
सजग नागरिक भोलाराम दुबे ने सोशल मीडिया पर उठाई आम आदमी की व्यथा, माचलपुर के लिए कलेक्टर से की सख्त कार्रवाई की मांग ।
ऊंचाई से गिरती लापरवाही,मनमाने ढंग से 3 फीट आगे पाइप निकालकर वार्ड की सड़कों कोभी कर रहे हैं छलनी !
घनश्याम शर्मा माचलपुर
राजगढ़ / माचलपुर :- मकान इंसान की आर्थिक समृद्धि का प्रतीक होता है, लेकिन राजगढ़ जिले के माचलपुर में इन दिनों एक अजीबो गरीब सामाजिक संवेदन हीनता देखने को मिल रही है । लोग लाखों-करोड़ों रुपए खर्च कर दो,तीन और चार मंजिला आलीशान पक्के मकान तो खड़े कर लेते हैं, लेकिन जैसे ही बात नागरिक कर्तव्यों की आती है,वे घोर लापरवाही पर उतर आते हैं ।विशेष रूप से माचलपुर के वार्ड क्रमांक 6 और आसपास के वार्डो में यह समस्या विकराल रूप ले चुकी है । आलीशान इमारतें बनाने वाले कई लोग चंद सौ रुपयों के पाइप बचाने के चक्कर में अपनी छतों और बालकनी के पानी के पाइप को सीधे नीचे उतारने के बजाय,उसे 2 से 3 फीट आगे मुख्य सड़क की तरफ निकाल देते हैं । नतीजा यह होता है कि आसमान से बरसने वाला पानी जब इन बहुमंजिला इमारतों के पाइपों से सीधे बुलेट की रफ्तार की तरह नीचे सड़क पर गिरता है, तो वहां से गुजरने वाले राहगीर,बुजुर्ग और मासूम स्कूली बच्चे इसकी चपेट में आ जाते हैं ।
“छाता धरे रह गया,भीग गई मासूम की किताबें” !
इस गंभीर समस्या को लेकर माचलपुर के सजग नागरिक भोलाराम दुबे ने जिला कलेक्टर के नाम सोशल मीडिया और व्हाट्सएप ग्रुपों पर एक मर्मस्पर्शी पोस्ट लिखी है,जिसमें दुबे ने अपने पत्र में सुबह की एक आंखों देखी घटना का जिक्र करते हुए लिखा— “आज सुबह एक छोटी बच्ची हाथ में छाता और बस्ता लिए विद्यालय जा रही थी । सड़क के दोनों तरफ बहुमंजिला इमारतें थीं ऊपर से गिरते पानी के तेज धार के वेग के कारण बच्ची अपना छाता संभाल नहीं सकी । उसकी स्कूल की पुस्तकें और कपड़े पूरी तरह भीग गए,वह बड़ी मुश्किल से वहां से रोते हुए निकल सकी । भोलाराम दुबे का कहना है कि यह घटना महज एक उदाहरण है माचलपुर के इस वार्ड और नगर के हर मोहल्ले में ऐसे कई रसूखदार मिल जाएंगे,जिनके पास ऊंची इमारतें बनाने के पैसे तो हैं, लेकिन 600 रु का पाइप लगाने पैसा नहीं है ।
“सिर्फ राहगीर ही नहीं,नगर की सड़कों को भी लग रहा चूना”
इस लापरवाही की दोहरी मार पड़ रही है पहली मार उन मासूम बच्चों और राहगीरों पर पड़ती है जो बिना किसी गलती के सड़क पर चलते हुए ऊपर से गिरते गंदे और तेज पानी से सरावोर हो जाते हैं । दूसरी बड़ी मार शासन प्रशासन के राजस्व पर पड़ रही है, दो-तीन मंजिल की ऊंचाई से जब पानी लगातार एक ही जगह पर सड़क पर गिरता है, तो डामर और कंक्रीट की मजबूत सड़कें भी वहां से उखड़ जाती हैं और बड़े-बड़े गड्ढे बन जाते हैं । जनता के टैक्स के पैसे से बनी वार्ड की सड़कें इन चंद लापरवाह लोगों के कारण समय से पहले बर्बाद हो रही हैं।
“माचलपुर नगर परिषद तत्काल जारी करे सख्त नोटिस”
सोशल मीडिया पर भोलाराम दुबे द्वारा उठाए गए इस मुद्दे को अब माचलपुर के बुद्धिजीवियों ने भी समर्थन दिया मांग की है कि जिलाधीश महोदय इस मामले में तत्काल संज्ञान लें । माचलपुर नगर परिषद प्रशासन को आदेश जारी किए जाएं कि वे विशेष रूप से वार्ड क्रमांक 6 और अन्य प्रभावित क्षेत्रों में ऐसे भवनों को चिन्हित करें जिन्होंने पाइप सड़क पर खुले छोड़ रखे हैं। इन भवन स्वामियों को तत्काल वैधानिक नोटिस जारी कर पाइप को व्यवस्थित ढंग से नीचे उतारने की समय-सीमा दी जाए । यदि तय समय में मकान मालिक पाइप नहीं सुधारते हैं, तो कड़ा प्रशासनिक एक्शन लिया जाए । बड़ा सवाल यह है कि क्या प्रशासन माचलपुर में ऐसे ‘आर्थिक रूप से समृद्ध लेकिन सामाजिक रूप से संवेदनहीन’ लोगों पर नकेल कसेगा, या फिर हर बारिश में स्कूली बच्चे इसी तरह भीगने और सड़कें टूटने का सिलसिला जारी रहेगा ? यह देखना बाकी है ।










