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ब्यावरा में गरीबों के हक पर डाका,रिटायर्ड बैंक मैनेजर का अमीर बेटा 20 साल से ले रहा था BPL राशन ।

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आंगनवाड़ी भर्ती में 5 अंक पाने के लिए भी लगाया था कार्ड,शिकायत के बाद प्रशासन ने किया निरस्त,अब कलेक्टर के निर्णय पर टिकी नजरें ।

घनश्याम शर्मा माचलपुर

राजगढ़ / माचलपुर :-
सरकारी योजनाओं के दुरुपयोग और अपात्रों द्वारा शासन को गुमराह कर लाभ लेने का एक गंभीर मामला प्रकाश में आया है । नर्मदा झाबुआ ग्रामीण बैंक के एक रिटायर्ड ब्रांच मैनेजर के बेटे का परिवार पिछले 20 वर्षों से बीपीएल (गरीबी रेखा के नीचे) राशन कार्ड धारक बना हुआ था । इतना ही नहीं,इस कार्ड का उपयोग सरकारी भर्ती में अतिरिक्त अंक प्राप्त करने के लिए भी किया गया, लेकिन सजग नागरिकों की शिकायत और प्रारंभिक जांच के बाद प्रशासन ने त्वरित कार्रवाई करते हुए उक्त राशन कार्ड को निरस्त कर दिया है ।

“जांच में सामने आई संपन्नता 3 मंजिला मकान और कार”

यह मामला ब्यावरा के वार्ड क्रमांक 14, हजारीलाल मार्ग (इंदौर नाका) का है,यहां के निवासी गोविंद पुष्पद पिता दिनेश चंद्र पुष्पद के खिलाफ एक शिकायतकर्ता ने पुख्ता प्रमाणों के साथ एसडीएम ब्यावरा,कलेक्टर राजगढ़ और नगर पालिका को लिखित शिकायत सौंपी थी । शिकायत के आधार पर जब प्रशासन और नगर पालिका की संयुक्त टीम जांच करने पहुंची,तो वहां बीपीएल सूची के मापदंडों के विपरीत अत्यधिक संपन्नता पाई गई । जांच रिपोर्ट के अनुसार, जिस परिवार का नाम 2006 से गरीबी रेखा की सूची में दर्ज था, उनके पास,3 से 4 पक्के मकान और एक 3 मंजिला बिल्डिंग है । निजी प्लॉट, दोपहिया व चारपहिया वाहन मौजूद हैं,घर में AC, फ्रिज और कूलर जैसी आधुनिक सुख-सुविधाएं संचालित मिलीं ।

“आंगनवाड़ी सहायिका भर्ती में भी किया इस्तेमाल”

मामले में दूसरा बड़ा मोड़ तब आया जब महिला एवं बाल विकास विभाग की आंगनवाड़ी सहायिका भर्ती प्रक्रिया शुरू हुई, गोविंद पुष्पद की पत्नी मोनिका पुष्पद ने इस पद के लिए आवेदन किया था । मध्य प्रदेश शासन के नियमानुसार, बीपीएल परिवार की महिला अभ्यर्थियों को मेरिट में 5 अतिरिक्त अंक देने का प्रावधान है । आवेदिका ने भर्ती में लाभ लेने के लिए इसी बीपीएल कार्ड को फॉर्म के साथ संलग्न किया था ।

“गरीब महिलाओं में आक्रोश, उठाई कार्रवाई की मांग”

इस पूरे खुलासे के बाद स्थानीय वार्ड वासियों और विशेषकर जरूरतमंद महिलाओं में गहरा असंतोष है । स्थानीय लोगों का आरोप है कि इस प्रकार के फर्जीवाड़े के कारण वार्ड की उन वास्तविक गरीब और पात्र महिलाओं का हक प्रभावित होता है,जो इस रोजगार की असली हकदार हैं ग्रामीणों ने इस पूरी चयन प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने की मांग की है ।

“अब कलेक्टर और विभाग के पाले में गेंद”

प्रशासन द्वारा राशन कार्ड निरस्त किए जाने के बाद अब आगे की पूरी वैधानिक प्रक्रिया राजगढ़ कलेक्टर और महिला बाल विकास विभाग के अधीन है । नियमानुसार फर्जी दस्तावेज प्रस्तुत करने पर पात्रता निरस्त करने और वैधानिक कार्रवाई के प्रावधान हैं,अब क्षेत्र के नागरिकों को उम्मीद है कि प्रशासन इस पूरे मामले की गहनता से निष्पक्ष जांच कर न्यायसंगत और उचित कानूनी कदम उठाएगा, ताकि शासकीय योजनाओं की शुचिता बनी रहे ।

Khushi Samvad
Author: Khushi Samvad

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