बड़ा सवाल,क्या ग्रामीण अंचलों की सुध लेगा विभाग,या शहरी क्षेत्रों में ही औपचारिकता निभाकर कर लेगा कर्तव्यों की इतिश्री ?
घनश्याम शर्मा माचलपुर
राजगढ़ / माचलपुर :- जिले में यात्री सुरक्षा,सड़क सुरक्षा और मोटरयान अधिनियम का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने के लिए प्रशासन ने सख्त रुख अपना लिया है । कलेक्टर डॉ. गिरीश कुमार मिश्रा के निर्देशानुसार जिला परिवहन विभाग द्वारा बुधवार को पचोर क्षेत्र में एक विशेष वाहन जांच अभियान चलाया गया । इस कार्रवाई के दौरान बिना वैध परमिट और आवश्यक दस्तावेजों के लापरवाही से संचालित की जा रही तीन बसों को जब्त किया गया,इसके साथ ही विभिन्न नियमों के उल्लंघन के मामलों में कुल 11 हजार रुपये का समन शुल्क (जुर्माना) भी वसूला गया ।
“थाने में खड़ी कराईं स्कूल और यात्री बसें”
जिला परिवहन अधिकारी (DTO) ज्ञानेन्द्र वैश्य ने मामले की विस्तृत जानकारी देते हुए बताया कि चेकिंग के दौरान बीटी रोड स्थित पचोर-बिलापुर मार्ग पर एक यात्री बस को रोका गया । जांच करने पर बस के पास कोई वैध परमिट नहीं पाया गया,नियमों का सरेआम उल्लंघन पाए जाने पर विभाग ने बस को तुरंत जब्त कर पचोर थाने में सुरक्षित खड़ा करवा दिया है ।
इसी अभियान के तहत उदनखेड़ी में स्थित संस्कृति विद्यालय की दो स्कूल बसों की भी आकस्मिक जांच की गई । इन दोनों ही बसों के जरूरी कागजात और दस्तावेज अधूरे पाए गए, जिसके बाद इन्हें भी जब्त कर पचोर थाने की अभिरक्षा में भेज दिया गया है । परिवहन विभाग ने स्कूल प्रबंधन को कड़ी हिदायत देते हुए निर्देशित किया है कि वे तीन दिनों के भीतर सभी वैध दस्तावेज कार्यालय में प्रस्तुत करें । यदि तय समय सीमा के भीतर दस्तावेज नहीं सौंपे गए, तो स्कूल प्रबंधन के खिलाफ नियमानुसार सख्त वैधानिक कार्रवाई की जाएगी ।
इसके अलावा जांच दल ने कृष्णा मॉडर्न स्कूल की एक बस को भी रोका, जो बिना वैध फिटनेस प्रमाणपत्र के ही सड़क पर बच्चों को ले जा रही थी । इस गंभीर लापरवाही पर मोटरयान अधिनियम के प्रावधानों के तहत तत्काल चालानी कार्रवाई की गई और जुर्माना वसूला गया ।
“सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता, आगे भी जारी रहेगी चेकिंग”
जिला परिवहन अधिकारी वैश्य ने साफ किया कि विद्यार्थियों और आम नागरिकों की जान-माल की सुरक्षा प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है । जिले में यात्री वाहनों,स्कूल बसों और अन्य कमर्शियल वाहनों की यह सघन और औचक जांच आगे भी लगातार जारी रहेगी, उन्होंने सभी वाहन मालिकों और शिक्षण संस्थानों से अपील की है कि वे सड़कों पर वाहन उतारने से पहले परमिट, फिटनेस, बीमा और रजिस्ट्रेशन (पंजीयन) जैसे सभी जरूरी दस्तावेजों को अपडेट रखें और यातायात के नियमों का शत-प्रतिशत पालन करें । नियमों को ताक पर रखने वालों को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा ।
“सवालों के घेरे में अभियान: ग्रामीण अंचलों की अव्यवस्थित परिवहन व्यवस्था पर कब चलेगा चाबुक” ?
प्रशासन की इस औचक कार्रवाई की सराहना तो हो रही है, लेकिन इसके साथ ही आम जनता के बीच एक बड़ा और तीखा सवाल भी तैर रहा है । स्थानीय नागरिकों का कहना है कि परिवहन विभाग की यह सक्रियता अक्सर केवल मुख्य कस्बों,शहरी इलाकों या हाईवे तक ही सीमित रह जाती है ।
वास्तविकता यह है कि जिले के ग्रामीण अंचलों और अंदरूनी कस्बाई क्षेत्रों में आज भी परिवहन व्यवस्था पूरी तरह वेंटिलेटर पर है। ग्रामीण रूटों पर चलने वाली अधिकांश बसें और निजी वाहन न केवल खटारा हैं, बल्कि वे बिना परमिट, बिना फिटनेस और क्षमता से दोगुने-तिगुने यात्रियों को भेड़-बकरियों की तरह ठूस-ठूस कर दौड़ रहे हैं। स्कूली बच्चों को ले जाने वाले ग्रामीण ऑटो, वैन और मैजिक वाहनों में सुरक्षा मानकों की खुलेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं ।
अब देखने वाली बात यह होगी कि क्या कलेक्टर के निर्देशों का अक्षरशः पालन करते हुए परिवहन विभाग ग्रामीण अंचलों की इस जानलेवा अव्यवस्था पर भी कोई ठोस वैधानिक चाबुक चलाएगा, या फिर शहरी क्षेत्रों में चंद गाड़ियों पर कार्रवाई की इतिश्री कर अपनी पीठ थपथपाता रहेगा ?










