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हर-हर महादेव के गगनभेदी उद्घोष से गुंजायमान हुआ अंचल,छापीश्वर महादेव से गोघटपुर मठ तक निकली अलौकिक कांवड़ यात्रा !

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अटूट आस्था के सामने फीकी पड़ी मार्ग की थकान, छापी के तट से गोघटपुर तक शिवभक्तों का अद्भुत समर्पण ।

 घनश्याम शर्मा माचलपुर 

 राजगढ़ / माचलपुर :- सावन के पावन और पवित्र मास में संपूर्ण क्षेत्र शिवमय हो गया है,गिरिराज भक्त मंडली जीरापुर के तत्वावधान में छापी बांध के तट पर स्थित सुप्रसिद्ध ‘छापीश्वर महादेव मंदिर’ से परंपरागत कांवड़ यात्रा का शुभारंभ हुआ । देवाधिदेव महादेव के विग्रह के समक्ष सनातन धर्म की मर्यादा अनुसार पूर्ण विधि-विधान, वैदिक मंत्रोच्चार और पूजा अर्चना के साथ कांवड़ यात्रा आरंभ की गई । इस अलौकिक और दिव्य धार्मिक महोत्सव में अंचल के श्रद्धालु,मस्तक पर त्रिपुंड व गेरूवे वस्त्र धारण किए और कंधों पर पवित्र जल की कांवड़ लिए बड़ी संख्या में सम्मिलित हुए । यात्रा के प्रारंभ होते ही पूरा आकाश “बम भोले”, “हर-हर महादेव” और “जय महाकाल” के गगनभेदी जयकारों से गुंजायमान हो उठा । डीजे की थाप पर बज रहे भगवान आशुतोष के भक्तिमय भजनों और डमरू की गूंज पर सुध-बुध खोकर झूमते-नाचते शिवभक्तों का उत्साह देखते ही बनता था ।

“25 किलोमीटर का सफर तय कर गोघटपुर मठ पहुंची यात्रा,किया जलाभिषेक”

पवित्रता और अगाध श्रद्धा, आस्था का संगम लिए यह कांवड़ यात्रा करीब 25 किलोमीटर का लंबा और अत्यंत कठिन मार्ग तय कर ऐतिहासिक एवं तपस्थली गोघटपुर स्थित मठ पहुंची । यात्रा के दौरान चिलचिलाती धूप कभी पानी की बौछारें और लंबे पैदल मार्ग की थकान भी शिवभक्तों के हौसलों को डिगा नहीं पाई । पैरों में छाले होने के बावजूद, भोले के दीवाने बाबा की भक्ति के रस में सराबोर होकर निरंतर आगे बढ़ते रहे । गोघटपुर मठ पहुंचकर मुख्य अनुष्ठान के अंतर्गत समस्त कांवड़ियों ने मंत्रोच्चार के बीच भोलेनाथ का पवित्र जलाभिषेक व दुग्धाभिषेक किया । श्रद्धालुओं ने गर्भगृह में शीश नवाकर देवाधिदेव महादेव से संपूर्ण क्षेत्र की सुख, समृद्धि, खुशहाली और निरंतर प्रगति की मंगल कामना की ।

“जीरापुर से गोघटपुर तक पलक-पावड़े बिछाकर हुआ शिवभक्तों का सत्कार”

इस पावन यात्रा के मार्ग में सनातन धर्म के गौरवशाली संस्कारों और अटूट श्रद्धा का अनूठा दृश्य देखने को मिला । जीरापुर के मुख्य मंदिर मार्ग से निकलने के बाद जैसे नगर से होकर गुजरी लोगो ने हर चौराहे पर वही यात्रा ग्रामीण अंचलों की ओर बढ़ी,ग्राम मेनाखेड़ी, धतुरिया और कोड़क्या में ग्रामीणों ने पलक-पावड़े बिछाकर कांवड़ियों का आत्मीय अभिनंदन किया । माचलपुर पहुंचते ही उत्साह का ज्वार चरम पर नजर आया,यहाँ स्थानीय नागरिकों और धार्मिक संगठनों द्वारा रावण बल्डी से लेकर नगर की सीमा के बाहर तक भव्य स्वागत किए गए थे, जहां से निरंतर पुष्पवर्षा की जा रही थी । कांवड़धारियों की सेवा को साक्षात ईश्वर की सेवा मानकर ग्रामीणों ने जगह-जगह शीतल जल, फलाहारी खिचड़ी और मौसमी फलों की महाप्रसादी का वितरण कर पुण्य लाभ अर्जित किया ।

“गोघटपुर प्रवेश से मंदिर तक बना अलौकिक भक्ति गलियारा”

कांवड़ यात्रा जब अपने अंतिम पड़ाव गोघटपुर पहुंची,तो दृश्य पूरी तरह अलौकिक हो उठा,गोघटपुर के मुख्य प्रवेश पर ग्रामीणों ने यात्रा बड़े जोश से अगवानी की । प्रवेश से लेकर ऐतिहासिक मठ मंदिर तक के पूरे रास्ते पर कांवड़ियों का स्वागत किया गया आयोजकों के अनुसार, लोक-कल्याण की भावना से यह भव्य यात्रा प्रतिवर्ष पूरी श्रद्धा के साथ निकाली जाती है ।
इस पावन धार्मिक अनुष्ठान में अंचल की कई प्रमुख राजनीतिक नेताओं ने भी शिरकत की कई गणमान्य नागरिक सम्मिलित हुए । इन अपने कांवड़ कंधे पर उठाई और भगवान शिव के प्रति अपनी अगाध आस्था प्रकट करते हुए पैदल यात्रा की ।

Khushi Samvad
Author: Khushi Samvad

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