
राजगढ़ फाइल पहुंची तो अफसरों ने कहा था-15 दिन में नाप देंगे’महीनों बाद भी नहीं पहुंचे पटवारी ।
घनश्याम शर्मा माचलपुर
राजगढ़ / माचलपुर :- जिले में प्रशासनिक व्यवस्था और लंबे समय से चले आ रहे जमीन विवादों से तंग आकर एक पीड़ित किसान और उसके पिता ने विरोध का ऐसा अनोखा तरीका अपनाया है, जिसने पूरे कलेक्ट्रेट प्रशासन का ध्यान आकर्षित कर लिया । सारंगपुर तहसील के ग्राम कड़लावद निवासी पीड़ित जालमसिंह ने अधिकारियों तक अपनी फरियाद पहुंचाने के लिए वर्षों से दिए गए तमाम आवेदनों की एक लंबी माला तैयार की और कपड़ों से बांधकर सड़क से होकर कलेक्टर पहुंचे । और इस को अपने गले की माला और शरीर पर लपेटकर वह अपने बुजुर्ग पिता के साथ सीधे जनसुनवाई में कलेक्टर के सामने जा पहुंचा। कपड़ों पर बंधी अर्जियों की लड़ी और गले में आवेदनों का ‘हार’ देखकर वहां मौजूद तमाम वरिष्ठ और त्वरित अधिकारियों का ध्यान उनकी ओर आकर्षित हो गया और जनसुनवाई कक्ष में कुछ देर के लिए सभी का ध्यान अपनी और खींच लिया ।
“15 दिन में जमीन नापने का मिला था आश्वासन”
पीड़ित आवेदक जालमसिंह ने बताया कि अपनी कृषि भूमि (खसरा क्रमांक 975/7/2, रकबा 2.0230 हेक्टेयर) की नापजोख के लिए वह तहसील से लेकर कलेक्टर कार्यालय तक कई बार लिखित आवेदन दे चुका है । कुछ समय पहले उसकी फाइल राजगढ़ मुख्यालय पहुंचाई गई थी,जहां से उसे वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा आश्वासन मिला था कि आगामी 15 दिन के भीतर हर हाल में मौके पर जाकर जमीन नाप दी जाएगी । अधिकारियों का यह दावा पूरी तरह खोखला साबित हुआ और तय समय सीमा बीतने के महीनों बाद भी जमीन की पैमाइश नहीं हो सकी । इस प्रशासनिक वादा खिलाफी और लापरवाही से परेशान होकर आखिरकार पिता-पुत्र को यह अनोखा कदम उठाना पड़ा ।
“तहसील से लेकर कलेक्ट्रेट तक नहीं हुई सुनवाई”
आवेदक ने अपनी बेबसी जाहिर करते हुए बताया कि वह सारंगपुर तहसीलदार कार्यालय के टप्पा, बाबू, हल्का पटवारी, राजस्व निरीक्षक (RI) से लेकर राजगढ़ कलेक्ट्रेट में अपर कलेक्टर और कलेक्टर तक सभी के चक्कर काट चुका है। हर दफ्तर में आवेदन देकर न्याय की गुहार लगाई, लेकिन नीचे से लेकर ऊपर तक किसी भी स्तर पर उसकी सुध नहीं ली गई । हाल ही में राजस्व अमले द्वारा की गई तकनीकी जांच में सरकारी नक्शे और मौके की वास्तविक स्थिति में 120 मीटर का भारी अंतर भी सामने आया था, जिससे पारंपरिक सीमांकन फेल हो गया था, लेकिन उसके बाद भी मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया और पीड़ित को परेशान होना पड़ा ।
“समाधान नहीं मिला तो उठाएंगे अगला कदम”
कलेक्ट्रेट परिसर में मीडिया और अधिकारियों के सम्मुख जालमसिंह और उनके पिता ने दोटूक शब्दों में कहा कि वे इस बार अंतिम उम्मीद के साथ आवेदनों की यह माला पहनकर जनसुनवाई में कलेक्टर के सम्मुख न्याय मांगने आए हैं। यदि इस बार भी उनकी जमीन की सही नापजोख करने और आधुनिक रोवर मशीन उपलब्ध कराने का कोई ठोस आदेश या समाधान नहीं मिला, तो वे अब चुप नहीं बैठेंगे। इसके बाद वे प्रशासन के खिलाफ इससे भी बड़ा और अगला सख्त कदम उठाने को मजबूर होंगे, जिसकी पूरी जिम्मेदारी जिला प्रशासन की होगी ।
“कलेक्टर ने दिए त्वरित निराकरण के निर्देश”
जनसुनवाई कक्ष में इस हैरान कर देने वाले दृश्य को देखकर कलेक्टर ने मामले को अत्यंत संवेदन शीलता से लिया । उन्होंने आवेदनों के इस अंबार, तकनीकी रूप से आए 120 मीटर के अंतर और 15 दिन वाले आश्वासन की जानकारी मिलते ही संबंधित राजस्व अधिकारियों पर गहरी नाराजगी जताई । कलेक्टर ने सारंगपुर एसडीएम और स्थानीय तहसीलदार को तत्काल आधुनिक ‘रोवर मशीन’ (DGPS) की व्यवस्था करने और समय सीमा तय कर किसान की जमीन का सीमांकन पूर्ण करने के कड़े निर्देश मौके पर ही जारी कर दिए हैं ।









