Edition

मीनाक्षी नटराजन का नामांकन निरस्त, एमपी की सियासत में भारी बवाल,रनवे से लौटा कांग्रेस विधायकों का विमान ।

👇समाचार सुनने के लिए यहां क्लिक करें

घनश्याम शर्मा माचलपुर

राजगढ़ /भोपाल :- मध्य प्रदेश राज्यसभा चुनाव 2026 के नामांकन स्क्रूटनी के दौरान एक अभूतपूर्व राजनीतिक घटनाक्रम सामने आया है। कांग्रेस प्रत्याशी और पूर्व सांसद मीनाक्षी नटराजन का नामांकन पत्र रिटर्निंग ऑफिसर द्वारा निरस्त कर दिया गया है। इस फैसले के बाद प्रदेश की राजनीति में हड़कंप मच गया है और कांग्रेस-भाजपा के बीच तीखी जुबानी जंग शुरू हो गई है ।

“हलफनामे में जानकारी छिपाने का आरोप, भाजपा की शिकायत पर कार्रवाई”

भाजपा के प्रदेश महासचिव राहुल कोठारी ने मीनाक्षी नटराजन के नामांकन पर लिखित आपत्ति दर्ज कराई थी। आपत्ति में दावा किया गया कि नटराजन ने अपने चुनावी हलफनामे में तेलंगाना की एक अदालत में लंबित आपराधिक मामले की जानकारी छुपाई है । रिटर्निंग ऑफिसर ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद नियमों के उल्लंघन के आधार पर नामांकन को अमान्य घोषित कर दिया ।

“नामांकन रद्द होते ही भोपाल एयरपोर्ट के रनवे से लौटा विधायकों का विमान”

नामांकन निरस्त होने की खबर मिलते ही भोपाल के राजा भोज एयरपोर्ट पर हाई-वोल्टेज ड्रामा देखने को मिला। कांग्रेस को चुनाव में क्रॉस-वोटिंग का डर था, जिसके चलते पार्टी के विधायकों को चार्टर्ड प्लेन से बेंगलुरु के एक रिसॉर्ट में शिफ्ट किया जा रहा था। विधायक विमान में बैठ चुके थे, लेकिन जैसे ही नटराजन का फॉर्म रिजेक्ट होने की खबर आई, विमान को रनवे से वापस बुला लिया गया और विधायकों को उतारकर होटल भेजा गया ।

“कांग्रेस कोर्ट जाने की तैयारी में, भाजपा का ‘फिक्सिंग’ का आरोप”

कांग्रेस का रुख,राज्यसभा सांसद विवेक तन्खा ने भाजपा पर सरकारी मशीनरी के दुरुपयोग का आरोप लगाया है । उन्होंने कहा कि नटराजन पर कोई केस दर्ज नहीं था, केवल एक नोटिस था। कांग्रेस इस फैसले के खिलाफ तुरंत हाई कोर्ट या सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाएगी ।
भाजपा का पलटवार: लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह ने कहा कि कांग्रेस को अपनी हार और विधायकों की बगावत का पूरा भरोसा था। भाजपा नेताओं का आरोप है कि कांग्रेस ने जानबूझकर ऐसा कमजोर फॉर्म भरा ताकि नामांकन रद्द हो जाए और उन्हें चुनाव न लड़ना पड़े ।

“पार्टी के अंदर आंतरिक कलह और इस्तीफे का दौर”

मीनाक्षी नटराजन को टिकट मिलने के बाद से ही कांग्रेस में आंतरिक असंतोष चरम पर था। हुजूर विधानसभा से कांग्रेस के पूर्व प्रत्याशी रहे नरेश ज्ञानचंदानी ने नटराजन की उम्मीदवारी के विरोध में पार्टी के सभी पदों से इस्तीफा दे दिया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस घटनाक्रम से कांग्रेस बैकफुट पर आ गई है ।

🎤 विवेक तन्खा, राज्यसभा सांसद (कांग्रेस) का आधिकारिक बयान”
मीनाक्षी नटराजन जी का नामांकन निरस्त किया जाना पूरी तरह से राजनीति से प्रेरित और लोकतंत्र की हत्या है । भाजपा ने सरकारी मशीनरी का दुरुपयोग करके एक बेहद ईमानदार और योग्य महिला प्रत्याशी को चुनाव प्रक्रिया से बाहर किया है। मीनाक्षी जी पर तेलंगाना में कोई आपराधिक मामला लंबित नहीं है, उन्हें केवल एक सामान्य नोटिस जारी हुआ था। नोटिस मिलने का मतलब यह बिल्कुल नहीं होता कि व्यक्ति अपराधी है या उस पर कोई केस चल रहा है। भाजपा हमारे विधायकों को डराने और खरीदने में पूरी तरह नाकाम रही, इसलिए उन्होंने पिछले दरवाजे से यह साजिश रची है । रिटर्निंग ऑफिसर का यह फैसला पूरी तरह से एकतरफा है। हम इस तानाशाही और अन्याय के खिलाफ चुप नहीं बैठेंगे। कांग्रेस के कानूनी विशेषज्ञ तैयार हैं और हम इस फैसले को चुनौती देने के लिए तुरंत माननीय हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट जा रहे हैं।”
🎤 राकेश सिंह, लोक निर्माण मंत्री (भाजपा) का आधिकारिक बयान”
संवैधानिक नियम और कानून देश में सभी के लिए बराबर हैं, चाहे वह कोई भी बड़ा नेता या दल हो। हलफनामे (Affidavit) में अपनी अदालती और कानूनी जानकारियों को छिपाना एक गंभीर अपराध है। रिटर्निंग ऑफिसर ने तथ्यों, सबूतों और कानून के दायरे में रहकर ही यह निष्पक्ष कार्रवाई की है। इसमें भाजपा का कोई लेना-देना नहीं है। असलियत तो यह है कि कांग्रेस को अपने ही विधायकों पर रत्ती भर भी भरोसा नहीं था। उन्हें अच्छी तरह पता था कि पार्टी के अंदर भारी बगावत है और उनके विधायक क्रॉस-वोटिंग करने वाले हैं। अपनी तय हार और इज्जत बचाने के लिए कांग्रेस ने खुद ही जानबूझकर एक त्रुटिपूर्ण फॉर्म भरा था ताकि वह निरस्त हो जाए और उन्हें चुनाव से भागने का बहाना मिल जाए। भोपाल एयरपोर्ट के रनवे से कांग्रेस विधायकों के विमान का वापस लौटना यह साफ दिखाता है कि उनके भीतर हार का कितना बड़ा डर और अविश्वास बैठा हुआ था।”

Khushi Samvad
Author: Khushi Samvad

Leave a Comment

और पढ़ें

traffic tail