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सारंगपुर सिविल अस्पताल में डॉक्टरों का कमाल, 2 दिन के मैराथन सत्र में किए 12 जटिल ऑपरेशन ।

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संवेदनशीलता,मूक-बधिर युवक और मासूम बच्ची का सफल इलाज,बिना चीरे वाली ‘स्क्लेरोथेरेपी’ तकनीक का प्रयोग ।

घनश्याम शर्मा माचलपुर

राजगढ़ / माचलपुर :- सारंगपुर सिविल अस्पताल में चिकित्सा और मानवीय संवेदनशीलता की एक अनूठी मिसाल सामने आई है । अस्पताल के वरिष्ठ सर्जन डॉ. अंकुर देशवाली और उनकी समर्पित टीम ने शुक्रवार व शनिवार के विशेष मैराथन सत्र में कुल 12 अत्यंत जटिल ऑपरेशन्स को सफलता पूर्वक अंजाम दिया । सरकारी अस्पताल के सीमित संसाधनों में एक साथ इतने क्लिष्ट ऑपरेशन्स होना क्षेत्र के लिए बड़ी उपलब्धि है, अस्पताल प्रबंधन के अनुसार, इन सभी मरीजों का इलाज पूरी तरह निःशुल्क किया गया है, जिससे गरीब परिवारों को निजी अस्पतालों के भारी-भरकम खर्च से राहत मिली है ।

वरिष्ठ सर्जन डॉ. देशवाली ने बताया कि इस सत्र में कई केस बेहद चुनौतीपूर्ण थे जिसमें जुवेन बी (50 वर्ष) के बाएं पैर से एक अत्यंत विशाल सिस्ट (गांठ) को मेजर सर्जरी के जरिए सुरक्षित बाहर निकाला गया । वहीं एक संवेदनशील मामले में बोल व सुन पाने में असमर्थ 30 वर्षीय मूक-बधिर युवक सूरज पिता प्रकाश के पैर में गंभीर कॉर्न (गोखरु) की समस्या का टीम ने आत्मीयता के साथ सफल एक्सिजन ऑपरेशन किया । एक अन्य मामले में 8 वर्ष की मासूम सरबीन के पैर में गंभीर संक्रमण के चलते भरे 50 से 60 एमएल मवाद को डॉक्टरों ने तत्काल विशेष प्रक्रिया (I&D) अपनाकर निकाला और बच्ची को दर्द से राहत दी । इसके अलावा समीर पिता तारीफ की पीठ से ‘पायलोनिडल साइनस’ का ऑपरेशन कर अंदर छिपा बालों का गुच्छा व संक्रमित ग्रंथि साफ की गई, जबकि नर्मदा बाई की पीठ से एक बहुत बड़ी पुरानी गांठ निकाली गई ।

अस्पताल में आधुनिक तकनीकों को बढ़ावा देते हुए डॉ. देशवाली की टीम ने 80 वर्षीय बुजुर्ग रफ़ीक अली और सारंगपुर निवासी जाकिर खान की त्वचा की जटिल बीमारी ‘केलोइड’ का बिना किसी बड़े चीरे के, आधुनिक स्क्लेरोथेरेपी तकनीक से सफल इलाज किया । इसके अलावा कलाई की नाजुक नसों के बीच गैंग्लियोन सिस्ट से पीड़ित मेघा (21 वर्ष) व बच्ची आयशा का भी सफल ऑपरेशन हुआ । इंदौर निवासी सीमा के पेंडिकुलेटेड लाइपोमा को निकालकर बायोप्सी के लिए भेजा गया है, जबकि भगवती बाई के सेबेसियस सिस्ट और एक अन्य बच्चे के लाइपोमा का सफल उच्छेदन किया गया । इस मैराथन सत्र को सफल बनाने में सिस्टर इंचार्ज अर्चना खटकर, ओटी टेक्नीशियन भावना और वार्ड बॉय गौतम का सराहनीय सहयोग रहा । मरीजों के परिजनों ने डॉक्टरों को भगवान का रूप बताते हुए कहा कि जो इलाज बड़े शहरों के प्राइवेट अस्पतालों में हजारों में होता, वह यहाँ मुफ्त और सुरक्षित हो गया अस्पताल प्रबंधन के अनुसार सभी 12 मरीज अब पूरी तरह स्वस्थ हैं ।

Khushi Samvad
Author: Khushi Samvad

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