राजगढ़ में सिविल सेवा मार्गदर्शन संपन्न; कलेक्टर व एसपी ने युवाओं को दिए सफलता के व्यावहारिक सूत्र ।
घनश्याम शर्मा माचलपुर
माचलपुर :- “छोटे परिवेश के अभाव देश की सर्वोच्च प्रशासनिक सेवाओं की राह में बाधक नहीं बन सकते, बशर्ते उन्हें पूरा करने के लिए एक अडिग और अनुशासित जुनून हो।” यह प्रेरणादायी संदेश प्रधानमंत्री कॉलेज ऑफ एक्सीलेंस, राजगढ़ में आयोजित सिविल सेवा मार्गदर्शन कार्यक्रम के समापन पर कलेक्टर डॉ. गिरीश कुमार मिश्रा व एसपी अमित तोलानी ने युवाओं से सीधे संवाद में दिया ।
“कलेक्टर डॉ. मिश्रा की संघर्ष यात्रा: असफलता से पाया आईएएस का मुकाम”
कलेक्टर डॉ. गिरीश कुमार मिश्रा ने अपनी व्यक्तिगत यात्रा साझा करते हुए कहा कि सफलता के लिए संसाधनों से ज्यादा मजबूत इच्छाशक्ति और लक्ष्य के प्रति प्रतिबद्धता जरूरी है । उन्होंने बताया, “कम उम्र में ही पिता का साया उठ जाने के बाद परिस्थितियां कठिन थीं बिना किसी कोचिंग के, वरिष्ठ अधिकारियों से पुस्तकें मांगकर स्व-अध्ययन किया । एक बार यूपीएससी के इंटरव्यू में 90 अंक पाकर भी अंतिम चयन नहीं हुआ । निराशा हुई,पर मैं हारा नहीं।” निरंतर प्रयासों के दम पर वे पहले भारतीय वन सेवा में ऑल इंडिया तीसरी रैंक और फिर तीसरे प्रयास में 69वीं रैंक के साथ आईएएस बने ।
“लोक प्रशासन की वास्तविक संतुष्टि”
प्रशासनिक संवेदनशीलता को रेखांकित करते हुए कलेक्टर ने दो प्रेरक संस्मरण साझा किए । उन्होंने बताया कि छतरपुर में पदस्थापना के दौरान एक निर्धन छात्र मार्गदर्शन हेतु आया था, जो आज दिल्ली विश्वविद्यालय से पढ़कर डीएसपी बन चुका है। वहीं एक अन्य मेधावी बच्चे को स्कूल जाने के लिए उन्होंने साइकिल उपलब्ध कराई ताकि उसकी शिक्षा न रुके। डॉ. मिश्रा ने भावुक होकर कहा, “किसी वंचित छात्र को शिक्षा के अवसर देकर उसके जीवन को संवारना ही एक लोक सेवक के रूप में असली आत्मसंतुष्टि है।”
“एसपी तोलानी का सूत्र: अनुशासन, अच्छी संगति और निरंतरता”
पुलिस अधीक्षक अमित तोलानी ने अभ्यर्थियों को रणनीतिक दृष्टिकोण देते हुए कहा कि सिविल सेवा में आने का उद्देश्य पहले स्पष्ट होना चाहिए । उन्होंने युवाओं को सीख दी, “चाय की टपरियों पर फिजूल समय नष्ट करने के स्थान पर अपने सहकर्मी समूह के साथ समसामयिक विषयों और पिछले वर्षों के प्रश्नपत्रों पर सार्थक विमर्श करें।” उन्होंने दैनिक लक्ष्यों को अनुशासित दिनचर्या के साथ पूरा करने और निरंतरता बनाए रखने पर जोर दिया। एसपी ने कहा— “यदि इस संस्थान से एक भी छात्र सिविल सेवा में चयनित होता है, तो यह पूरे राजगढ़ जिले के लिए प्रशासनिक गौरव का क्षण होगा।”
“मुक्त संवाद और दीर्घकालिक पहल”
कार्यक्रम के दौरान छात्रों ने यूपीएससी-एमपीएससी परीक्षा रणनीति, उत्तर-लेखन, समय प्रबंधन और माध्यम के चयन पर प्रश्न पूछे, जिनका अधिकारियों ने व्यावहारिक समाधान किया। कॉलेज के प्राचार्य डॉ. वी.बी. खरे और प्रो. डॉ. राम दांगी ने प्रशासनिक नेतृत्व का आभार माना। जिला प्रशासन की यह पहल यहीं नहीं रुकेगी; कॉलेज में नवस्थापित ‘सिविल सर्विसेज सोसायटी’ के माध्यम से अब राजगढ़ में ही स्थानीय छात्रों को नियमित मार्गदर्शन, एक्सपर्ट लेक्चर्स और काउंसलिंग की स्थायी संस्थागत व्यवस्था उपलब्ध कराई जाएगी, ताकि जिले की प्रतिभाओं को महानगरों की ओर पलायन न करना पड़े ।









