
नगर परिषद व हिंदू उत्सव समिति माचलपुर के तत्वाधान में गरिमामय ढंग से संपन्न हुआ विजयादशमी महोत्सव, आकर्षक आतिशबाजी ने बांधा समां ।
घनश्याम शर्मा माचलपुर
माचलपुर :- नगर में आध्यात्मिक चेतना और अपार हर्षोल्लास के साथ विजयदशमी (दशहरा) का महापर्व पारंपरिक श्रद्धा और धूमधाम से मनाया गया । इस पावन अवसर पर जीरापुर रोड पर स्थित दशहरा मैदान पर बुराई के प्रतीक दशानन के पुतले का दहन किया गया धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यह पर्व मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम द्वारा लंकापति रावण पर प्राप्त की गई विजय की स्मृति में मनाया जाता है,जो यह शाश्वत संदेश देता है कि अधर्म कितना भी शक्तिशाली क्यों न हो, अंततः जीत धर्म और सत्य की ही होती है । माचलपुर नगर का यह पूरा भव्य आयोजन नगर परिषद एवं हिंदू उत्सव समिति के संयुक्त तत्वाधान में गरिमामय ढंग से संपन्न हुआ ।
“शोभायात्रा में विरोधाभास का अद्भुत संगम, गूंजे श्रीराम और दशानन के उद्घोष”
मुख्य आयोजन से पूर्व, दोपहर में चाठा कुंडी बालाजी मंदिर प्रांगण से रामा दल की भव्य और विशाल शोभायात्रा का शुभारंभ हुई । इस यात्रा में भगवान श्रीराम का दिव्य विमान विशेष आकर्षण का केंद्र रहा शोभायात्रा के दौरान आस्था और कला का एक बेहद अनूठा व अद्भुत विरोधाभास देखने को मिला। एक ओर जहां श्रद्धालु और वानर सेना के रूप में सजे पात्र ‘जय श्री राम’ के गगनभेदी जयकारे लगा रहे थे, वहीं दूसरी ओर अपने पूरे लाव लश्कर और राजसी ठाट-बाट के साथ चल रहा लंकापति रावण, मेघनाद, नरांतक और देवान्तक राक्षसों का दल भी अपने राजसी अहंकार में डूबा दशानन के उद्घोष और अट्टहास करता हुआ चल रहा था। भक्ति और अहंकार के इस प्रतीकात्मक द्वंद्व को देखने के लिए मार्गों के दोनों ओर जनसैलाब उमड़ पड़ा ।
“रामलीला में कलाकारों ने जीवंत किया त्रेतायुग,पात्रों ने निभाई उत्कृष्ट भूमिका”
नगर के प्रमुख मार्गों से होती हुई यह अनूठी शोभायात्रा जब ‘रावण बल्डी’ पहुंची, तो वहां रामायण की पावन चौपाइयों के सस्वर पाठ के बीच रामलीला का मंचन प्रारंभ हुआ । इस वर्ष दशहरा उत्सव में सबसे बड़ा आकर्षण धार्मिक नगरी उज्जैन से आए विशेष कलाकारों की टीम रही रामलीला के मंचन के दौरान स्थानीय कलाकारों ने विभिन्न धार्मिक पात्रों के रूप में अपनी उत्कृष्ट कला का प्रदर्शन किया । श्रीराम, लक्ष्मण, माता सीता और हनुमान जी के स्वरूपों में कलाकारों ने जहां अपनी सात्विक भूमिका से दर्शकों को भाव-विभोर कर दिया, वहीं खलपात्रों ने अपने बुलंद संवादों और सजीव अभिनय से मंचन में जान फूंक दी । सभी पात्र अपनी-अपनी भूमिका पूरी तन्मयता से निभा रहे थे, जिससे पूरा माहौल माचलपुर वासियों के लिए त्रेतायुग जैसा सजीव हो उठा था ।
“राम-रावण युद्ध और आकर्षक आतिशबाजी”
मंचन के अंत में राम-रावण के बीच घनघोर युद्ध का प्रदर्शन किया गया, जिसे देख उपस्थित जनसमुदाय रोमांचित हो उठा । जैसे ही भगवान श्रीराम के स्वरूप ने अग्निबाण से रावण के पुतले पर प्रहार किया,गगनभेदी जयघोष के बीच रावण का पुतला धू-डू कर जल उठा। पुतला दहन के दौरान आकाश सतरंगी और आकर्षक आतिशबाजी से सराबोर हो उठा इस पल के साक्षी बनने के लिए माचलपुर नगर सहित आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों से आए हजारों श्रद्धालुओं का हुजूम उमड़ पड़ा था । नगर परिषद, हिंदू उत्सव समिति व पुलिस प्रशासन के पुख्ता प्रबंधन के कारण पूरी व्यवस्थाएं चाक-चौबंद रहीं। रावण दहन संपन्न होने के बाद, सनातन परंपरा का निर्वहन करते हुए लोगों ने एक-दूसरे को गले लगकर विजयादशमी की बधाई दी और सुख-समृद्धि की कामना की ।









