
नियमों को ताक पर रखकर सीमेंट के पक्के फर्श पर सीधे बिछाई सिंथेटिक मैट,राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय मानकों की उड़ाईं धज्जियां ।
घनश्याम शर्मा माचलपुर
राजगढ़ / माचलपुर :- राजगढ़ में खेल और युवा कल्याण विभाग की कार्यप्रणाली एक बार फिर गंभीर सवालों के घेरे में आ गई है । उत्कृष्ट विद्यालय परिसर स्थित बैडमिंटन हॉल में अभ्यास करने वाले जिले के उभरते हुए खिलाड़ी विभाग की कथित लापरवाही और उदासीनता का भारी खमियाजा भुगत रहे हैं । खिलाड़ियों का सीधा आरोप है कि इस बैडमिंटन कोर्ट का निर्माण तय तकनीकी मानकों के अनुरूप नहीं किया गया है, जिसके कारण न सिर्फ उनका खेल प्रदर्शन प्रभावित हो रहा है बल्कि उनके स्वास्थ्य पर भी इसका बेहद प्रतिकूल असर पड़ रहा है ।
“सीमेंट फ्लोरिंग पर सीधे बिछा दी मैट,गायब है वुडन बेस”
खिलाड़ियों और खेल विशेषज्ञों के अनुसार,राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय नियमों के तहत किसी भी सिंथेटिक बैडमिंटन कोर्ट के नीचे लकड़ी का आधार होना अनिवार्य है । यह वुडन बेस खिलाड़ियों के कूदने और दौड़ने के दौरान शॉक एब्जॉर्बर (झटका सोखने) का काम करता है । इसके विपरीत, राजगढ़ के इस कोर्ट में सीमेंट की पक्की फ्लोरिंग के ऊपर ही सीधे सिंथेटिक मैट बिछा दी गई है । इस हार्ड फ्लोर (कड़े फर्श) के कारण खिलाड़ियों के घुटनों, एड़ियों और जोड़ों में लगातार गंभीर दर्द की शिकायतें आ रही हैं, जिससे खिलाड़ियों की गति और कोर्ट पर प्रदर्शन दोनों बुरी तरह प्रभावित हो रहे हैं ।
“अन्य जिलों में आधुनिक सुविधाएं, राजगढ़ से सौतेला व्यवहार क्यों”?
समस्या से जूझ रहे बच्चों और वरिष्ठ खिलाड़ियों का कहना है कि प्रदेश के अन्य जिलों में बैडमिंटन कोर्ट का निर्माण मानकों के अनुसार वुडन बेस पर सिंथेटिक फ्लोरिंग लगाकर किया गया है । ऐसे में राजगढ़ में इस तरह की अनदेखी कई बड़े संदेह पैदा करती है, अब यह बड़ा सवाल उठने लगा है कि क्या कोर्ट निर्माण के समय स्वीकृत तकनीकी डीपीआर (DPR) और गाइडलाइंस का पालन किया गया था या नहीं ? यदि नियमों की अनदेखी हुई है,तो इसके लिए जिम्मेदार अधिकारी या ठेकेदार कौन हैं ?
“कोच और खिलाड़ियों की शिकायतों को विभाग ने किया दरकिनार”
पीड़ित खिलाड़ियों का आरोप है कि उन्होंने अपनी इस गंभीर समस्या से खेल विभाग के अधिकारियों को कई बार अवगत कराया था । इतना ही नहीं, खेल की बारीकियों को समझने वाले स्थानीय कोच मनी शर्मा और सीनियर कोच प्रकाश परमार ने भी इस तकनीकी खामी की लिखित और मौखिक जानकारी वरिष्ठ अधिकारियों तक पहुंचाई थी । इसके बावजूद, लंबे समय से खेल विभाग के आला अधिकारियों ने इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया और मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया ।
“भ्रष्टाचार और वित्तीय अनियमितता की बू”
इस पूरे मामले के सामने आने के बाद अब खेल विभाग में बड़े भ्रष्टाचार और वित्तीय अनियमितता की आशंका जताई जा रही है । सवाल यह उठ रहा है कि क्या निर्माण कार्य के लिए स्वीकृत बजट में वुडन बेस की राशि स्वीकृत थी ? यदि हाँ, तो वह राशि कहाँ खर्च की गई ? खिलाड़ियों और खेल प्रेमियों का कहना है कि विभाग चंद रुपयों के फेर में जिले की उभरती हुई खेल प्रतिभाओं के भविष्य और उनके शरीर के साथ खिलवाड़ कर रहा है ।
“खिलाड़ियों ने की निष्पक्ष जांच की मांग”
वर्तमान में जिले के खिलाड़ी इस पूरे निर्माण कार्य की उच्च स्तरीय और निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं । खिलाड़ियों का कहना है कि जब तक कोर्ट को तोड़कर नियमों के अनुसार दोबारा वुडन बेस के साथ तैयार नहीं किया जाता, तब तक उनका खेल करियर दांव पर लगा रहेगा । अब देखना यह है कि जिला प्रशासन और खेल मंत्रालय इस गंभीर लापरवाही पर क्या संज्ञान लेता है ।










