
ग्रामीण अंचल के प्रतिभावान युवा अनिल कुमारदांगी ने कठिन परीक्षा में अपनी मेधा का लोहा मनवाया, क्षेत्र में जश्न का माहौल ।
घनश्याम शर्मा माचलपुर
माचलपुर :- कहते हैं कि अगर हौसलों में उड़ान और इरादों में मजबूती हो, तो राह की हर बाधा घुटने टेक देती है। इसे सच कर दिखाया है राजगढ़ जिले के एक छोटे से गांव ब्राह्मणगांव के प्रतिभावान युवा अनिल कुमार दांगी ने। मध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग (MPPSC) द्वारा आयोजित सहायक प्राध्यापक (भूगोल) परीक्षा में अनिल ने अपनी मेधा का लोहा मनवाते हुए समूचे मध्य प्रदेश में दूसरा (Rank 2) स्थान हासिल किया है। इस ऐतिहासिक गौरव के बाद अब वे कॉलेज के छात्रों को भूगोल की बारीकियां सिखाएंगे। अनिल की इस स्वर्णिम सफलता से न सिर्फ उनके गांव में जश्न का माहौल है, बल्कि पूरे राजगढ़ जिले का सीना गर्व से चौड़ा हो गया है ।
“विषय बदला पर नहीं बदला लक्ष्य: गणित से ग्रेजुएशन के बाद भूगोल में किया टॉप”
अनिल कुमार दांगी की शैक्षणिक यात्रा बहुमुखी प्रतिभा और कड़ी मेहनत की एक अनूठी मिसाल है । उन्होंने अपनी हायर सेकेंडरी (12वीं) की शिक्षा एडवांस किड्स अकैडमी, जीरापुर से पूरी की थी। इसके बाद वर्ष 2021 में उन्होंने श्री जैन दीवाकर महाविद्यालय, इंदौर से गणित विषय में स्नातक (B.Sc.) की डिग्री ली। विज्ञान पृष्ठभूमि होने के बावजूद उन्होंने कला क्षेत्र की ओर रुख किया और वर्ष 2023 में अटल बिहारी वाजपेयी शासकीय कला एवं वाणिज्य महाविद्यालय, इंदौर से भूगोल विषय में स्नातकोत्तर (M.A.) की उपाधि प्राप्त की । विषय बदलने के इस कठिन फैसले के बाद भी उन्होंने प्रादेशिक स्तर पर सीधे दूसरा स्थान हासिल कर सबको चौंका दिया ।
“सफलता की हैट्रिक: लगातार पास कीं कई बड़ी परीक्षाएं”
सहायक प्राध्यापक बनने से पहले भी अनिल ने राष्ट्रीय और राज्य स्तर पर अपनी योग्यता का लोहा मनवाया है,2023 मध्य प्रदेश राज्य पात्रता परीक्षा (SET) क्वालिफाई की । 2024 देश की सबसे प्रतिष्ठित परीक्षा यूजीसी-नेट जेआरएफ (UGC-NET JRF) में सफलता पाई, इसके साथ ही उन्होंने MPPSC राज्य सेवा परीक्षा 2021, 2022 और 2023 की मुख्य (लिखित) परीक्षाएं भी लगातार उत्तीर्ण की हैं ।
“ग्रामीण युवाओं के लिए बने रोल मॉडल”
अनिल की यह शानदार कामयाबी ग्रामीण अंचल के उन सैकड़ों युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत है जो सीमित संसाधनों के बीच बड़े सपनों को सच करना चाहते हैं। उनके इस चयन पर उनके परिवार, मित्रों और ब्राह्मणगांव के ग्रामीणों ने मिठाई बांटकर और आतिशबाजी कर खुशी जताई है ।
“अनिल की सफलता के मायने: मजबूत इरादों के आगे बौने साबित हुए”
संसाधन राजगढ़ के एक छोटे से गांव ब्राह्मणगांव के अनिल कुमार दांगी की सफलता केवल एक व्यक्ति की नौकरी का जरिया या व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं है। यह मध्य प्रदेश के ग्रामीण अंचल में छिपी असीम प्रतिभा और बदलते भारत की एक जीवंत तस्वीर है । अक्सर यह माना जाता है कि बड़ी और प्रतिष्ठित परीक्षाओं में सफलता पाने के लिए बड़े शहरों के महंगे कोचिंग संस्थान या विशिष्ट पृष्ठभूमि जरूरी है। लेकिन अनिल ने प्रादेशिक स्तर पर दूसरा स्थान हासिल कर इस धारणा को पूरी तरह बदल दिया है।उनकी यात्रा से दो बड़ी बातें देश के युवाओं को सीखनी चाहिए। पहली— विषय बदलने का साहस। गणित (विज्ञान) जैसे कठिन विषय से स्नातक करने के बाद, अचानक कला क्षेत्र के भूगोल विषय को चुनना और उसमें पूरे प्रदेश में टॉप कर जाना यह साबित करता है कि रुचि और एकाग्रता हो तो कोई भी राह कठिन नहीं है। दूसरी— निरंतरता की शक्ति। एक तरफ जहां युवा एक परीक्षा में असफल होकर निराश हो जाते हैं, वहीं अनिल ने SET, NET-JRF और लगातार तीन बार MPPSC मुख्य परीक्षा निकालकर यह दिखाया कि सफलता एक दिन में नहीं, बल्कि रोज की जाने वाली कड़ी मेहनत से मिलती है।ग्रामीण पृष्ठभूमि से निकलकर सहायक प्राध्यापक (असिस्टेंट प्रोफेसर) बनने तक का यह सफर उन सभी युवाओं के लिए एक नई ऊर्जा और प्रेरणा का संचार करेगा जो सीमित संसाधनों के बीच अपनी आंखों में बड़े सपने संजोए हुए हैं। अनिल कुमार दांगी को इस ऐतिहासिक गौरव के लिए बधाई और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना ।










