वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए CFRR दावों के समयबद्ध निराकरण पर हुई चर्चा, कलेक्टर और DFO रहे मौजूद ।
घनश्याम शर्मा माचलपुर
माचलपुर :- वन अधिकार अधिनियम के प्रभावी क्रियान्वयन, अनुसूचित जनजाति एवं अन्य परंपरागत वन निवासियों के वन अधिकारों की मान्यता तथा सामुदायिक वन संसाधन अधिकार (CFRR) से संबंधित दावों की प्रक्रिया को व्यवस्थित एवं समयबद्ध रूप से पूर्ण करने के संबंध में बुधवार को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए।
वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में वन अधिकार अधिनियम एवं संबंधित नियमों के प्रावधानों की जानकारी देते हुए अधिकारियों को निर्देशित किया गया कि वन अधिकारों से संबंधित दावों के परीक्षण एवं निराकरण की प्रक्रिया में अधिनियम में निर्धारित प्रावधानों का पालन सुनिश्चित किया जाए।
अधिकारियों से कहा गया कि ग्राम सभा के माध्यम से प्राप्त दावों के परीक्षण, आवश्यक अभिलेखों एवं साक्ष्यों की जांच तथा पात्र हितग्राहियों को उनके अधिकारों की मान्यता प्रदान करने की प्रक्रिया को गंभीरता से लिया जाए।
“जैव विविधता संरक्षण पर जोर”
बैठक में सामुदायिक वन संसाधन अधिकार के संबंध में भी विस्तार से जानकारी दी गई। निर्देश दिए गए कि वन में निवास करने वाली अनुसूचित जनजातियों एवं अन्य परंपरागत वन निवासियों के मान्यता प्राप्त अधिकारों के संरक्षण के साथ-साथ वन संसाधनों के दीर्घकालीन एवं जिम्मेदार उपयोग, जैव विविधता के संरक्षण तथा पारिस्थितिकी संतुलन को बनाए रखने पर विशेष ध्यान दिया जाए।
साथ ही दावा, परीक्षण, सत्यापन एवं मान्यता की पूरी प्रक्रिया पारदर्शी ढंग से संपादित करने और वनवासियों की आजीविका एवं खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने के साथ वनों के संरक्षण और संवर्धन की व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ करने के निर्देश दिए गए।
वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में एनआईसी कक्ष से कलेक्टर डॉ. गिरीश कुमार मिश्रा एवं जिला वन मंडल अधिकारी सहित संबंधित अधिकारी उपस्थित रहे ।










