
माचलपुर के श्री काशी गुरुकुल अकादमी द्वारा बैग वितरण पर उठते सवाल, क्या पढ़ाई के दम पर नहीं,उपहारों के सहारे मिलेंगे छात्र ?
घनश्याम शर्मा माचलपुर
राजगढ़ / माचलपुर :- जैसे ही जून का महीना आता है, स्कूलों में नए सत्र के दाखिलों (एडमिशन) की होड़ मच जाती है । स्कूल स्टॉप संचालक गली गली गांव गांव।अभिभावकों से संपर्क करते दिखाई देते है । इस रेस में खुद को आगे दिखाने के लिए स्कूल संचालक तरह-तरह के जतन,वादे करते हैं लेकिन वर्तमान में माचलपुर नगर के श्री काशी गुरुकुल अकादमी द्वारा अनूठा कार्य किया जा रहा है जिसमें अभिभावकों को अचानक बांटे जा रहे थैले कौतूहल और चर्चा का विषय बन गए हैं । इस कदम के बाद नगर के जागरूक नागरिकों और अभिभावकों के बीच यह यक्ष प्रश्न तैरने लगा है कि क्या यह शिक्षा का नि:स्वार्थ प्रचार है या फिर एडमिशन खींचने का कोई सीधा प्रलोभन ?
“शिक्षा पर संकट या ब्रांडिंग का नया खेल” ?
आमतौर पर किसी भी स्कूल की पहचान उसकी गुणवत्ता पूर्ण शिक्षा,योग्य शिक्षक और अनुशासित माहौल से होती है । जब स्कूल खुद अपनी शिक्षा और परिणामों पर भरोसा रखते हैं,तो छात्र खुद-ब-खुद खिंचे चले आते हैं,परंतु,ऐन एडमिशन के वक्त श्री काशी गुरुकुल अकादमी द्वारा जाकर अभिभावकों को बुलाकर थैले वितरित करना नगर में चर्चा का केंद्र बन गया है । प्रबुद्ध जनों का कहना है कि यदि स्कूल को अपनी शिक्षा पद्धति पर पूरा भरोसा है,तो फिर इस तरह के भौतिक उपहारों को बांटकर ध्यान भटकाने व फिजूल खर्चे की आवश्यकता क्यों आन पड़ी ?
“अभिभावकों में बंटी राय’ प्रलोभन या सिर्फ जनसंपर्क”?
इस थैला वितरण कार्यक्रम को लेकर नगर में आम चर्चा बनी हुई है,कुछ अभिभावकों का साफ कहना है कि “यह सीधे तौर पर एक प्रलोभन है ताकि लोग प्रभावित होकर अपने बच्चों का दाखिला इसी स्कूल में करवा दें ।” वहीं, कुछ लोग इसे स्कूलों की आपसी कमर्शियल रेस (व्यावसायिक प्रतिस्पर्धा) का हिस्सा मान रहे हैं । सवाल यह भी उठ रहा है कि क्या अब शिक्षा के मंदिर में प्रवेश सिर्फ पढ़ाई के स्तर को देखकर नहीं, बल्कि सत्र की शुरुआत में मिलने वाले फ्री गिफ्ट्स को देखकर तय होगा ?
“विज्ञापन की चमक में कहीं फीकी न पड़ जाए कलम की ताकत”
जानकारों का मानना है कि आधुनिक दौर में स्कूलों का कॉर्पोरेट की तरह व्यवहार करना और खुद को चमकाने के लिए मार्केटिंग का सहारा लेना आम हो चुका है चाहे स्कूल परिणाम कुछ भी हो । लेकिन जब यह प्रचार सीधे तौर पर उपहारों के लेन-देन में बदल जाता है,तो संस्था की नीयत पर उंगलियां उठना लाजिमी है । नगरवासी अब यह देखने को उत्सुक हैं कि क्या यह ‘थैला पॉलिटिक्स’ श्री काशी गुरुकुल अकादमी के एडमिशन ग्राफ को बढ़ा पाती है, या फिर अभिभावक उपहारों को दरकिनार कर केवल बेहतर भविष्य और वास्तविक शिक्षा को ही प्राथमिकता देंगे ।










