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रौद्र रूप दिखा रहे नाले में समाई अनियंत्रित कार,तीन मासूमों समेत एक ही कुनबे के 9 लोगों की जल समाधि !

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पड़ाना बायपास के अधूरे पुल पर ग्रामीणों ने हाथ जोड़कर रोका,पर काल की जिद के आगे नहीं माना चालक,देवास से मांगलिक मिलन में जा रहे थे सभी सवार,उफनती लहरों के बीच खिड़की खोलकर कूदे दो युवकों की बची जान ।

जिला ब्यूरो घनश्याम शर्मा

राजगढ़ / माचलपुर :- पचोर-सारंगपुर मार्ग पर स्थित पड़ाना कस्बे के नजदीक सोमवार की सुबह एक ऐसा खौफनाक मंजर सामने आया, जिसने देखने वालों की रूह कंपा दी । लगातार जारी मूसलाधार बारिश के चलते उफान पर चल रहे एक नाले को पार करने का दुस्साहस एक हंसते-खेलते परिवार की जलसमाधि का कारण बन गया । सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम न होने और आधे-अधूरे पुल के अस्थाई रास्ते (डायवर्जन) पर पानी का तेज बहाव होने के बावजूद,एक ईको गाड़ी का चालक उसे जबरन लहरों के बीच ले गया । देखते ही देखते तेज थपेड़ों ने पूरी गाड़ी को गहरे पानी में पलट दिया,इस हृदय विदारक हादसे में 3 मासूम बच्चों और महिलाओं सहित कुल 9 लोगों की डूबने से मौत हो गई । सभी मृतक देवास जिले के सतवास अंतर्गत धांसड़ गांव के रहने वाले थे, जो राजगढ़ के कड़लावद गांव में एक पारिवारिक आयोजन में शामिल होने जा रहे थे ।

“चश्मदीदों की जुबानी,’हमने चिल्लाकर मना किया,पैर पीछे खींचने को कहा, पर रफ्तार नहीं थमी”

घटना स्थल पर मौजूद पड़ाना के स्थानीय ग्रामीणों ने बताया कि सुबह से ही ‘झिरी’ नाले का जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर बह रहा था । पुल का निर्माण कार्य चलने के कारण बगल से निकाला गया अस्थाई रास्ता पूरी तरह पानी में डूब चुका था ।

वहां खड़े ग्रामीणों ने गाड़ी को दूर से आते देख हाथ हिलाकर और चिल्लाकर रुकने का इशारा किया कुछ लोगों ने तो वाहन के सामने आकर गाड़ी की रफ्तार थामने की कोशिश भी की और साफ कहा कि आगे मौत का गड्ढा है । लेकिन चालक अपनी धुन में आगे बढ़ता रहा सड़क के किनारों पर किसी भी प्रकार की सुरक्षा रेलिंग या प्रशासनिक बैरिकेडिंग न होने के कारण जैसे ही गाड़ी पानी के बीच पहुंची, सड़क का अंदाजा नहीं मिला और तेज बहाव कार को सीधे गहरे मलबे वाले पानी में खींच ले गया।

“दरवाजे हुए जाम दो जांबाज शीशा तोड़करपानी में कूदे,बाकी लहरों में खो गए”

चश्मदीदों के मुताबिक, गाड़ी पलटते ही भीतर चीख पुकार का ऐसा शोर उठा जिसे सुनकर तट पर मौजूद लोग सहम गए,पानी के भयंकर दबाव के कारण गाड़ी के केंद्रीय दरवाजे (सेंट्रल लॉक) पूरी तरह जाम हो गए । इस भयावह स्थिति में अगली सीट पर बैठे मुकेश और हुकुम नामक दो युवकों ने सूझबूझ दिखाई,उन्होंने किसी तरह खिड़की का कांच खोला और उफनते पानी में छलांग लगा दी । दोनों अच्छे तैराक होने के कारण लहरों को चीरते हुए सुरक्षित किनारे तक आने में सफल रहे लेकिन बीच और पीछे की सीटों पर बैठे बच्चों व महिलाओं को संभलने का एक सेकंड का मौका भी नहीं मिला और कार उन्हें समेटे हुए गहरे पानी के भीतर ओझल हो गई ।

“खाली मिली नदी से खींची गई कार शाम तक चला मह रेस्क्यू ऑपरेशन”

चीख-पुकार सुनकर पड़ाना और आसपास के सैकड़ों ग्रामीण रस्सियां लेकर नाले की तरफ दौड़े । सूचना मिलते ही स्थानीय प्रशासनिक अमला, एसडीएम रोहित बम्होरे और एसडीओपी अरविंद सिंह पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे । आपदा प्रबंधन दल (NDRF और SDRF) की टीमों ने आते ही रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया सबसे पहले भारी क्रेन के जरिए पानी में डूबी कार को बाहर खींचा गया,लेकिन कार के सारे दरवाजे और शीशे टूटे होने के कारण वह पूरी तरह खाली थी पानी का तेज बहाव सभी शवों को आगे बहा ले गया था । इसके बाद गोताखोरों ने नावों और लाइफ जैकेट की मदद से नाले के निचले बहाव क्षेत्र में करीब 3 किलोमीटर तक सघन सर्चिंग की और दोपहर बाद तक एक-एक कर सभी 9 शवों को ढूंढ निकाला ।

“अस्पताल में कोहराम,गम में बदला कड़लावद गांव”

सभी शवों को तत्काल सारंगपुर के शासकीय चिकित्सालय भेजा गया, जहां मर्चुरी के बाहर रोते बिलखते परिजनों की चीखों से पूरा माहौल गमगीन हो गया । जिस कड़लावद गांव में इस परिवार का इंतजार हो रहा था,वहां जैसे ही यह खबर पहुंची, हर घर का चूल्हा बंद हो गया क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों ने भी अस्पताल पहुंचकर शोकाकुल परिवार को सांत्वना दी । डॉक्टरों के विशेष पैनल ने मुस्तैदी के साथ कानूनी पंचनामा और पोस्टमार्टम की औपचारिकताएं पूरी कीं, जिसके बाद शवों को ससम्मान उनके गृहग्राम धांसड़ (देवास) रवाना किया गया ।

“कलेक्टर राजगढ़ का आधिकारिक वर्जन”
हादसे के बाद राहत कार्यों की कमान संभाल रहे राजगढ़ कलेक्टर डॉ. गिरीश कुमार मिश्रा ने कहा
“यह बहुत ही हृदयविदारक घटना है,जिसमें देवास जिले के रहने वाले लोग जो कड़लावद गांव जा रहे थे, वे इस हादसे का शिकार हुए हैं । ग्रामीणों ने उन्हें रोकने का प्रयास भी किया था,लेकिन लापरवाही व जल्दबाजी के कारण गाड़ी पानी के तेज बहाव में उतर गई शासन के नियमानुसार मृतकों के परिजनों को चार-चार लाख रुपये की त्वरित आर्थिक सहायता राशि स्वीकृत की जा रही है । इसके साथ ही, डायवर्जन मार्ग की सुरक्षा व्यवस्थाओं की जांच के निर्देश दिए हैं निर्माणाधीन पुल के पास सुरक्षा मानकों में अगर किसी भी स्तर पर लापरवाही या लापरवाही की चूक सामने आती है, तो संबंधितों और ठेकेदार के विरुद्ध कठोर वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।”

Khushi Samvad
Author: Khushi Samvad

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