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जुल्म के खिलाफ सब्र और सच्चाई का पैगाम दे गए इमाम हुसैन, माचलपुर में अकीदत के साथ संपन्न हुआ मुहर्रम पर्व ।

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मिट गया जुल्म का नामोनिशान, अमर हो गई हुसैन की सच्चाई, इंसानियत और हक की राह पर सब कुछ न्योछावर करने की सीख दे गए कर्बला के शहीद ।

घनश्याम शर्मा माचलपुर

माचलपुर / राजगढ़ :- ‘हक और इंसानियत के लिए सर्वस्व न्योछावर कर देने का नाम है कर्बला है । पैगंबर मुहम्मद के नवासे हजरत इमाम हुसैन और उनके 72 जांबाज साथियों की बेमिसाल शहादत की याद में मनाया जाने वाला मुहर्रम पर्व नगर माचलपुर में पूरी धार्मिक शिद्दत,अकीदत ( श्रद्धा ) और गमगीन माहौल के साथ संपन्न हुआ । कर्बला का मैदान केवल इतिहास का एक पन्ना नहीं, बल्कि पूरी इंसानियत के लिए सब्र,त्याग और जीवंत सिद्धांतों की सबसे बड़ी पाठशाला है यह मुकद्दस ( पावन ) दिन हमें सिखाता है कि जुल्म और अधर्म का साम्राज्य चाहे कितना भी ताकतवर क्यों न हो,सत्य और न्याय के आगे उसे एक दिन घुटने टेकने ही पड़ते हैं । इमाम हुसैन ने सत्य की रक्षा के लिए अपने पूरे परिवार और दुधमुंहे बच्चे तक की कुर्बानी दे दी,लेकिन जालिम शासक के आगे सिर झुकाकर जमीर का सौदा नहीं किया । सदियों बाद भी इसी अज़ीम (महान) शहादत की तड़प माचलपुर के जनमानस में साफ दिखाई दी, जहां कत्ल की रात से लेकर विदाई की सुबह तक, आंख नम थी और या हुसैन’ की गगन भेदी सदाओं के साथ आंसुओं के सैलाब में डूबा रहा ।

“कत्ल की रात’बड़े बाजार और भोर में ठिकानों पर लौटे ताजिए”

मुहर्रम के इस सफर की शुरुआत ‘कत्ल की रात’ (शहादत की रात) से हुई। इस मुकद्दस रात को नगर के मुस्लिम पंचायत मुसलमान मोहल्ला, नाना बाजार के मेवाती समाज और अब्बास अली परिवार सहित पांचों स्थानों पर ताजियों को पूरी अदब के साथ कसाया (सजाया) गया । और मातमी धुनों सुलगते लोबान के बीच ये ताजिए पहली बार नगर के मुख्य मार्गों से होते हुए ‘बड़े बाजार’ पहुंचे । जहां पूरी रात बड़े बाजार में अकीदत ( श्रद्धालुओं )मंदों का ताँता लगा रहा । इसके बाद, अलसुबह करीब पांच बजे सभी ताजिए सम्मान के साथ पुनः अपने-अपने ठिकानों (इमाम बाड़ों) पर लौट आए ।

“दूसरे दिन दोपहर बाद फिर ताजियों से सजा ‘बडा बाजार”

अगले दिन यानि शुक्रवार दोपहर बाद करीब 4 बजे के बीच, ये सभी आकर्षक नक्काशी से निर्मित ताजिए एक बार फिर अपने ठिकानों से मातमी धुन के साथ निकल कर ‘बड़े बाजार’ पहुंचे जहां पर पांचों ताजियों का ऐतिहासिक मिलन हुआ,इस दौरान पूरा बाजार क्षेत्र के लोगो की भारी भीड़ से घिर गया । श्रद्धालुओं ने ताजियों पर अदब के साथ प्रसाद चढ़ाया, लोभान गलाया और मन्नतें मांगीं और देश में अमन-चैन की दुआएं कीं । इस मौके पर अखाड़ा हुआ जिसमें अखाड़े के पहलवानों ने हैरतअंगेज करतब दिखाए जिसमें उस्तादों और युवा पहलवानों ने लाठी, तलवार बाजी,पटेबाजी सहित विभिन्न करतबों का प्रदर्शन किया । यह शौर्य प्रदर्शन कर्बला के मैदान में हक के लिए लड़ने वाले शहीदों की बहादुरी और उनके अडिग जज्बे को एक प्रतीकात्मक श्रद्धांजलि थी ।

“प्रशासन व पुलिस रहा मुस्तैद”

सैकड़ों की भीड़ और कानून व्यवस्था को देखते हुए स्थानीय प्रशासन व पुलिस पूरी तरह मुस्तैद नजर आया इस मौके पर जहां पुलिस बल पूरे समय चप्पे-चप्पे पर तैनात रहा वही नायब तहसीलदार कपिल शर्मा,आर आई राजेंद्र बरदानिया,पटवारी भेरूलाल दांगी व आशीष नागर सहित विभिन्न अधिकारी कर्मचारी रहे । कत्ल की रात से लेकर सुबह डोब बांध पर ताजियों के ठंडे होने तक पुलिस टीम ने सुरक्षा व्यवस्था संभाली, साथ इस मौके पर मुस्लिम समाज के अहले इस्लाम सदर सुलामुन खान,मुस्लिम पंचायत सदर स्माइल खान मेवाती पंचायत सदर आबिद भाई मंसूरी,परवेज कुरेशी ,पर्व सदर मुस्लिम पंचायत शेख जहीर,नदीम खान सकील खान,अखाड़ा उस्ताद साबिर खान,कल्लू खा मेवाती, आरिफ मंसूरी,आबिद अली,जुनेद खान आदि मौजूद रहे । आयोजन शांतिपूर्ण और सौहार्दपूर्ण वातावरण में संपन्न हुआ ।

“पूरी रात बाजार में ठहराव, अलसुबह ‘डोब बांध’ पर गमगीन विदाई”

शौर्य प्रदर्शन के बाद, ये ताजिए पूरी रात बड़े बाजार में ही अदब के साथ मौजूद रहे। पूरी रात लोग जियारत (दर्शन) के लिए आते रहे । इसके बाद, अगले दिन सुबह-सुबह विदाई की अंतिम घड़ी आई। भारी मन, सिसकियों और गगनभेदी मातमी धुनों के बीच ताजियों का कारवां नगर के ऐतिहासिक ‘डोब बांध’ पर पहुंचा। यहाँ पूरी धार्मिक रीति-रिवाज, एहतराम और बेहद गमगीन माहौल में ताजियों को ठंडा (सुपुर्दे ए जल) किया गया ।

Khushi Samvad
Author: Khushi Samvad

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