
प्रशासन ने जल्द ठोस कदम नहीं उठाए,तो पूरे प्रदेश में उग्र आंदोलन होगा ।
घनश्याम शर्मा माचलपुर
माचलपुर / राजगढ़ :- जिले में आदिवासी समाज पर लगातार हो रहे उत्पीड़न, शोषण और अत्याचार की घटनाओं के विरोध में सर्व आदिवासी समाज का गुस्सा सड़कों पर फूट पड़ा । जिले के विभिन्न अंचलों से आए हजारों आदिवासियों और युवा शक्ति ने एकजुट होकर जिला मुख्यालय पर एक विशाल जनआंदोलन और आक्रोश रैली का आयोजन किया । राजगढ़ बिरसा मुंडा चौराहे से शुरू हुई यह रैली कलेक्ट्रेट पहुंची, जहाँ समाजजनों ने जमकर नारेबाजी की और महामहिम राज्यपाल व मुख्यमंत्री के नाम जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा ।
“युवा शक्ति और मातृशक्ति ने संभाली कमान”
आंदोलन की शुरुआत ऐतिहासिक बिरसा मुंडा चौराहे पर एकत्रित होकर हुई । यहाँ से पारंपरिक वाद्य यंत्रों की थाप और “आदिवासी एकता जिंदाबाद” व “जय जोहार” के गगनभेदी नारों के साथ रैली शहर के मुख्य मार्गों से होते हुए जिला मुख्यालय (कलेक्ट्रेट) पहुंची । रैली में युवाओं और महिलाओं की भागीदारी विशेष रूप से उल्लेखनीय रही, जिन्होंने समाज पर हो रहे अन्याय के खिलाफ अपनी आवाज बुलंद की ।
“ज्ञापन के मुख्य बिंदु और समाज की प्रमुख मांगें”
दोषियों पर हो सख्त कार्रवाई: जिले में आदिवासियों के साथ मारपीट, उत्पीड़न और प्रताड़ना की घटनाओं पर तुरंत रोक लगाई जाए तथा दोषियों पर एससी-एसटी एक्ट (SC/ST Act) के तहत सख्त से सख्त कार्रवाई की जाए।
विशेष टास्क फोर्स का हो गठन: आदिवासी समाज के खिलाफ होने वाले अपराधों और उत्पीड़न के मामलों की त्वरित तथा निष्पक्ष जांच के लिए जिला स्तर पर एक विशेष पुलिस सेल या टास्क फोर्स का गठन किया जाए ।संवैधानिक अधिकारों की हो रक्षा: पेसा कानून और वनाधिकार कानूनों का जमीन पर कड़ाई से पालन हो। आदिवासियों को उनकी पैतृक भूमि से जबरन बेदखल करने की साजिशों पर प्रशासन तुरंत रोक लगाए ।
मजरे-टोलों में मिले पूर्ण सुरक्षा: सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों, दूरदराज के मजरे-टोलों और गांवों में रहने वाले भील भिलाला समाज के परिवारों को पूर्ण सुरक्षा मुहैया कराई जाए, ताकि वे भयमुक्त वातावरण में रह सकें । पीड़ित परिवारों को मिले आर्थिक मुआवजा: हाल ही में राजगढ़ जिले में उत्पीड़न और अन्याय का शिकार हुए पीड़ित आदिवासी परिवारों को सरकार की तरफ से उचित आर्थिक सहायता और मुफ्त कानूनी मदद प्रदान की जाए ।
“दमन चक्र के खिलाफ आर-पार की लड़ाई का ऐलान”
कलेक्ट्रेट परिसर में जनसभा को संबोधित करते हुए समाज के वरिष्ठ नेताओं ने कहा कि आदिवासी समाज हमेशा से शांतप्रिय रहा है, लेकिन इसे समाज की कमजोरी न समझा जाए । वक्ताओं ने दो टूक शब्दों में प्रशासन को चेताया कि यदि ज्ञापन में उठाए गए बिंदुओं पर जल्द ही धरातल पर ठोस कार्रवाई नहीं की गई, तो यह आंदोलन चक्काजाम और उग्र रूप अख्तियार करेगा, जिसकी संपूर्ण जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी । ज्ञापन सौंपने के दौरान सर्व आदिवासी भील भिलाला समाज के प्रमुख पदाधिकारी,सामाजिक कार्यकर्ता, विभिन्न क्षेत्रों से आए जन प्रतिनिधि और बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित थे ।









