
ओडिशा से उज्जैन होते हुए नलखेड़ा आए थे दर्शन करने, हवन के बाद लौटते समय हुआ हादसा,सुबह ग्रामीणों ने देखा वाहन,प्रशासन ने शव निकाले, बैरिकेडिंग और चेतावनी व्यवस्था की होगी जांच ।
घनश्याम शर्मा माचलपुर
माचलपुर / नलखेड़ा :- आस्था के सबसे बड़े केंद्र मां बगलामुखी मंदिर में दर्शन करने ओडिशा से मालवा आए एक ही परिवार की नलखेड़ा में दर्दनाक मौत हो गई । मंदिर के समीप बरसाती नाले के तेज बहाव में कार बह जाने से तीन मासूम बच्चों, दो महिलाओं और तीन पुरुषों समेत आठ लोगों की जान चली गई पुलिस ने हादसे की पुष्टि की है ।
प्रारंभिक जानकारी के अनुसार श्रद्धालु परिवार पहले उज्जैन पहुंचा था और वहां से किराये की कार लेकर नलखेड़ा स्थित प्रसिद्ध मां बगलामुखी मंदिर आया था । मंदिर में दर्शन और हवन पूजन के बाद रात में लौटते समय कार बरसाती नाले के तेज बहाव की चपेट में आ गई । पानी का बहाव इतना तेज था कि कार को संभालने का मौका ही नहीं मिला और सभी आठ लोग पानी में समा गए।
“रात भर किसी को पता नहीं चला, सुबह हुई जानकारी”
हादसे के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि इतनी बड़ी घटना का रात में किसी को पता क्यों नहीं चला । स्थानीय जानकारी के अनुसार कार रात में नाले में बह गई और सुबह स्थानीय लोगों की नजर नाले में फंसे वाहन पर पड़ी, जिसके बाद पुलिस-प्रशासन और बचाव दल मौके पर पहुंचा और शवों को बाहर निकाला गया इस पूरे समय-क्रम की आधिकारिक पुष्टि प्रशासन द्वारा की जा रही है । पिछले 24 घंटों में क्षेत्र में भारी बारिश हुई थी, जिससे नाले का जलस्तर अचानक बढ़ गया था । मंदिर मार्ग पर बरसाती नाला और उस पर बनी छोटी पुलिया हमेशा से जोखिम वाली रही है।
“व्यवस्था पर सवाल – क्या था कोई बैरिकेड, चेतावनी बोर्ड या सुरक्षाकर्मी” ?
इसी बिंदु पर अब प्रशासन की सुरक्षा व्यवस्था सवालों के घेरे में है । तेज बारिश और उफनते नाले के दौरान क्या श्रद्धालुओं के आवागमन को रोकने के लिए मार्ग पर बैरिकेडिंग,चेतावनी बोर्ड, प्रकाश व्यवस्था या रात्रि कालीन सुरक्षाकर्मी तैनात थे ? यदि व्यवस्था थी तो वह प्रभावी क्यों नहीं रही और यदि नहीं थी तो देशभर से हजारों श्रद्धालुओं के आने वाले इस विश्वप्रसिद्ध धार्मिक स्थल पर ऐसी व्यवस्था क्यों नहीं की गई ?
बाहर से आए श्रद्धालु नाले की प्रकृति से अनजान थे। ऐसे में प्रशासन, मंदिर प्रबंधन और स्थानीय स्तर पर अनुष्ठान कराने वाले व्यक्तियों की यह जिम्मेदारी बनती है कि श्रद्धालुओं को जोखिम की जानकारी समय रहते दी जाए । क्या कार चालक को नाला पार करने से रोकने के लिए कोई संकेत या सुरक्षाकर्मी मौजूद था,इसकी जांच अब आवश्यक हो गई है।
“यज्ञ-हवन के समय को लेकर भी जांच की मांग”
स्थानीय चर्चा में यह बात भी सामने आ रही है कि परिवार ने मंदिर में यज्ञ-हवन कराया था । किस प्रकार का अनुष्ठान हुआ,उसका समय क्या था और रात में मंदिर से निकलने वाले श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए क्या इंतजाम थे,इन सभी बिंदुओं की जांच रिकॉर्ड और जिम्मेदार व्यक्तियों से की जानी चाहिए । मिर्ची यज्ञ को लेकर लग रहे प्रतिबंध के दावों की फिलहाल आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, इसलिए इस पर कोई निष्कर्ष आधिकारिक आदेश के बाद ही निकाला जाना चाहिए ।
यह हादसा केवल एक परिवार की त्रासदी नहीं,बल्कि भविष्य की सुरक्षा व्यवस्था के लिए चेतावनी है । विश्वप्रसिद्ध मंदिर के आसपास जलभराव वाले खतरनाक स्थानों की पहचान,चेतावनी बोर्ड, बैरिकेडिंग, सीसीटीवी, रात्रिकालीन सुरक्षा दल और आपातकालीन प्रतिक्रिया प्रणाली की समीक्षा अब बेहद जरूरी हो गई है ।
हादसे के बाद मौके पर पहुंचे कलेक्टर और एसपी के सामने स्थानीय लोगों द्वारा नाराजगी जताने की भी खबर है । फिलहाल पुलिस ने मर्ग कायम कर मृतकों की पहचान और पोस्टमार्टम की कार्रवाई शुरू कर दी है, वहीं प्रशासन ने पूरे मामले की जांच के आदेश दिए हैं ।










