
रात्रि गश्त के दौरान बैटरी डिस्चार्ज होने से रुक गए थे पहिए; खाकी ने संकट में बढ़ाया मदद का हाथ, कामखेड़ा बालाजी के दर्शन को जा रहे थे श्रद्धालु ।
घनश्याम शर्मा माचलपुर
माचलपुर / राजगढ़ :- जिले की थाना कलीपीठ पुलिस ने रात्रि गश्त के दौरान संकट में फँसे दिव्यांग तीर्थयात्रियों की मदद कर मानवीय संवेदन शीलता और जनसेवा का एक अनूठा सहरानीय उदाहरण पेश किया है । पुलिस की इस तत्परता की क्षेत्र में चारों ओर प्रशंसा हो रही है ।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, कुछ दिव्यांग यात्री बैटरी चलित ट्राईसाइकिल (साइकिल) से प्रसिद्ध तीर्थ स्थल कामखेड़ा बालाजी के दर्शन के लिए जा रहे थे । इसी दौरान कलीपीठ क्षेत्र में अचानक उनकी साइकिल की बैटरी पूरी तरह डिस्चार्ज हो गई देर रात का समय होने और सुनसान रास्ता होने के कारण दिव्यांग यात्री बीच राह में फँस गए और आगे की यात्रा जारी रखने में असमर्थ हो गए । घने अंधेरे और परेशानी के बीच यात्री मदद की आस में बैठे थे ।
“पुलिस गश्त टीम की पड़ी नजर, तुरंत पहुँचे पास”
इसी दौरान थाना कलीपीठ की पुलिस टीम क्षेत्र में रात्रि गश्त पर थी । सड़क किनारे परेशानी में खड़े दिव्यांग यात्रियों पर जैसे ही पुलिस कर्मियों की नजर पड़ी, उन्होंने तत्काल गाड़ी रोककर स्थिति का जायजा लिया यात्रियों से बातचीत कर उनकी समस्या सुनते ही पुलिस ने बिना समय गंवाए मानवीय दृष्टिकोण अपनाया और उन्हें हर संभव सहायता उपलब्ध कराई ।
“सुरक्षित पहुँचाया गंतव्य तक”
पुलिस टीम ने न केवल दिव्यांग यात्रियों का हौसला बढ़ाया,बल्कि उनके वाहनों और उन्हें सुरक्षित रूप से उनके गंतव्य (कामखेड़ा बालाजी) तक पहुँचाने की पुख्ता व्यवस्था की । पुलिस की इस त्वरित मदद से यात्रियों के चेहरे खिल उठे और उनकी तीर्थयात्रा में आ रही बाधा दूर हो गई यात्रियों ने कलीपीठ पुलिस का सहृदय आभार व्यक्त किया ।
“इन ‘खाकी के दूतों’ ने निभाई मुख्य भूमिका”
इस सराहनीय और मानवीय कार्य में कलीपीठ थाने के निम्नलिखित पुलिसकर्मियों की महत्वपूर्ण भूमिका रही, जिनकी सजगता से यात्रियों को समय पर मदद मिल सकी:
• प्रधान आरक्षक 304 मकान सिंह,प्रधान आरक्षक 336 चेतन सिंह चौहान,आरक्षक 856 प्रशांत शर्मा, डायल 112 चालक सुनील यादव ।
थाना कलीपीठ पुलिस का यह कार्य यह साबित करता है कि पुलिस का दायित्व केवल कानून-व्यवस्था बनाए रखना ही नहीं, बल्कि संकट की घड़ी में जरूरतमंद नागरिकों के साथ खड़े रहना भी है। राजगढ़ पुलिस ने एक बार फिर अपने ध्येय वाक्य—”सेवा, सुरक्षा एवं संवेदनशीलता” को पूरी तरह चरितार्थ किया है।










