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आधुनिकता की चकाचौंध में प्रकृति से दूर होता इंसान, पर्यावरण संरक्षण आज की महती आवश्यकता: बीके सीमा दीदी ।

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प्रकृति से खिलवाड़ का नतीजा भुगत रही मानव सभ्यता, जागरूक होना जरूरी ।

घनश्याम शर्मा

राजगढ़ /माचलपुर :- प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय के स्थानीय माचलपुर केंद्र पर शुक्रवार को विश्व पर्यावरण दिवस का आयोजन गरिमामय ढंग से किया गया । इस अवसर पर उपस्थित भाई-बहनों और प्रबुद्ध जनों ने पर्यावरण संरक्षण और अधिक से अधिक पौधे लगाने का संकल्प लिया ।

“1972 में नैरोबी से हुई थी शुरुआत”

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्य वक्ता ब्रह्माकुमारी सीमा दीदी ने सभी को पर्यावरण दिवस की शुभकामनाएं दीं । उन्होंने इसके इतिहास पर प्रकाश डालते हुए बताया कि विश्व पर्यावरण दिवस मनाने की शुरुआत वर्ष 1972 में केन्या के नैरोबी शहर से हुई थी । तब से लेकर आज तक हर वर्ष 5 जून को पूरी दुनिया में पर्यावरण दिवस लोगों को प्रकृति के प्रति जागरूक करने के लिए मनाया जाता है ।

“विकास की अंधी दौड़ में प्रकृति से दूर हुआ मानव”

राजयोगिनी सीमा दीदी ने वर्तमान हालातों पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि आज इंसान जितना अधिक आधुनिकता और भौतिक सुख-साधनों की ओर भाग रहा है, उतना ही वह प्रकृति से दूर होता जा रहा है । मनुष्य अपने स्वार्थ के लिए लगातार प्रकृति के साथ खिलवाड़ कर रहा है । पेड़ों की अंधाधुंध कटाई और बढ़ते प्रदूषण के कारण आज ग्लोबल वार्मिंग जैसी गंभीर समस्याएं हमारे सामने खड़ी हैं । यदि हम अब भी सचेत नहीं हुए और प्रकृति के प्रति अपने कर्तव्यों को नहीं समझा, तो आने वाली पीढ़ियों को इसके और भी भयानक परिणाम भुगतने होंगे । हमे प्रकृति से जुड़ना चाहिए़,वैसे हमारा शरीर पांच तत्वों से मिलकर बना है किसी भी एक तत्व की कमी से हमारा शरीर बीमार व रोगी हो जाता है ! उन्होंने कहा कि संसार को चलाने के लिए तीन चीजें अनिवार्य है पहली है प्रकृति दूसरी है पुरुष अर्थात आत्मा और तीसरा है परमात्मा जिसको प्रकृति पति भी कहते है !

“ये रहे मुख्य अतिथि”

इस प्रेरक कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में श्रीराम मानस समिति, पिपल्या कुल्मी के अध्यक्ष गोवर्धन पाटीदार एवं गंगाराम पाटीदार विशेष रूप से उपस्थित रहे। अतिथियों ने भी अपने विचार रखते हुए कहा कि हमारी संस्कृति में प्रकृति को भगवान का रूप माना गया है, इसलिए इसका संरक्षण करना हम सब का परम कर्तव्य है।कार्यक्रम में केंद्र पर नियमित रूप से आध्यात्मिक ज्ञान और राजयोग का अभ्यास करने वाली बड़ी संख्या में माताएं, बहनें और गणमान्य नागरिक उपस्थित थे । कार्यक्रम के अंत में सभी ने पर्यावरण को शुद्ध रखने और कम से कम एक पौधा लगाकर उसकी देखभाल करने की प्रतिज्ञा ली ।

Khushi Samvad
Author: Khushi Samvad

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