जिलाध्यक्ष ज्ञानसिंह गुर्जर ने कहा- ‘छवि खराब कर रही लगातार आ रही शिकायतें’,3 दिन में संतोषजनक जवाब न मिलने पर एकतरफा निष्कासन की चेतावनी ।
घनश्याम शर्मा माचलपुर
राजगढ़ / माचलपुर :- ग्राम पंचायत इकलेरा के सरपंच और भारतीय जनता पार्टी के जिला उपाध्यक्ष श्रवण पाटीदार की दबंगई और विवादित आचरण पर आखिरकार पार्टी संगठन ने कड़ा रुख अख्तियार कर लिया है । अपनी ही पार्टी के कार्यकर्ता और स्थानीय व्यवसाई नीरज शर्मा को फोन पर भद्दी गालियां देने और जान से मारने की धमकी का ऑडियो वायरल होने के बाद, भाजपा संगठन ने इसे अनुशासनहीनता के दायरे में लिया है । राजगढ़ भाजपा जिलाध्यक्ष ज्ञानसिंह गुर्जर ने जिला उपाध्यक्ष श्रवण पाटीदार को एक आधिकारिक कारण बताओ नोटिस जारी कर तीन दिन के भीतर जवाब तलब किया है ।
“संगठन की छवि खराब करने का आरोप”
भाजपा जिलाध्यक्ष ज्ञानसिंह गुर्जर द्वारा जारी किए गए नोटिस में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया है कि श्रवण पाटीदार की लगातार सामने आ रही मनमानियों और विवादों से संगठन की साख को गहरा धक्का लगा है। नोटिस में कहा गया है कि पहले भी एक पत्रकार के साथ मारपीट और अभद्रता का मामला सामने आया था, जिससे पार्टी की छवि धूमिल हुई थी। अब दोबारा एक नया गाली-गलौज का ऑडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिसे पार्टी ने बेहद गंभीरता से लिया है। संगठन ने सख्त लहजे में चेतावनी दी है कि यदि तीन दिन के भीतर इस संबंध में कोई संतोषजनक जवाब प्रस्तुत नहीं किया गया, तो पार्टी उनके खिलाफ एकतरफा अनुशासनात्मक कार्रवाई करने के लिए बाध्य होगी ।
“क्या है पूरा मामला”?
यह पूरा विवाद 16 अक्टूबर को तलेन में आयोजित ‘जनसंवाद कार्यक्रम’ से शुरू हुआ था। वहां इकलेरा के ही निवासी नीरज शर्मा (47) ने गांव की नल-जल योजना की अव्यवस्था और पानी न आने की शिकायत प्रशासनिक अधिकारियों से की थी। इस शिकायत से बौखलाए सरपंच व भाजपा जिला उपाध्यक्ष श्रवण पाटीदार ने 22 अक्टूबर को नीरज को फोन लगाकर सारी हदें पार कर दीं। उन्होंने नीरज को सरेआम गंभीर परिणाम भुगतने और जान से मारने की धमकी दी, जिसका ऑडियो वायरल होने के बाद तलेन थाना पुलिस ने आरोपी नेता के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है।
“पत्रकारों से मारपीट का पुराना रिकॉर्ड”
गौरतलब है कि फरवरी माह में भी श्रवण पाटीदार का एक वीडियो वायरल हुआ था, जिसमें उन्होंने खबर कवरेज करने गए तीन स्थानीय पत्रकारों के साथ सरेआम मारपीट और बदसलूकी की थी। उस समय भी पत्रकारों के भारी विरोध के बाद मामला पुलिस तक पहुंचा था। लगातार हो रही इन घटनाओं के बाद अब विपक्षी दलों के साथ-साथ आम जनता भी सत्ताधारी दल के पदाधिकारियों के इस रवैये पर सवाल उठा रही थी, जिसके दबाव में अब भाजपा संगठन को अपने ही पदाधिकारी के खिलाफ यह बड़ी कार्रवाई करनी पड़ी है ।










