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वेंटिलेटर पर माचलपुर अस्पताल,आजादी के 8 दशक बाद भी सिर्फ ‘पट्टी’ का सहारा, जनप्रतिनिधियों की बेरुखी पर कब टूटेगा जनता का मौन ?

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माचलपुर में स्वास्थ्य व्यवस्था बदहाल,समाज की अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति तक पहुंचने के सत्तापक्ष के दावों की उड़ रही धज्जियां,सिस्टम को लाचारी पर जनता खामोश !

घनश्याम शर्मा माचलपुर

राजगढ़ / माचलपुर :- देश भले ही आजादी का अमृत महोत्सव मना रहा हो और सरकारें चमचमाती स्वास्थ्य सुविधाओं के दावे ठोक रही हों, जनता , जनप्रतिनिधियों की चुप्पी पर उठ रहे सवाल स्थिति वाकई गंभीर और चिंताजनक है । जब सुविधाओं के लिए किसी क्षेत्र य नगर के नागरिकों को संघर्ष करना पड़े तो यह सीधे तौर पर आम जनमानस के अधिकारों का हनन है । माचलपुर के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र की बदहाली शासन के तमाम दावों की धज्जियां उड़ा रही है,आलम यह है कि सरकार गरीबों को मुफ्त इलाज का भरोसा देने वाला आयुष्मान कार्ड यहां सिर्फ एक प्लास्टिक का टुकड़ा बनकर रह गया है ! क्योंकि अस्पताल खुद वेंटिलेटर पर आखिरी सांसें गिन रहा है तो क्या लोगो का इलाज करेगा ।

*राजनेताओं के बड़े कद फिर भी नगर में स्थाई डॉक्टर नहीं*
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इस जिले की राजनीतिक ताकत का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि जिले के स्वतंत्र प्रभार के दो-दो मंत्री, सांसद,तीन विधायक और खुद भाजपा के जिलाध्यक्ष माचलपुर क्षेत्र से आते हैं, इन सभी की सीधी पहुंच प्रदेश के मुखिया तक है । विडंबना देखिए कि बड़े रसूख वाले ये नेता अपने गृह विधानसभा क्षेत्रों में तो डायलिसिस जैसी आधुनिक मशीनें और वीआईपी स्वास्थ्य सुविधाएं दिलवा रहे हैं, लेकिन माचलपुर नगर को एक स्थाई डॉक्टर तक नसीब नहीं करा पा रहे हैं उल्टा यह पदस्थ डॉ अपने दम पर इन रसूखदारों नेताओं को ठेंगा दिखा कर अन्य संभाग में अटेचमेंट करवा लेती ये मुंह देखते रहे,फिर बात करते है समाज के अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति को सुविधा देने की ! कलेक्टर साहब हर दिन फाइलों पर स्वास्थ्य सुविधाएं बेहतर करने का दावा करते हैं, लेकिन जब माचलपुर स्वास्थ्य केंद्र का निरीक्षण बंद कमरे में करते है लेकिन साहब से मिल कर अपनी समस्याओं को सुनाने खड़े लोगों को बिना सुने चले जाते साहब से क्या अपेक्षा जनता करे ? आज शासन प्रशासन के वे सभी बेहतर स्वास्थ्य सुविधा के दावे माचलपुर की जमीन पर दम तोड़ दिखाई दे रहे हैं !

“*नगर में अव्यवस्था के खिलाफ आवाज उठाना भी अब गुनाह सा हो गया है”*!
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स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली को लेकर कांग्रेस धरना-प्रदर्शन करे, तो सत्ता पक्ष के लोग उन्हें ‘राजनैतिक नौटंकी’ कहकर खारिज कर देता है ।
अगर चौथा स्तंभ यानी पत्रकार अगर जनता की बुनियादी समस्याओं को पूरी ईमानदारी से उठाएं, तो उन पर ‘पैसा न मिलने के कारण खबर चलाने’ का घटिया आरोप मढ़ दिया जाता है ।

“*विरोध करने पर चमचागिरी’ हावी,आंदोलन को कुचलने की साजिश*”
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अगर आम जनता अपने हक के लिए खड़ी होने की कोशिश करती है, तो नेताओं के इर्द-गिर्द घूमने वाले चाटूकार और दलाल सक्रिय हो जाते हैं आंदोलन की बैठकों में बैठकर ये लोग व्यवस्था सुधारने वाले हर आंदोलन की रूपरेखा को अंदर ही अंदर बिगाड़ देते हैं ।

“*आजादी के 8 दशक बाद भी सिर्फ स्वास्थ्य केंद्र में मल्लम’पट्टी’ का सहारा* “!
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जनता इस बात से सबसे ज्यादा आहत है कि आखिर कब तक स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी का यह तंज झेलेगी ? आजादी के आठ दशक बीत जाने के बाद भी क्या सरकार ने इस अस्पताल को सिर्फ मरीजों को प्राथमिक पट्टी बांधने और रेफरल सेंटर बनाने के लिए खोल रखा है ? जनप्रतिनिधियों की यह बेरुखी और जनता की मजबूरी पर तरस न खाना, क्षेत्र की पूरी राजनीति और प्रशासनिक दावों को धिक्कार रहा है इतना अन्याय होने के बावजूद जनता का मौन साधे रहना समझ से परे है

Khushi Samvad
Author: Khushi Samvad

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