
देश को तोड़ने वाले विमर्श व नैरेटिव से युवाओं को सतर्क रहने की आवश्यकता: राम दर्शन जी जिला प्रचारक ।
घनश्याम शर्मा माचलपुर
माचलपुर :- राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के शताब्दी वर्ष एवं विजयदशमी उत्सव के पावन निमित्त प्रतिवर्षानुसार इस वर्ष भी नगर में भव्य एवं अनुशासित पथ संचलन निकाला गया । संघ की गौरवशाली परंपरा, अनुशासन समर्पण और त्याग का साक्षात परिचय देते हुए सैकड़ों स्वयंसेवक पूर्ण गणवेश में कदमताल करते नजर आए स्थापना के 100 वें वर्ष में प्रवेश के कारण इस बार के संचलन को लेकर स्वयंसेवकों और आमजन में अभूतपूर्व उत्साह देखा गया ।
“शस्त्र पूजन के बाद एस.एम.जी. गार्डन पथ संचलन से हुआ प्रारंभ”
पथ संचलन का प्रारंभ पारंपरिक रूप से विजयादशमी के निमित्त शस्त्र पूजन और ध्वज प्रणाम के साथ हुआ । इसके पश्चात स्थानीय एस.एम.जी. गार्डन (बस स्टैंड) से संचलन प्रारंभ हुआ । संचलन में सबसे आगे संघ का ‘घोष’ (बैंड दल) चल रहा था घोष की देशप्रेम से ओतप्रोत और सधी हुई धुनों पर स्वयंसेवक कदम से कदम मिलाकर पूर्ण अनुशासन के साथ आगे बढ़ रहे थे।
“मातृशक्ति ने उतारी आरती, रंगोली सजाकर हुआ स्वागत”
संचलन नगर के विभिन्न मुख्य मार्गों गली मोहल्लों व चौराहों से होकर गुजरा । इस पूरे मार्ग पर उत्सव जैसा माहौल नजर आया जगह-जगह नगर में नगर वासियों और विशेषकर मातृशक्ति (महिलाओं) द्वारा स्वयंसेवकों पर पुष्प वर्षा की गई और भारत माता के जयघोष के बीच आरती उतारी गई नागरिकों ने अपने-अपने घरों के सामने आकर्षक रंगोली सजाकर और भगवा ध्वज लहराकर संचलन का आत्मीय स्वागत किया । नगर का भ्रमण करने के पश्चात संचलन पुनः अपने प्रस्थान स्थल एस.एम.जी. गार्डन पर पहुंचकर संपन्न हुआ ।
“भारत का इतिहास गौरवशाली, विश्व गुरु बनाना ही लक्ष्य”
संचलन के उपरांत आयोजित मुख्य बौद्धिक कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित राजगढ़ के जिला प्रचारक राम दर्शन जी का पाथेय स्वयंसेवकों को प्राप्त हुआ । उन्होंने अपने उद्बोधन में कहा कि भारत का इतिहास अत्यंत गौरवशाली रहा है हमारा देश शिक्षा, विज्ञान और आयुर्वेद के क्षेत्र में हमेशा से दुनिया में अग्रणी था । यह महापुरुषों और देवताओं की पावन धरा है, जहां रामायण व महाभारत काल से लेकर भगवान राम, कृष्ण, महाराणा प्रताप, छत्रपति शिवाजी महाराज और स्वामी विवेकानंद जैसी विभूतियों ने जन्म लेकर राष्ट्र को दिशा दी ।
जिला प्रचारक ने संघ यात्रा पर प्रकाश डालते हुए कहा कि वर्ष 1925 में डॉ. केशवराव बलीराम हेडगेवार जी द्वारा रोपा गया यह बीज आज आप जैसे स्वयंसेवकों के सतत परिश्रम और त्याग से 100 वर्ष की इस गौरवमयी यात्रा को पूर्ण कर चुका है। उन्होंने संघ कार्य और संचलन के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि स्वयंसेवकों का लक्ष्य समाज को जोड़ना है ।
अपने उद्बोधन में उन्होंने युवाओं को विशेष रूप से प्रेरित करते हुए कहा कि आज हमारा देश विश्व की चौथी महाशक्ति बनकर उभर रहा है। भारत की इस प्रगति से घबराकर कुछ वैश्विक और राष्ट्रविरोधी ताकतें देश में जातिभेद, वर्गभेद और अलग-अलग प्रकार के झूठे नैरेटिव (विमर्श) चलाकर समाज को तोड़ने का प्रयास कर रही हैं। युवाओं को इस वैचारिक आक्रमण के प्रति बेहद सतर्क रहने की आवश्यकता है । हमें सत्य और असत्य को परखना होगा और राष्ट्र को कमजोर करने वाली ताकतों को पहचानना होगा ।
“चरैवेति-चरैवेति’ मंत्र के साथ आगे बढ़ने का आह्वान”
उन्होंने सभी स्वयंसेवकों से आह्वान किया कि समाज में जातिगत भेदभाव को भूलकर ‘सर्व हिंदू समाज’ के भाव को जागृत करें । सभी हिंदू सहोदर भाई हैं। उन्होंने अंत में कहा कि हमें अपने लक्ष्य पर अडिग रहते हुए भारत माता को पुनः परम वैभव पर ले जाना है और भारत को पुनः विश्व गुरु बनाना है । इसके लिए ‘चरैवेति चरैवेति’ (चलते रहो, चलते रहो) का हमारा मूल मंत्र ही हमारी प्रेरणा है ।
कार्यक्रम के अंत में प्रार्थना हुई, जिसके बाद कार्यक्रम का विधिवत समापन हुआ। इस अवसर पर संघ के स्थानीय पदाधिकारी, वरिष्ठ स्वयंसेवक सहित बड़ी संख्या में प्रबुद्ध नागरिक उपस्थित रहे।









