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मध्य प्रदेश राज्यसभा चुनाव: मीनाक्षी नटराजन का पर्चा खारिज, भोपाल से दिल्ली तक रात भर हाई-प्रोफाइल ‘पॉलिटिकल ड्रामा’ !

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  • आधी रात को दिल्ली में निर्वाचन सदन के बाहर धरने पर बैठे शीर्ष कांग्रेसी नेता; बीजेपी के तीनों प्रत्याशियों की निर्विरोध जीत तय, कांग्रेस को लगा तगड़ा झटका ।

     

    घनश्याम शर्मा माचलपुर

  • राजगढ़/भोपाल :- (10 जून 2026) :- मध्य प्रदेश से राज्यसभा चुनाव के दौरान मंगलवार को एक ऐसा अप्रत्याशित घटनाक्रम सामने आया, जिसने देश की सियासत में भूचाल ला दिया। कांग्रेस की इकलौती उम्मीदवार और पूर्व सांसद मीनाक्षी नटराजन का नामांकन पत्र स्क्रूटनी (जांच) के दौरान रिटर्निंग ऑफिसर द्वारा निरस्त कर दिया गया। इस फैसले के बाद भोपाल विधानसभा से लेकर नई दिल्ली में भारत निर्वाचन आयोग के मुख्यालय तक रात भर जबरदस्त ड्रामा और तीखी नारेबाजी चलती रही। इस फैसले के साथ ही अब मध्य प्रदेश की तीनों राज्यसभा सीटों पर भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवारों की निर्विरोध जीत तय हो गई है ।

    “विवाद की वजह: तेलंगाना का एक कोर्ट केस”

    यह पूरा विवाद भाजपा उम्मीदवार महेश केवट और प्रदेश महासचिव राहुल कोठारी की ओर से दायर एक आपत्ति के बाद शुरू हुआ। बीजेपी ने आरोप लगाया कि मीनाक्षी नटराजन ने अपने चुनावी हलफनामे में तेलंगाना (हैदराबाद) की एक अदालत में लंबित आपराधिक मामले की जानकारी जानबूझकर छिपाई है । रिटर्निंग ऑफिसर ने इस आपत्ति को सही मानते हुए लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 के तहत नटराजन का नामांकन खारिज कर दिया ।

    “भोपाल का घटनाक्रम: विधायकों की बाड़ेबंदी धरी की धरी रही”

    “चार्टर प्लेन की तैयारी” मंगलवार दोपहर तक कांग्रेस अपने विधायकों को टूट से बचाने के लिए एकजुट कर रही थी और उन्हें चार्टर प्लेन से बेंगलुरु भेजने की तैयारी थी ।
    “अचानक बदला माहौल” शाम करीब 6:30 बजे जैसे ही नामांकन रद्द होने की खबर आई, पूरी कांग्रेस खेमे में सन्नाटा पसर गया ।
    “दफ्तर के बाहर प्रदर्शन” नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार और प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी के नेतृत्व में विधायकों और कार्यकर्ताओं ने भोपाल में निर्वाचन कार्यालय के बाहर डेरा डाल दिया और रघुपति राघव राजा राम का कीर्तन कर विरोध जताया ।

    “दिल्ली शिफ्ट हुआ सियासी ड्रामा: निर्वाचन सदन के बाहर धरना”
    भोपाल में पर्चा खारिज होने के तत्काल बाद कांग्रेस आलाकमान सक्रिय हो गया। दिल्ली में रात 8 बजे के बाद सियासी पारा चरम पर पहुंच गया ।

    “गेट पर रोका” कांग्रेस संगठन महासचिव के.सी. वेणुगोपाल, जयराम रमेश, भूपेश बघेल और सचिन पायलट समेत कई दिग्गज नेता तुरंत शिकायत दर्ज कराने चुनाव आयोग के दफ्तर (निर्वाचन सदन) पहुंचे। अधिकारियों के न होने की बात कहकर उन्हें बाहर ही रोक दिया गया ।
    “सड़क पर बैठे दिग्गज” नाराज कांग्रेसी नेताओं ने दिल्ली पुलिस की पाबंदियों के बीच निर्वाचन सदन के मुख्य द्वार के बाहर ही सड़क पर बैठकर धरना शुरू कर दिया! “ज्ञापन सौंपने की अनुमति” भारी हंगामे और पुलिस के साथ नोकझोंक के बाद आखिरकार के.सी. वेणुगोपाल और भूपेश बघेल को अंदर जाकर ज्ञापन सौंपने की अनुमति मिली ।
    चुनाव आयोग ने कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल को बुधवार दोपहर 12 बजे विस्तृत सुनवाई के लिए समय दिया है ।

    “वार-पलटवार: किसने क्या कहा ?”
    यह लोकतंत्र की खुली हत्या है । हमारी प्रत्याशी के खिलाफ कोई एफआईआर नहीं थी, सिर्फ एक साधारण नोटिस था, जिसे छिपाने का आरोप पूरी तरह निराधार है। बीजेपी ने हॉर्स-ट्रेडिंग में फेल होने के बाद साजिश के तहत यह पर्चा खारिज करवाया है।”— के.सी. वेणुगोपाल, संगठन महासचिव, कांग्रेस !
    “सर्वोच्च न्यायालय और चुनाव आयोग के नियमों के मुताबिक आपराधिक मामलों को छिपाना अक्षम्य है। कांग्रेस ने जानबूझकर तथ्यों को छुपाया, जिसका जवाब उन्हें कानून और व्यवस्था ने दिया है। सत्य की जीत हुई है।”— जीतू जिराती, वरिष्ठ नेता, भाजपा ।

    “राजनीतिक विश्लेषण: कांग्रेस को बड़ा नुकसान”

    मीनाक्षी नटराजन को राहुल गांधी का बेहद करीबी और साफ-सुथरी छवि का नेता माना जाता है । दिग्विजय सिंह का कार्यकाल समाप्त होने के बाद कांग्रेस इस इकलौती सीट को हर हाल में बचाना चाहती थी । लेकिन इस तकनीकी और कानूनी चूक ने बिना चुनाव हुए ही भाजपा के तीनों उम्मीदवारों—तरुण चुघ, महेश केवट और रजनीश अग्रवाल का संसद के उच्च सदन में पहुंचने का रास्ता साफ कर दिया है । कांग्रेस अब इस फैसले के खिलाफ कानूनी लड़ाई और अदालत का रुख करने की तैयारी कर रही है ।

Khushi Samvad
Author: Khushi Samvad

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