Edition

राजयोग से आत्मा बनेगी एवर हेल्दी-हैप्पी, योग दिवस पर पिताओं के संघर्ष को सम्मान देने का लिया दृढ़ संकल्प ।

👇समाचार सुनने के लिए यहां क्लिक करें

स्वयं को ‘चैतन्य ज्योति बिंदु’ समझकर कर्म करने से मिलेगी हर क्षेत्र में सफलता :- बीके सीमा दीदी

घनश्याम शर्मा

राजगढ़ / माचलपुर :- “समर्पण और त्याग की चर्चा तो समाज में हर कोई करता है, लेकिन एक पिता की पर्दे के पीछे की भूमिका, उनका मूक संघर्ष और असीम त्याग कहीं न कहीं इतिहास और परिवारों में नजरअंदाज हो जाता है। पिता वह मूक स्तंभ है जो खुद धूप में जलकर पूरे परिवार को छांव देता है। आइए, इस पावन अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस पर हम सब यह दृढ़ संकल्प करें कि हर पिता के इस सर्वोच्च त्याग और संघर्ष का हम सदैव दिल से सम्मान करेंगे।”उक्त भावपूर्ण और प्रेरणादायक उद्बोधन ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय, माचलपुर में आयोजित 21 जून अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस एवं पितृ दिवस (फादर्स डे) के विशेष संयुक्त महोत्सव पर मुख्य शिक्षिका ब्रह्माकुमारी सीमा दीदी ने व्यक्त किए ।
“स्वंय को ‘रथ का रथी’ मानकर कर्म करने से मिलेगी सफलता”
सीमा दीदी ने राजयोग के गूढ़ रहस्यों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि राजयोग अपने आप में एक विस्तृत ब्रह्मांडीय विज्ञान है। जब हम यह जान जाते हैं कि ‘मैं वास्तव में एक चैतन्य ज्योति बिंदु आत्मा हूँ और यह शरीर मेरा मात्र एक रथ है, तथा मैं भृकुटि के मध्य विराजमान इस रथ को चलाने वाली रथी हूँ’, तब हमारे सारे मानसिक तनाव स्वतः समाप्त हो जाते हैं । उन्होंने आगे कहा कि अपने मन, बुद्धि, संस्कार और इन पंच कर्मेंद्रियों का मालिक (आत्मा राजा) बनकर जब हम कर्मक्षेत्र में ‘साक्षी दृष्टा’ भाव के साथ कार्य-व्यवहार करते हैं, तो आत्मा स्वतः ही एवर हेल्दी, वेल्थी और हैप्पी बनती जाती है । खुशी, शांति और आंतरिक शक्तियों से संपन्न होने के कारण ऐसी आत्मा को हर कार्यक्षेत्र में निश्चित ही सफलता प्राप्त होती है, राजयोग ही वह एकमात्र ईश्वरीय मार्ग है जिससे हम वर्तमान में स्वयं के राजा बनते हैं और भविष्य में भी डबल सिरताज चक्रवर्ती सम्राट पद के अधिकारी बनते हैं ।

“परमात्मा से सर्व संबंध जोड़ने की सर्वश्रेष्ठ विधि है राजयोग”

भारतीय संस्कृति की महिमा गाते हुए उन्होंने कहा कि योग हमारी संस्कृति की वह अनमोल धरोहर है, जो मन, आत्मा और शरीर के समग्र विकास का आधार है। राजयोग का सीधा अर्थ है—आत्मा का परमात्मा से मिलन । जब आत्मा उस परमपिता से जुड़कर उनका स्मरण, मनन, चिंतन, वर्णन और उनकी लगन में मगन होती है, तो वह ज्ञान, गुण और शक्तियों में परमात्मा के समान ‘मास्टर सर्वशक्तिमान’ बन जाती है,ईश्वर से सर्व संबंध जोड़ने की इससे श्रेष्ठविधि पूरी सृष्टि में कोई दूसरी नहीं है ।

“सोनोरा की अनोखी पहल: जब 19 जून 1910 को दुनिया ने माना पिता का लोहा”

इस वर्ष योग दिवस के साथ ‘फादर्स डे’ के विशेष संयोग पर चर्चा करते हुए सीमा दीदी ने इसके ऐतिहासिक महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने बताया कि अमेरिका की रहने वाली एक बेटी सोनोरा स्मार्ट डॉट ने अपने पिता के असीम संघर्ष को दुनिया के सामने लाने के लिए एक अनूठी मुहिम शुरू की थी। सोनोरा के पिता विलियम जैक्सन ने अपनी पत्नी के निधन के पश्चात अकेले ही, बिना किसी शिकायत के, अपने 6 बच्चों की परवरिश की थी । उन्होंने बच्चों को मां की ममतामयी भावनाएं, प्यार और पिता का मज़बूत संरक्षण दोनों एक साथ दिया।बेटी सोनोरा ने महसूस किया कि मां के त्याग की चर्चा तो हर जगह होती है, लेकिन पिता के संघर्ष को नजरअंदाज कर दिया जाता है । इसी सोच के साथ उन्होंने हर साल एक दिन पिता को समर्पित करना सुनिश्चित किया और दुनिया का पहला आधिकारिक पिता दिवस 19 जून 1910 को मनाया गया ।

“संदेश,पारलौकिक और लौकिक पिता के प्रति कृतज्ञता का पर्व”

दीदी ने भावुक संदेश देते हुए कहा कि जैसे एक लौकिक पिता अपने बच्चों के उज्जवल भविष्य के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर कर देता है,ठीक वैसे ही हमारे पारलौकिक परमपिता परमात्मा (शिव बाबा) भी हमें राजयोग के माध्यम से सुख, शांति और पवित्रता का अविनाशी ईश्वरीय वर्सा (अधिकार) देते हैं । आज के दिन हमें अपने लौकिक पिताओं के चरणों में कृतज्ञता व्यक्त करने के साथ-साथ,उस पारलौकिक पिता से योग लगाकर अपने जीवन को धन्य बनाना चाहिए । कार्यक्रम के समापन सत्र में ब्रह्माकुमारी अनीता दीदी ने अपनी मधुर वाणी से समारोह में गरिमामयी उपस्थिति दर्ज कराने वाले सभी अतिथियों, प्रबुद्ध नागरिकों और राजयोग साधकों का हृदय से आभार व धन्यवाद ज्ञापित किया ।

Khushi Samvad
Author: Khushi Samvad

Leave a Comment

और पढ़ें

traffic tail