7 जिलों की खेती को मिलेगा ग्लोबल मार्केट,उद्यानिकी कमिश्नर की बैठक में तैयार हुआ ‘राजगढ़ मॉडल’ ।
घनश्याम शर्मा माचलपुर
माचलपुर :- मोहनपुरा कुंडालिया प्रेशराइज्ड सिंचाई परियोजना से खेतों तक पानी पहुंचने के बाद अब राजगढ़ में खेती की तस्वीर पूरी तरह बदलने जा रही है । जिला प्रशासन अब पारंपरिक फसलों के ढर्रे को छोड़कर वैज्ञानिक और मुनाफे वाली खेती की ओर बड़े कदम बढ़ा रहा है। इसके तहत राजगढ़ को देश के एक बड़े लहसुन उत्पादन केंद्र (हब) के रूप में विकसित किया जाएगा, जिसमें आसपास के 6 से 7 जिलों के किसानों और उनके बाजारों को भी इस बड़े प्लेटफॉर्म से जोड़ा जाएगा ।
इस महत्वाकांक्षी रणनीति को जमीन पर उतारने के लिए मंगलवार को मोहनपुरा कुंडालिया परियोजना कार्यालय में उद्यानिकी कमिश्नर सौरभ कुमार सुमन ने एक हाईलेवल बैठक ली । बैठक में कलेक्टर डॉ. गिरीश कुमार मिश्रा, परियोजना प्रशासक विकास राजोरिया, शुभंकर विश्वास, उद्यानिकी उपसंचालक वी.एस. मीणा, नीरज रेवाड़ी, संदीप दुबे सहित एलएंडटी और जैन इरिगेशन के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। बैठक में तय किया गया कि अब केवल उत्पादन बढ़ाना लक्ष्य नहीं है, बल्कि राजगढ़ के लहसुन को एक ग्लोबल ब्रांड बनाना है ।
“3 महीने में तैयार होगी हाइब्रिड DPR”
कमिश्नर सौरभ सुमन ने बताया कि इस बड़े क्लस्टर को सुचारू रूप से चलाने के लिए एक हाइब्रिड DPR (विस्तृत परियोजना रिपोर्ट) तैयार की जाएगी । इसे एक निजी विशेषज्ञ संस्था तैयार करेगी, जिसमें एलएंडटी और जैन इरिगेशन तकनीकी व मैदानी सहयोग करेंगे । इस दौरान पूरे सिंचित क्षेत्र का वैज्ञानिक डाटा जुटाया जाएगा, जिसमें कांट्रैक्ट फार्मिंग करने वाले और स्वतंत्र, दोनों तरह के किसानों को शामिल किया जाएगा। उन्होंने अधिकारियों को हर हाल में 3 महीने के भीतर क्षेत्र का चयन कर DPR फाइनल करने के निर्देश दिए हैं ।
“प्रोफेशनल टीम संभालेगी कमान, FPO होंगे मजबूत”
बैठक में कमिश्नर ने साफ किया कि यह परियोजना जिले के लिए एक बहुत बड़ी उपलब्धि है । इसका लाभ सिर्फ लहसुन उगाने तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि ग्रॉस वैल्यू एडिशन (उत्पाद के मूल्य संवर्धन) पर मुख्य फोकस होगा। इसके लिए कृषि और मार्केटिंग एक्सपर्ट्स की एक प्रोफेशनल टीम तैनात की जाएगी, जो सीधे किसानों के संपर्क में रहेगी। साथ ही, स्थानीय स्तर पर FPO (कृषक उत्पादक संगठनों) को मजबूत किया जाएगा। अगले 6 महीने में किसानों को छोटे-छोटे समूहों में संगठित कर लिया जाएगा, ताकि नए वित्तीय वर्ष से यह योजना पूरी तरह जमीन पर उतर सके । राजगढ़ में इसे पायलट प्रोजेक्ट (ट्रायल) के रूप में शुरू किया जा रहा है, जिसकी सफलता के बाद प्रदेश में अन्य फसलों के भी ऐसे ही क्लस्टर बनेंगे।
“मंडी जाने का झंझट खत्म, खेत से सीधे खरीदी का बायबैक मॉडल”
लहसुन के दामों में होने वाले उतार-चढ़ाव से किसानों का डर दूर करने के लिए कमिश्नर ने जैन इरिगेशन कंपनी को विशेष ‘बायबैक मॉडल’ पर काम करने के निर्देश दिए हैं। इस प्रस्ताव के तहत कंपनी किसानों से सीधे उनके खेत से ही लहसुन की खरीदी करेगी। इसके लिए दाम तय करने का एक पारदर्शी फॉर्मूला बनाया गया है, जिसके तहत पिछले 3 दिनों के औसत मंडी भाव के आधार पर खेत पर ही भुगतान कर दिया जाएगा। इससे किसानों को मंडी तक उपज ले जाने, परिवहन का भारी खर्च उठाने और वहां होने वाली आढ़त व तुलाई की परेशानी से पूरी तरह मुक्ति मिल जाएगी।
“चीन के मॉडल से सीखकर बनाएंगे विश्वस्तरीय वैरायटी”
कमिश्नर ने कहा कि अब हमें पारंपरिक किस्मों के बजाय अंतरराष्ट्रीय मांग वाली वैरायटी पर काम करना होगा। चीन के लहसुन उत्पादन और उसकी ग्लोबल मार्केटिंग के मॉडल का अध्ययन कर हमें ऐसी किस्में विकसित करनी हैं, जो विदेशी बाजारों के मानकों पर खरी उतरें। राजगढ़ क्लस्टर में केवल लहसुन उगाया नहीं जाएगा, बल्कि इसकी ग्रेडिंग, आधुनिक कोल्ड स्टोरेज व भंडारण, प्रोसेसिंग (पाउडर, पेस्ट आदि बनाना), आकर्षक पैकेजिंग और ब्रांडिंग से लेकर ग्लोबल मार्केटिंग तक का एक पूरा आत्मनिर्भर इकोसिस्टम खड़ा किया जाएगा ।
“सब्सिडी नहीं, डिमांड आधारित खेती से बदलेगी किस्मत”
कमिश्नर ने बैठक के समापन पर अधिकारियों और कंपनियों को विजन देते हुए कहा कि मध्य प्रदेश की कृषि अर्थव्यवस्था का असली भविष्य उद्यानिकी (हॉर्टिकल्चर) में ही छिपा है। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि किमान कल्याण कभी भी सिर्फ सरकारी सब्सिडी बांटने से नहीं हो सकता, बल्कि इसके लिए हमें किसानों को डिमांड आधारित खेती (बाजार की मांग के अनुसार फसल उगाना) की ओर मोड़ना होगा। जब किसान सीधे बाजार की जरूरत से जुड़ेगा, तभी उसे उसकी मेहनत का असली और दोगुना मुनाफा मिल पाएगा ।









