विरोधाभास: पंचायत ने दिया पीछे खाली पड़ी सरकारी जमीन का विकल्प, फिर भी स्कूल की सुरक्षित भूमि दबाने पर अड़े रसूखदार; ग्रामीणों में भारी आक्रोश ।
घनश्याम शर्मा माचलपुर
राजगढ़ / माचलपुर :-टप्पा तहसील माचलपुर के अंतर्गत ग्राम पंचायत पीपल्या कुल्मी से शासकीय संपत्तियों पर प्रशासनिक अनदेखी का एक गंभीर मामला सामने आया है। यहाँ शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय की सुरक्षित भूमि और बच्चों के खेल मैदान पर बिना किसी वैधानिक अनुमति के ‘धर्मशाला’ निर्माण के नाम पर अवैध अतिक्रमण किया जा रहा है ।
मामले की गंभीरता को देखते हुए ग्राम पंचायत और स्कूल प्रबंधन द्वारा जिला कलेक्टर तक गुहार लगाई जा चुकी है। पटवारी द्वारा मौके पर जाकर पंचनामा बनाए जाने के बावजूद प्रशासनिक सुस्ती के कारण अवैध निर्माण लगातार जारी है, जिससे ग्रामीणों में भारी आक्रोश व्याप्त है ।
नियम ताक पर: बिना अनुमति और आवंटन के कैसे हुई तार फेंसिंग ?
नियमानुसार किसी भी शासकीय भूमि पर सामाजिक या धार्मिक निर्माण के लिए राजस्व विभाग से बकायदा भूमि आवंटन और ग्राम पंचायत से अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) लेना अनिवार्य है। लेकिन पीपल्या कुल्मी में रसूखदारों द्वारा इन सभी नियमों को ठेंगा दिखाकर स्कूल की सुरक्षित भूमि पर कब्जा कर लिया गया। ग्रामीणों का आरोप है कि जानबूझकर स्कूल के खेल मैदान को निशाना बनाया जा रहा है ताकि भविष्य में बच्चों के खेलने की जगह ही न बचे।
“पंचायत का व्यावहारिक सुझाव – “पीछे जमीन खाली है, उसका सीमांकन करो”
ग्राम पंचायत पीपल्या कुल्मी ने इस विवाद को सुलझाने के लिए नायब तहसीलदार को एक बेहद व्यावहारिक लिखित सुझाव दिया है। पंचायत के अनुसार यदि ग्रामीणों या किसी समाज को धर्मशाला के लिए भूमि की अत्यंत आवश्यकता है तो विद्यालय भवन के ठीक पीछे शासन की प्रचुर मात्रा में शासकीय भूमि खाली पड़ी है। प्रशासन उस भूमि का सीमांकन कर नियमानुसार आवंटित कर दे, जिस पर पंचायत को कोई आपत्ति नहीं होगी। लेकिन बच्चों के भविष्य और खेल मैदान की कीमत पर यह अतिक्रमण किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
“सिर्फ तारीख पर तारीख मिल रही है” – प्राचार्य
विद्यालय के प्राचार्य जगदीश दांगी ने बताया, “हमने इस गंभीर विषय को लेकर राजस्व विभाग के सभी आला अधिकारियों सहित जिला कलेक्टर को भी लिखित शिकायत भेजी है। तहसीलदार के निर्देश पर पटवारी ने मौके का पंचनामा भी तैयार कर लिया है, जो यह साबित करता है कि कब्जा अवैध है। लेकिन विडंबना देखिए कि अतिक्रमण हटाने की वास्तविक कार्रवाई को रोज ‘आज-कल’ कहकर टाला जा रहा है।”










