
मंत्री गौतम टेटवाल बोले – CMD से चर्चा हुई, अघोषित कटौती रुकेगी,अगर हुई तो जनप्रतिनिधियों को सूचना देंगे – जनता बोली,आश्वासन नहीं, निर्बाध बिजली चाहिए ।
घनश्याम शर्मा माचलपुर
माचलपुर :- राजगढ़ जिले में अघोषित बिजली कटौती को लेकर जनता का आक्रोश थमने का नाम नहीं ले रहा है। अब यह मुद्दा राजनैतिक गलियारों में भी दो तस्वीरों के रूप में भारी चर्चा का विषय बना हुआ है ।
एक तरफ राज्य मंत्री गौतम टेटवाल ने सोशल मीडिया पर वीडियो जारी कर बिजली कटौती को लेकर विद्युत विभाग के सीएमडी (CMD) से चर्चा करने और समाधान का भरोसा दिलाया है । वहीं दूसरी तरफ सांसद रोडमल नागर का एक वीडियो वायरल होने से मामला और गरमा गया है ।
बिजली कटौती से नाराज ग्रामीणों का विरोध प्रदर्शन भी लगातार जारी है । करेड़ी में आज भी बिजली कटौती के विरोध में ग्रामीणों ने मोर्चा खोलते हुए करीब एक घंटे तक चक्काजाम कर दिया, और नारे बाजी करते हुए सरकार को कोसा इस जाम से क्षेत्र के आवागमन के साथ साथ प्रशासन में भी हड़कंप मच गया प्रदर्शन से साफ है कि अघोषित कटौती को लेकर ग्रामीणों में भारी नाराजगी है ।
“मंत्री जी का वीडियो संदेश: ‘विद्युत बिलों का भुगतान करें उपभोक्ता”
मंत्री गौतम टेटवाल ने अपने वीडियो संदेश में कहा, “राजगढ़ जिले में अघोषित विद्युत कटौती को लेकर रात्रि के समय एक से डेढ़ घंटा बिजली गुल हो जाती है, उसकी सूचना भी संबंधित अधिकारी से नहीं मिलती । इस शिकायत पर मेरी विद्युत विभाग के CMD साहब से चर्चा हुई, उन्होंने आश्वासन दिया है कि इस कटौती को रोका जाएगा । दुर्भाग्यवश अगर कटौती होगी तो संबंधित ग्रिड के आसपास निवासरत जनप्रतिनिधि को अवगत कराया जाएगा सभी जिलेवासी, किसान भाइयों और बिजली उपभोक्ताओं से निवेदन है कि बिजली के बिलों का भुगतान करें । हम इस अघोषित कटौती को रोकने का प्रयास कर रहे हैं, इसका अच्छा परिणाम आएगा।” के बावजूद कटौती जारी है।
“अब परीक्षा की घड़ी: अधिकारी सुनेंगे या चलाएंगे मनमानी”?
मंत्री जी के इस बड़े दावे के बाद अब यह देखना दिलचस्प होगा कि उनकी बात में कितना दम है। आज जनता के लिए परीक्षा की घड़ी है कि अधिकारी मंत्री जी के निर्देशों को गंभीरता से लेते हैं या अपनी मनमानी जारी रखते हैं। आज जिले की बिजली गुल होती है या नहीं, इसी से तय होगा कि विद्युत विभाग के अफसरों ने मंत्री जी की बात को कितनी तवज्जो दी है। फिलहाल, पूरी जनता की नजरें आज की बिजली व्यवस्था और ग्रिडों की हलचल पर टिकी हुई हैं।










