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मोहनपुरा-कुंडालिया की तकनीक की ऑस्ट्रेलिया में गूंज, मेलबर्न में छाए राजगढ़ के इंजीनियर विकास राजौरिया !

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MP की सिंचाई क्रांति का डंका विदेश में, AI और मशीन लर्निंग पर अंतर्राष्ट्रीय वर्कशॉप में प्रस्तुत किया विश्व की सबसे बड़ी पाइप सिंचाई परियोजना का मॉडल ।

घनश्याम शर्मा माचलपुर

राजगढ़ / माचलपुर :- जल संसाधन विभाग मध्यप्रदेश की महत्वाकांक्षी मोहनपुरा-कुंडालिया परियोजना की उन्नत सिंचाई तकनीक की चर्चा अब अंतर्राष्ट्रीय मंच पर हो रही है।

ऑस्ट्रेलिया के मेलबर्न स्थित विक्टोरिया यूनिवर्सिटी में 21 एवं 22 सितंबर को “जल प्रबंधन में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, मशीन लर्निंग एवं तकनीक का उपयोग” विषय पर दो दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय कार्यशाला आयोजित हुई।

कार्यशाला का आयोजन ऑस्ट्रेलिया सरकार के विदेश एवं व्यापार विभाग (DFAT) के अंतर्गत सेंटर फॉर ऑस्ट्रेलिया-इंडिया रिलेशंस द्वारा संचालित “मैत्री” अनुदान परियोजना के तहत किया गया, जिसमें दोनों देशों के लगभग 85 प्रतिनिधियों ने भाग लिया ।

“भारतीय दल के एकमात्र फील्ड इंजीनियर बने राजौरिया”

भारत से आमंत्रित 6 सदस्यीय दल में 5 प्रतिनिधि IIT, NIT एवं अन्य प्रतिष्ठित संस्थानों के प्राध्यापक थे, जबकि मोहनपुरा-कुंडालिया परियोजना प्रबंधन इकाई राजगढ़ के अतिरिक्त परियोजना संचालक एवं परियोजना प्रशासक विकास राजौरिया दल के एकमात्र क्षेत्रीय कार्यपालक अभियंता के रूप में सम्मिलित हुए ।

“पहले ढांचा, फिर बुद्धिमत्ता – राजौरिया”

अपने प्रस्तुतिकरण में राजौरिया ने कहा कि किसी भी AI अथवा मशीन लर्निंग पहल से पूर्व सिंचाई तंत्र का “AI-रेडी” होना अनिवार्य है। जब तक पानी की मात्रा मापी, देखी और नियंत्रित न की जा सके, तब तक तकनीक का लाभ नहीं मिल सकता। इसलिए सिद्धांत है – पहले ढांचा, फिर बुद्धिमत्ता ।

उन्होंने बताया कि मोहनपुरा कुंडालिया परियोजना विश्व का सबसे बड़ा दाबयुक्त पाइप सिंचाई नेटवर्क है, जिसमें लगभग 26,662 किलोमीटर पाइपलाइन, 23 पंप हाउस तथा 10,100 आउटलेट के माध्यम से जलाशय से सीधे खेत तक नापकर पानी पहुंचाया जाता है । इस प्रणाली से जल उपयोग दक्षता 38 प्रतिशत से बढ़कर 80 प्रतिशत से अधिक हो गई है और कृषि उपार्जन में लगभग चार गुना वृद्धि दर्ज की गई है ।

“AI आधारित पंप संचालन का मॉडल रखा”

प्रस्तुतिकरण में विद्युत बचत हेतु AI आधारित पंप संचालन, मशीनों की पूर्वानुमानित देखरेख, जल रिसाव एवं चोरी की पहचान तथा आगामी चरण में सैटेलाइट आधारित निर्णय एवं बिलिंग सहायता प्रणाली जैसे प्रयोगों की जानकारी भी दी गई । राजौरिया ने विक्टोरिया यूनिवर्सिटी, आयोजक डॉ. अशोक शर्मा तथा ऑस्ट्रेलियाई सरकार के प्रति आमंत्रण एवं संपूर्ण व्यय वहन हेतु आभार व्यक्त किया ।

Khushi Samvad
Author: Khushi Samvad

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