधार पर आरटीओ कर्मचारियों सहित सभी दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी व उचित दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।”
— नेहा गौर, डीएसपी, राजगढ़

Khushi Samvad
Author: Khushi Samvad

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