2-3 फीट पानी में लबालब है कब्रिस्तान, अंतिम संस्कार को मोहताज हुआ मुस्लिम समाज, प्रशासन मौन ।
घनश्याम शर्मा माचलपुर
माचलपुर /परसुलिया :- यूं तो सरकार सबका साथ, सबका विकास और सबका विश्वास की बात करती है, लेकिन राजगढ़ जिले की ब्यावरा तहसील के ग्राम परसुलिया से एक ऐसी दर्दनाक तस्वीर सामने आई है, जहाँ जिंदा लोगों के साथ-साथ मरने वालों को भी अपना हक नहीं मिल रहा है ।
यहाँ के मुस्लिम समुदाय की पुश्तैनी कब्रिस्तान की जमीन एक तरफ हाईवे निर्माण खा गया और दूसरी तरफ बची हुई जमीन मोहनपुरा डैम के बैक वाटर में डूब गई ।
“पानी में हो रहा सुपुर्द-ए-खाक”
परसुलिया के ग्रामीणों ने बताया कि हाईवे निर्माण में आधी से ज्यादा कब्रिस्तान की जमीन चली गई और जो थोड़ी बहुत बची थी, वह मोहनपुरा परियोजना के बैक वाटर की जद में आ गई। आज हालात यह हैं कि कब्रिस्तान में 2 से 3 फीट तक पानी भरा हुआ है ।
हाल ही में परसुलिया के सदर मरहूम लतीफ खान के इंतकाल के बाद जब बचे हुए टापू पर कब्र की खुदाई की गई तो खुदाई में पानी ही पानी निकल रहा था । ऐसे में ग्रामीणों ने मजबूरन कब्र में नीचे वृक्ष के पत्ते, सीमेंट के कट्टे और लकड़ी के बुरादे की परत बिछाकर मरहूम को सुपुर्द-ए-खाक किया। ऐसे में सम्मान के साथ अंतिम संस्कार करना नामुमकिन हो गया है ।
“प्रशासन के दरवाजे खटखटाए, नहीं मिला मुआवजा”
ग्रामीणों का आरोप है कि उन्होंने इस समस्या को लेकर कई बार प्रशासन के दरवाजे खटखटाए, आवेदन दिए, यहां तक कि जल सत्याग्रह भी किया, लेकिन प्रशासन के कानों पर जूं तक नहीं रेंगी। और तो और, अधिग्रहित की गई इस जमीन का आज तक एक रुपये का मुआवजा भी नहीं दिया गया।
सवाल यह उठता है कि जब विकास के नाम पर किसी समुदाय की धार्मिक आस्था की जमीन ली जाती है, तो उसके बदले वैकल्पिक व्यवस्था करना क्या प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं है? परसुलिया का मुस्लिम समाज आज भी इंतजार में है कि कब प्रशासन जागेगा और उनके मृतकों को सम्मान की आखिरी जमीन नसीब होगी ।










