
श्रद्धालु उपवास और कठिन साधना कर मना रहे शक्ति पर्व, शीतला माता मंदिर में ‘कुंकुम अर्चना’ बनी विशेष आकर्षण,गली मोहल्लों में सजे माता के भव्य दरबार ।
घनश्याम शर्मा माचलपुर
माचलपुर :- भारतीय पंचांग में आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से प्रारंभ होने वाली शारदीय नवरात्रि देवी आराधना का अत्यंत महत्त्वपूर्ण पर्व है । इन नौ दिनों में माँ दुर्गा के विभिन्न स्वरूपों की पूजा,मंत्र-जप, व्रत, ध्यान और साधना के माध्यम से श्रद्धालु अपनी आस्था को अभिव्यक्त कर रहे हैं । इन दिनों माचलपुर नगर में भी आद्यशक्ति की आराधना का यह महापर्व पूरे उल्लास, संयम और वैभव के साथ मनाया जा रहा है घट स्थापना के प्रथम दिन से ही नगर का माहौल पूरी तरह ‘माता मय’ हो चुका है । जहाँ एक ओर देवी मंदिरों में भोर की प्रथम किरण के साथ ही वैदिक मंत्रोचार प्रारंभ हो जाते हैं, वहीं श्रद्धालु भी पूर्ण रूप से आदिशक्ति की भक्ति में लीन हैं इस पावन अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु नौ दिनों का कठिन उपवास रखकर तथा नंगे पैर रहकर माता रानी की अनन्य उपासना कर रहे हैं ।
“श्रद्धालुओं के लिए कल्याणकारी हैं माता की साधना के यह तथ्य”
ग्रंथों के अनुसार, नवरात्रि में किए जाने वाले व्रत और उपवास का केवल धार्मिक ही नहीं, बल्कि गहरा वैज्ञानिक और आध्यात्मिक महत्व भी है, जिसका सीधा लाभ श्रद्धालुओं को मिलता है । ऋतु परिवर्तन के इस दौर में संयम और सात्विक आहार (उपवास) से शरीर का शुद्धिकरण होता है, जिससे रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है । इसी प्रकार, नंगे पैर चलने से पृथ्वी की सकारात्मक ऊर्जा का शरीर में संचार होता है, जो मानसिक तनाव को दूर कर एकाग्रता बढ़ाती है । शास्त्रों के अनुसार, इन नौ दिनों में श्रद्धापूर्वक किया गया ‘ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे’ मंत्र का मानसिक जप श्रद्धालुओं के आसपास एक सुरक्षा कवच का निर्माण करता है,जिससे नकारात्मक शक्तियों का नाश होता और घर परिवार में सुख समृद्धि का वास होता है
“आंतरिक परिष्कार का संदेश: शीतला माता मंदिर में सामूहिक पूजा अर्चना”
नवरात्रि का आध्यात्मिक संदेश बाहरी पूजा के साथ आंतरिक परिष्कार भी है। जैसे साधक दीप प्रज्वलित करता है,वैसे ही उसे अपने भीतर विवेक का प्रकाश जगाने का प्रयास करना चाहिए । इसी पावन भाव को समेटे हुए नगर के शीतला माता मंदिर में आयोजित नौ दिवसीय कुंकुम अर्चना इन दिनों श्रद्धालुओं के लिए सामूहिक उपासना का मुख्य केंद्र बनी हुई है, जहाँ बड़ी संख्या में मातृशक्ति जुट रही है। भारतीय सनातन परंपरा में देवी केवल एक पूजनीय स्वरूप नहीं, बल्कि शक्ति की व्यापक चेतना हैं । इसी गूढ़ परंपरा में योगिनी उपासना का एक अत्यंत विशिष्ट स्थान रहा है,जो प्रकृति की व्यापकता और आध्यात्मिक साधना की गहनता की ओर संकेत करती है।
“माँ भद्रकाली धाम में शक्ति-उपासना और स्थानीय मंदिरों की अनूठी परंपरा”
नगर के प्राचीन व प्रसिद्ध माँ भद्रकाली के नाम से प्रतिष्ठित मंदिर में नवरात्रि के अवसर पर होने वाली आराधना श्रद्धालुओं के लिए इसी विराट शाक्त परंपरा की शक्ति उपासना के भाव से जुड़ने का एक अनुपम अवसर बनी हुई है। इसके साथ ही, स्थानीय शीतला माता मंदिर, हिंगलाज माता मंदिर और लालबाई माता मंदिर की अपनी विशिष्ट परंपराएं और ऐतिहासिक मान्यताएं हैं,जो इस क्षेत्र की धार्मिक विरासत को और समृद्ध बनाती हैं। इन प्रमुख सिद्धपीठों के साथ-साथ चामुंडा माता मंदिर तथा बागरी मोहल्ले के माता मंदिरों में विशेष महाआरती और महाप्रसाद जैसे धार्मिक आयोजन निरंतर चल रहे हैं, जहाँ सुबह से लेकर देर रात्रि तक भक्तों का तांता लगा हुआ है ।
“परंपरा और उल्लास: झंडा चौक पर १३ वर्षों से जारी है डांडिया का जादू”
जहाँ एक ओर मंदिरों में गंभीर आध्यात्मिक साधना का दौर है,वहीं दूसरी ओर नगर की विभिन्न उत्सव समितियों द्वारा स्थापित भव्य पंडालों में संस्कृति और उल्लास का अनूठा संगम देखने को मिल रहा है । विशेष रूप से, पुराने झंडा चौक पर पिछले १३ वर्षों से आयोजित हो रहा आकर्षक डांडिया रास इस बार भी युवाओं और श्रद्धालुओं के लिए मुख्य आकर्षण का केंद्र बना हुआ है, जहाँ पारंपरिक परिधानों में लोग देर रात तक थिरकते नजर आ रहे हैं। इसी प्रकार, शीतला माता मंदिर चौकी मोहल्ला में भी गरबा महोत्सव की धूम मची हुई है। इन आयोजनों के बीच मंदिरों और पंडालों में कन्या भोज का भी भव्य आयोजन किया जा रहा है, जिसमें नौ दुर्गा के रूप में छोटी कन्याओं का पाद-पूजन कर संपूर्ण माचलपुर में भक्ति, सेवा और उल्लास की त्रिवेणी बहाई जा रही है। यह पर्व वास्तव में परिवार, समाज और जीवन को श्रेष्ठ दिशा देने का अनुपम अवसर बन गया है ।









