- फार्मासिस्ट के सहारे मरीज, सत्ताधारियों की उदासीनता नियम ताक पर रख महिला डॉक्टर ने कराया उज्जैन अटैचमेंट, विधायक के खोखले आश्वासनों के बीच ब्लॉक चिकित्सा अधिकारी का गैर-जिम्मेदाराना बयान ‘कल 10 बजे तक नहीं रहेंगे डॉक्टर, क्या करें !’
घनश्याम शर्मा माचलपुर
राजगढ़ / माचलपुर :- प्रदेश और जिले में विकास के बड़े-बड़े दावों के बीच माचलपुर का प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र खुद गंभीर रूप से बीमार हो चुका है । सत्ताधारी दल के जनप्रतिनिधियों की घोर उदासीनता और प्रशासनिक मिलीभगत के कारण यह अस्पताल आज पूरी तरह से भगवान भरोसे है । हद तो तब हो गई जब गुरुवार को ओपीडी समय के दौरान अस्पताल में एक भी डॉक्टर मौजूद नहीं था और पूरी स्वास्थ्य व्यवस्था महज एक फार्मासिस्ट के कंधों पर टिकी रही । रसूख और नियमों को ताक पर रखकर डॉक्टरों के मनमाने अटैचमेंट और ब्लॉक चिकित्सा अधिकारी (BMO) के गैर-जिम्मेदाराना बयानों ने यह साफ कर दिया है कि इलाके के गरीब मरीजों की जान के साथ सरेआम खिलवाड़ किया जा रहा है। कलेक्टर की सख्त हिदायतों को ठेंगा दिखाते हुए स्वास्थ्य विभाग में लापरवाही का यह आलम तब है, जब क्षेत्र के विधायक से लेकर तमाम रसूखदार नेता इस बदहाली पर मूकदर्शक बने बैठे हैं।
“घंटों परेशान होते रहे मरीज, पूछने वाला कोई नहीं”
अजीब हालत है गुरुवार को अस्पताल की लापरवाही की पराकाष्ठा देखने को मिली, दूर-दराज के ग्रामीण क्षेत्रों से आए मरीज इलाज के अभाव में तड़पते नजर आए । अस्पताल परिसर में बैठे मरीज के परिजन राजेश राय पिछले 30 मिनट से डॉक्टर का इंतजार कर रहे थे जब अन्य स्टॉप से पूछा तो पता चला डॉ नहीं आयेंगे । वहीं रतनलाल खेड़ी, सार्थक, मनोज, रामलाल, भेरूसिंह,आशीष व मधु जैसे दर्जनों मरीज और उनके परिजन ओपीडी में डॉ की खाली पड़ी कुर्सी पर टकटकी गाए देखते रहे । पूरा स्वास्थ्य केंद्र महज एक फार्मासिस्ट के भरोसे चल रहा था और मरीजों को सांत्वना देने वाला भी कोई जिम्मेदार अधिकारी वहां मौजूद नहीं था,घंटों इंतजार करने के बाद इन मरीजों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा ।
“हर रोज नया डॉक्टर, इलाज का बदला तरीका”
प्रशासन ने यहाँ वैकल्पिक उपचार व्यवस्था के नाम पर ग्रामीण क्षेत्रों से बंध पत्र (बॉन्ड) के चिकित्सकों की ड्यूटी क्रमबद्ध तरीके से लगाई है । इस ‘उधार की व्यवस्था’ के कारण अस्पताल आने वाले मरीजों को हर रोज एक नए डॉक्टर का सामना करना पड़ता है । हर नया चिकित्सक अपने तरीके से बीमारी का इलाज और दवाइयां लिखता है, जिससे मरीजों की सेहत के साथ खिलवाड़ हो रहा है । इतना ही नहीं, इस रोटेशन व्यवस्था के कारण ग्रामीण क्षेत्रों के मूल स्वास्थ्य केंद्रों की व्यवस्थाएं भी पूरी तरह से चरमरा गई हैं क्योंकि उन ग्रामीण क्षेत्र के डॉ को माचलपुर भेज देते है ।
“अटैचमेंट का खेल,काम उज्जैन संभाग में,सैलरी माचलपुर”
स्वास्थ्य केंद्र की इस दुर्दशा के पीछे प्रशासनिक साठगांठ व स्वास्थ्य विभाग का एक बड़ा खेल सामने आया है । यहाँ दो डॉ पदस्थ थे एक का ट्रांसफर हो गया था वही दूसरी महिला चिकित्सक डॉ. पायल पाटीदार ने अपने रसूख और संबंधों के दम पर सभी नियम-कायदों को ताक पर रख दिया । उन्होंने स्थानीय जनप्रतिनिधियों को बौना साबित करते हुए अपना अटैचमेंट भोपाल संभाग से उज्जैन संभाग के नलखेड़ा में करवा लिया । ताज्जुब की बात यह है कि इस अटैचमेंट को लंबा समय बीत जाने के बाद भी उनका वेतन आज भी माचलपुर स्वास्थ्य केंद्र के नाम से ही आहरित (निकाला) हो रहा है । स्थानीय विधायक हजारीलाल दांगी ने इस व्यवस्था को सुधारने के लिए क्षेत्र की जनता को कई बार आश्वासन दिया, लेकिन जमीनी स्तर पर आज तक कोई सुधार नहीं हुआ ।
“बीएमओ का गैर-जिम्मेदाराना बयान”
जब गुरुवार की पूरी अव्यवस्था और ओपीडी समय में डॉक्टरों के नहीं रहने के संबंध में जीरापुर ब्लॉक चिकित्सा अधिकारी (बीएमओ) सुनील चौरसिया से फोन पर पूछा गया, तो उन्होंने एक बेहद गैर-जिम्मेदाराना और बेतुका बयान दे डाला । बीएमओ चौरसिया ने दो टूक शब्दों में कहा— “आज क्या, डॉक्टर तो कल सुबह दस बजे तक नहीं रहेंगे क्या करें, डॉक्टर ही नहीं है हमारे पास ।” एक जिम्मेदार प्रशासनिक चिकित्सा अधिकारी का ऐसा जवाब क्षेत्र की लचर स्वास्थ्य प्रणाली और आम जनता के प्रति उनकी संवेदनहीनता को साफ दर्शाता है ।










