लोकायुक्त की रडार पर आए जिला परिवहन अधिकारी ज्ञानेन्द्र वैश्य प्रदेश के 5 दागी जिलों में राजगढ़ का नाम आने से कार्यशैली पर खड़े हुए गंभीर सवाल ।
घनश्याम शर्मा माचलपुर
राजगढ़ / माचलपुर :-
प्रेस नोट बनाकर अपने विभाग की फर्जी तारीफ और जमीनी हकीकत से परे प्रशासनिक कार्य कुशलता का ढोल पीटने की लालसा रखने वालों में अब जिला परिवहन विभाग (RTO) भी शीर्ष पर शामिल हो गया है । राजगढ़ परिवहन विभाग की जमीनी कार्रवाई कितनी प्रभावी और संदेहास्पद है, इसका प्रत्यक्ष उदाहरण ब्यावरा-पचोर मार्ग पर प्रतिदिन बेखौफ दौड़ रही अवैध और अनफिट बसें हैं । विभाग का यह कारनामा पूर्व में भोपाल के परिवहन कर्मचारी सुधीर शर्मा के घोटालों और कार्यप्रणाली की यादें ताजा करने के लिए काफी है ।
“कागजों पर “लॉक” जमीन पर मौत की दौड़”
परिवहन विभाग के रिकॉर्ड की पोल खोलती बस क्रमांक MP33P1086 की हकीकत भयावह है । वर्ष 2022 में शिवपुरी पुलिस ने गंभीर अनियमितताओं के चलते इस बस के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने और इसे पूर्णतः बंद करने के लिए राजगढ़ आरटीओ को आधिकारिक पत्र भेजा था। रिकॉर्ड के मुताबिक, परिवहन विभाग ने इस बस को सिस्टम में ‘लॉक’ (प्रतिबंधित) भी कर दिया, लेकिन भ्रष्टाचार की हद देखिए कि यह लॉक केवल कागजों की शोभा बढ़ाता रहा ।
हकीकत में यह शिवपुरी की प्रतिबंधित बस बिना रोड टैक्स और बिना वैध फिटनेस प्रमाण पत्र के प्रतिदिन ब्यावरा-पचोर हाईवे पर सैकड़ों यात्रियों की जान जोखिम में डालकर दौड़ती रही । नतीजा यह हुआ कि महज पांच दिन पूर्व इसी अवैध ‘मौत की बस’ के दुर्घटनाग्रस्त होने के कारण दो बेगुनाह सवारियों की असमय मौत हो गई ।
“नाकामियों को छिपाने के लिए 11 हजार की चालानी लीपा पोती”
दो मासूम जिंदगियां लेने के बाद जब आरटीओ ज्ञानेन्द्र वैश्य चौतरफा घिरे,तो अपनी कार्य कुशलता का लोहा मनवाने के लिए उन्होंने बुधवार को पचोर क्षेत्र में एक विशेष वाहन जांच अभियान का दिखावा किया । इस अभियान के तहत बीटी रोड स्थित पचोर-बिलापुर मार्ग पर बिना वैध परमिट के चल रही एक यात्री बस को जब्त कर पचोर थाने में खड़ा कराया गया,इसके साथ ही उदनखेड़ी स्थित संस्कृति विद्यालय की दो स्कूल बसों के दस्तावेज अधूरे पाए जाने पर उन्हें जब्त कर प्रबंधन को 3दिन का अल्टीमेटम दिया गया,तथा कृष्णा मॉडर्नस्कूल की एक अनफिट बस पर चालानी कार्रवाई की गई ।
विभाग ने पूरे अभियान में कुल महज 11 हजार रुपये का जुर्माना वसूल कर अपनी पीठ थपथपाने वाला प्रेस नोट जारी कर दिया । क्षेत्र की जनता का सीधा सवाल है कि दो मौतों की जिम्मेदार मुख्य बस पर कार्रवाई करने के बजाय,आरटीओ छोटी मोटी कार्रवाइयों की आड़ में अपनी प्रशासनिक विफलता को क्यों छुपा रहे हैं ?
“किसान के ट्रैक्टर का फर्जी दस्तखत से कर दिया नामांतरण”
विभाग के भीतर समा चुके भ्रष्टाचार का कारनामा नंबर-1 जटियाखेड़ी से सामने आया है । यहाँ ट्रैक्टर क्रमांक MP39AD1264 को जाली और नकली हस्ताक्षरों के सहारे बेचने का सीधा आरोप जिला परिवहन अधिकारी ज्ञानेन्द्र वैश्य और उनके चहेते सहयोगी राजदेव शर्मा पर लगा है । आरोप है कि आरटीओ और राजदेव शर्मा ने आपस में सांठगांठ कर मूल मालिक मुकेश वर्मा के फर्जी हस्ताक्षर का उपयोग कर एक कूटरचित (जाली) दस्तावेज तैयार किया । इसके बाद असली मालिक को बिना कोई बिक्री राशि दिए और उसकी जानकारी के बगैर, ट्रैक्टर का नामांतरण गैर-कानूनी ढंग से शांतिलाल के नाम पर दर्ज कर दिया गया ।
“लोकायुक्त के रडार पर आरटीओ,प्रदेश के 5 दागी जिलों में राजगढ़”
विभाग का कारनामा नंबर-3 सीधे तौर पर आरटीओ वैश्य की कुर्सी को हिलाने वाला है जिला परिवहन अधिकारी ज्ञानेन्द्र वैश्य वर्तमान में सीधे लोकायुक्त जांच के घेरे में हैं । लोकायुक्त द्वारा सितंबर 2025 के बाद हुए बसों के संदिग्ध रजिस्ट्रेशन को लेकर इनसे बिंदुवार जानकारी और जवाब मांगा गया था। मध्य प्रदेश के शीर्ष 5 दागी जिलों में राजगढ़ परिवहन विभाग का नाम आना ही यह साबित करने के लिए पर्याप्त है कि यहाँ नियमों को ताक पर रखकर क्या खेल खेला जा रहा है ।
अधिकारी का पक्ष :-
इस पूरे मामले और लोकायुक्त जांच पर प्रतिक्रिया देते हुए जिला परिवहन अधिकारी ज्ञानेन्द्र वैश्य का कहना है कि— “हमारे जिले में संचालित सभी बसें पूर्णत, नियमानुसार हैं । बसों के पास अधिकृत AIS 153 का बॉडी कोड सर्टिफिकेट मौजूद है और नियमों के उल्लंघन पर लगातार वैधानिक कार्रवाई की जा रही है” ।










