
जीरापुर रोड पर प्रशासन ने की सफाई की कोशिश, प्रदर्शनकारी कर्मियों ने खाली कराया कचरा; जनता की बेरुखी और व्यापारियों की लापरवाही ने बढ़ाई आफत ।
घनश्याम शर्मा माचलपुर
माचलपुर :- देश के माननीय प्रधानमंत्री के आह्वान पर शुरू हुए स्वच्छता अभियान के तहत अमूमन हर छोटे-बड़े भाजपा नेता, पार्षद और प्रशासनिक अधिकारी हाथों में झाड़ू थामे, कैमरों के सामने सुर्खियां बटोरते नजर आते हैं । फोटो खिंचवाने की होड़ में आगे रहने वाले इन रसूखदारों की ‘स्वच्छता भक्ति’ की असलियत आज जनता के सामने आ चुकी है । जब नगर को वास्तव में एक बड़े स्वच्छता अभियान और जनप्रतिनिधियों के नेतृत्व की सबसे ज्यादा जरूरत थी, तब धरातल से सभी रसूखदार नेता और पार्षद नदारद हैं ।
प्रदेशव्यापी आह्वान के साथ माचलपुर नगर में चल रही सफाई कर्मचारियों की अनिश्चितकालीन हड़ताल के कारण पूरा शहर इस वक्त कचरे के ढेर में तब्दील हो चुका है । जगह-जगह बजबजाती गंदगी और कचरे के पहाड़ नगर परिषद व प्रशासन के प्रबंधों को मुंह चिढ़ा रहे हैं ।
“प्रशासन की कोशिश नाकाम, कर्मचारियों के आगे टेकने पड़े घुटने”
बढ़ती गंदगी को देखते हुए शुक्रवार को कलेक्टर के सख्त निर्देश पर नगर परिषद के अन्य कर्मचारियों द्वारा जीरापुर रोड पर सफाई कार्य शुरू कराया गया था। मौके पर जेसीबी के माध्यम से कचरे को ट्रैक्टर-ट्रॉली में भर भी लिया गया था, लेकिन जैसे ही इसकी भनक हड़ताली सफाई कर्मचारियों को लगी, वे तुरंत वहां पहुंच गए और तीखा विरोध शुरू कर दिया कर्मचारियों ने ट्रैक्टर को आगे नहीं बढ़ने दिया और दबाव बनाकर ट्रैक्टर में भरे जा चुके कचरे को दोबारा सड़क पर ही खाली करवा दिया।
इस घटनाक्रम के दौरान माचलपुर सीएमओ देवेंद्र वत्स राजगढ़ मुख्यालय पर कलेक्टर के सम्मुख वीसी (वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग) में मौजूद थे। जैसे ही उन्हें इस गतिरोध की जानकारी मिली, उनके माध्यम से कलेक्टर द्वारा तुरंत नायब तहसीलदार रणधीर सिंह मीणा और थाना प्रभारी को पुलिस बल के साथ मौके पर भेजा गया। प्रशासनिक अधिकारियों और पुलिस ने सफाई व्यवस्था बहाल कराने के लिए काफी प्रयास किए और समझाइश दी, लेकिन हड़ताली कर्मचारी अपनी मांग पर अड़े रहे और सफाई नहीं करने दी । इसके बाद हड़तालियों ने तीखी नारेबाजी शुरू कर दी और हाथों में झाड़ू उठाकर ढोल-ढमाके के साथ एक विशाल जुलूस निकाला। काफी मशक्कत के बाद भी जब बात नहीं बनी, तो अंततः प्रशासन को हड़ताली कर्मचारियों के आगे हथियार डालने को मजबूर होना पड़ा।
“आखिर क्यों अड़े हैं सफाईकर्मी ? ये हैं मुख्य मांगें”
संविदा और दैनिक वेतनभोगी सफाई कर्मचारियों को तुरंत नियमित (परमानेंट) किया जाए । सफाई व्यवस्था में लागू ठेका प्रथा को पूरी तरह बंद कर सभी को नगर परिषद के अधीन रखा जाए । मानदेय बढ़ाकर न्यूनतम वेतन ₹25,000 किया जाए और अनुकंपा नियुक्ति के नियम सरल हों ।
“दिखावे की राजनीति और नागरिकों की बेरुखी”
इस पूरे संकट के बीच आम जनता में इस बात को लेकर भारी आक्रोश है कि जो नेता सामान्य दिनों में सिर्फ फोटो छपवाने और श्रेय लेने के लिए झाड़ू पकड़ते थे, वे आज संकट के समय अपनी जिम्मेदारी से पूरी तरह पल्ला झाड़ चुके हैं। आज जब शहर को नेताओं के वास्तविक श्रमदान की जरूरत है, तब राजनीतिक गलियारों में सन्नाटा पसरा हुआ है।
दूसरी ओर, इस विकट स्थिति के लिए नगर के नागरिकों और व्यापारियों की जागरूकता में कमी भी बराबर की जिम्मेदार है। आम जनता भली-भांति जानती है कि सफाईकर्मी हड़ताल पर हैं और कचरा उठाने वाला कोई नहीं है, इसके बावजूद लोग बेखौफ होकर सड़कों पर ही कचरा फेंक रहे हैं ।
“सब्जी बाजार के व्यापारी बने आफत”
गंदगी फैलाने के मामले में सब्जी बाजार के व्यापारी सबसे आगे नजर आ रहे हैं। व्यापार करने वाले ये दुकानदार जिस जगह अपनी दुकानें लगा रहे हैं, ठीक उसी के आसपास सड़ी-गली सब्जियां और दुकानों का कचरा खुलेआम फेंक रहे हैं। जागरूक नागरिकों का कहना है कि जब तक जनता खुद जिम्मेदार नहीं बनेगी और राजनीतिक नुमाइंदे केवल फोटो खिंचवाने की मानसिकता से बाहर नहीं आएंगे, तब तक स्वच्छता की जमीनी हकीकत कभीनहीं बदल सकती ।









