
घनश्याम शर्मा माचलपुर
सौतेले व्यवहार का दंश झेलता माचलपुर: जनप्रतिनिधियों ने दूसरे गांवों को नवाजा,पर माचलपुर की बेटियां उच्च शिक्षा के लिए दर-दर भटकने को मजबूर !
माचलपुर (राजगढ़)। एक ओर सरकार ‘बेटी पढ़ाओ, बेटी बचाओ’ और ‘पीएम श्री’ जैसी योजनाओं का ढिंढोरा पीटकर शिक्षा के स्तर को सुधारने के बड़े-बड़े दावे कर रही है, वहीं राजगढ़ जिले का प्रमुख कस्बा माचलपुर आज भी उच्च शिक्षा के लिए तरस रहा है। नगर की बेटियों को 10 वीं के बाद आगे पढ़ने के लिए लड़कों के स्कूल में या प्रायवेट स्कूल में मोटी फीस देकर या पढ़ाई छोड़नी पड़ रही है या फिर जान जोखिम में डालकर दूसरे शहरों का रुख करना पड़ रहा है ।
“कागजों में सिमटी उच्च शिक्षा,भोज यूनिवर्सिटी भी छीनी” !
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि कांग्रेस शासनकाल में माचलपुर के बच्चों को उच्च शिक्षा देने के उद्देश्य से भोज मुक्त विश्वविद्यालय का एक केंद्र शुरू किया गया था । उम्मीद जागी थी कि अब युवाओं को बाहर नहीं जाना पड़ेगा, लेकिन प्रशासन की लापरवाही के चलते उस केंद्र को भी नगर से हटाकर अन्यत्र शिफ्ट कर दिया गया । नतीजा यह है कि आज माचलपुर में कॉलेज की पढ़ाई के लिए कोई सरकारी साधन नहीं है । साधन संपन्न लोग अपने बच्चों को इंदौर, जीरापुर या राजगढ़ भेजकर पढ़ा रहे हैं, लेकिन गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों के बच्चों के सामने भविष्य अंधकारमय नजर आ रहा है ।
“सालों से मांग, फिर भी सिर्फ 10 वीं तक सीमित है कन्या स्कूल” !
नगर में पिछले कई वर्षों से बालिकाओं के लिए अलग से ‘कन्या हायर सेकेंडरी स्कूल’ (11वीं-12वीं) खोलने की मांग की जा रही है। हर स्तर पर अधिकारियों और नेताओं को ज्ञापन सौंपे गए, लेकिन व्यवस्था जस की तस है । बालिकाओं के लिए बना स्कूल मात्र 10वीं कक्षा तक ही सीमित है, ऐसे में 10वीं पास करते ही बेटियों की पढ़ाई पर ब्रेक लगने का खतरा मंडराने लगता है ।
“जनप्रतिनिधियों का दोहरा रवैया: माचलपुर से परहेज क्यों” ?
हैरानी की बात यह है कि स्थानीय जनप्रतिनिधि इस पूरी समस्या से अच्छी तरह वाकिफ हैं। नेताओं ने अपनी राजनीति चमकाने के लिए आसपास के अन्य छोटे गांवों और कस्बों में तो लड़कियों के लिए हायर सेकेंडरी कक्षाएं मंजूर करवा दीं, लेकिन माचलपुर को जानबूझकर नजरअंदाज कर दिया गया। जागरूक नागरिकों ने सवाल उठाया है कि आखिर माचलपुर के साथ यह सौतेला व्यवहार और परहेज क्यों किया जा रहा है ? क्या यहाँ की बेटियों को बेहतर शिक्षा पाने का हक नहीं है ?
“आंखें खोलें जिम्मेदार,बिना मानकों के खुले निजी स्कूलों में जाने को मजबूर बेटियां” !
माचलपुर क्षेत्र में बुनियादी सुविधाओं और बिना मानकों के खुले गैर जिम्मेदार निजी प्रायवेट स्कूल कुकुरमुत्ते तरह उग रहे शिक्षा केंद्रों की और बेटियों की शिक्षा पर नकारात्मक प्रभाव को दर्शाता है । आज शासन को बालिकाओं को शिक्षित करने के लिए भयमुक्त और सुरक्षित शैक्षणिक वातावरण तैयार करना सरकार की प्राथमिकता होना चाहिए,ये तभी संभव है जब उनके लिए अलग से उच्च शिक्षा के लिए 12 तक क्लास शासन खोले,लेकिन इस पर जनप्रतिनिधियों की अनदेखी बेटी पढ़ाओ बेटी बचाओ पर पलीता है । चुनाव के समय बड़े-बड़े वादे करने वाले नेता और प्रशासनिक अधिकारी अब इस मुद्दे पर मौन साधे हुए हैं, कन्या हाई स्कूल का उन्नयन (अपग्रेडेशन) नहीं किया गया और कॉलेज की व्यवस्था बहाल नहीं हुई जो वर्षों पुरानी मांग है । देखना यह है कि बेटी पढ़ाओ बेटी बचाओ की बात करने वाले व हर मंच बेटियों के चरण की पूजा करने वाला शासन-प्रशासन और सोए हुए जनप्रतिनिधियों की नींद कब टूटती है या नहीं ।










