किताबी दुनिया से बाहर निकलकर बच्चों ने समझा नागरिक कर्तव्य,डाक प्रणाली और कानून व्यवस्था का ढांचा ।
घनश्याम शर्मा माचलपुर
माचलपुर :– सरस्वती शिशु/विद्या मंदिर उच्चतर माध्यमिक विद्यालय माचलपुर में तीन दिवसीय ‘दिशा बोध शिविर’ का भव्य आयोजन किया गया। 15 से 17 अक्टूबर 2026 तक चले इस शिविर के तहत कक्षा नवमीं और दसवीं के छात्र छात्राओं (भैया-बहिन) को पोस्ट ऑफिस (डाकघर) और स्थानीय पुलिस थाने का शैक्षणिक भ्रमण कराया गया । इस अनूठे अनुभव के माध्यम से विद्यार्थियों ने किताबी ज्ञान से परे समाज की व्यावहारिक व्यवस्थाओं को बेहद करीब से समझा ।
“डाकघर में समझी पत्र और पार्सल की यात्रा”
शैक्षणिक भ्रमण के पहले चरण में विद्यार्थी डाकघर पहुंचे। यहाँ उन्होंने डाक विभाग की पूरी कार्यप्रणाली को देखा । पोस्ट मास्टर और कर्मचारियों ने बच्चों को बताया कि कैसे एक पत्र अपने गंतव्य तक पहुँचता है। इसके साथ ही विद्यार्थियों ने रजिस्ट्री, स्पीड पोस्ट, पार्सल सेवा और डाकघर की विभिन्न बचत योजनाओं के बारे में विस्तार से जानकारी प्राप्त की । डिजिटल दौर में भी डाक विभाग की महत्ता को देखकर विद्यार्थी काफी उत्साहित नजर आए ।
“पुलिस थाने में सीखी कानून-व्यवस्था और नागरिक कर्तव्य”
भ्रमण के दूसरे चरण में विद्यार्थियों ने पुलिस थाने का दौरा किया । थाना प्रभारी और पुलिस कर्मियों ने बच्चों को पुलिस विभाग की सेवाओं, समाज में कानून-व्यवस्था बनाए रखने में उनकी भूमिका और सुरक्षा तंत्र के बारे में जागरूक किया । विद्यार्थियों को थाने के विभिन्न कक्षों, कार्यप्रणाली और आपात कालीन नंबरों की जानकारी दी गई । पुलिस अधिकारियों ने बच्चों को एक जिम्मेदार नागरिक बनने, यातायात नियमों का पालन करने और अपने कर्तव्यों के प्रति सजग रहने की प्रेरणा दी ।
“व्यावहारिक ज्ञानवर्धन है मुख्य उद्देश्य: प्राचार्य”
विद्यालय के प्राचार्य लक्ष्मीनारायण पंवार ने बताया कि इस भ्रमण का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों को किताबी ज्ञान के साथ-साथ व्यावहारिक और सामाजिक जानकारी प्रदान करना था । उन्होंने कहा कि इस प्रकार के शैक्षणिक भ्रमण से विद्यार्थियों के ज्ञान, अनुभव और सामाजिक जागरूकता में वृद्धि होती है, जो उनके सर्वांगीण विकास के लिए बेहद जरूरी है ।
इस शैक्षणिक भ्रमण के दौरान मुख्य रूप से विद्यालय के प्राचार्य लक्ष्मीनारायण पंवार, आचार्य अभिषेक दुबे, आचार्य पंकज राठौर सहित बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं (भैया-बहिन) उपस्थित रहे ।









