औपचारिक शिक्षा से वंचित रहे 15 वर्ष से अधिक आयु के नागरिकों ने दिखाई पढ़ने-लिखने की ललक ।
घनश्याम शर्मा माचलपुर
माचलपुर :– केन्द्र सरकार के महत्वाकांक्षी ‘उल्लास – नव भारत साक्षरता कार्यक्रम’ (ULLAS) के तहत स्थानीय शासकीय प्राथमिक विद्यालय क्रमांक 2 में असाक्षर शिक्षार्थियों के लिए बुनियादी साक्षरता और संख्यात्मकता मूल्यांकन परीक्षा का गरिमापूर्ण आयोजन किया गया। इस विशेष परीक्षा में वार्ड 13, 14 और 15 के उन वयस्क महिला व पुरुष शिक्षार्थियों ने पूरे उत्साह के साथ भाग लिया, जिन्होंने इस अभियान के माध्यम से पढ़ना-लिखना सीखा है ।
मूल्यांकन परीक्षा के दौरान परीक्षा कक्ष में एक बेहद सकारात्मक और अनूठा दृश्य देखने को मिला । यहाँ विभिन्न आयु वर्ग के नव-साक्षर बुजुर्गों और वयस्कों ने ज़मीन पर बैठकर पूरे मनोयोग से अपनी परीक्षा दी । परीक्षा को पूरी पारदर्शिता और सुचारू रूप से संपन्न कराने के लिए स्कूल के शिक्षकों और साक्षरता वालंटियर्स द्वारा कड़ी निगरानी की गई ।
“अतिथियों ने बढ़ाया हौसला, शिक्षण किट का हुआ वितरण”
परीक्षा के बाद विद्यालय प्रबंधन और स्थानीय जनप्रतिनिधियों की उपस्थिति में एक विशेष सत्र का आयोजन किया गया । इस अवसर पर राजगढ़ के जिला प्रौढ़ शिक्षा अधिकारी के.एन. गुप्ता, ब्लॉक साक्षरता समन्वयक सुरेश दांगी,संकुल समन्वयक बनवारी शर्मा, शाला प्रधानाध्यापक अब्दुल करीम खान और वरिष्ठ शिक्षक ओमप्रकाश उपाध्याय विशेष रूप से उपस्थित रहे । अतिथियों ने उपस्थित नव साक्षरों और बच्चों को प्रोत्साहित करते हुए स्कूल बैग, पुस्तकें और आवश्यक शिक्षण किट वितरित कीं ।
“प्रेरकों और वालंटियर्स का हुआ सम्मान”
कार्यक्रम के अंतिम चरण में साक्षरता अभियान को सफल बनाने वाले प्रेरकों,वालंटियर्स और उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले शिक्षार्थियों को प्रशस्ति पत्र और माला पहनाकर सम्मानित किया गया । कार्यक्रम का सफल संचालन राज्यपाल पुरस्कार प्राप्त शिक्षक सुरेश चंद्र सोनी ने किया। इस सफल आयोजन पर शिक्षा विभाग के आला अधिकारियों और ग्रामीणों ने हर्ष व्यक्त करते हुए इसे क्षेत्र में शत-प्रतिशत साक्षरता की ओर एक बड़ा कदम बताया है ।
“इस अभियान का मुख्य उद्देश्य 15 वर्ष से अधिक आयु के उन सभी नागरिकों को मुख्यधारा से जोड़ना है जो औपचारिक शिक्षा से वंचित रह गए थे। इस परीक्षा के माध्यम से अब ये नागरिक न केवल अपना नाम और हस्ताक्षर कर सकेंगे, बल्कि दैनिक जीवन में बुनियादी अंकों का हिसाब-किताब रखने में भी सक्षम होंगे।”
— अब्दुल करीम खान, प्रधानाध्यापक










