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कागजी रिकॉर्ड में गोचर, धरातल पर लाठियां माचलपुर में बेसहारा गौवंश की दुर्दशा !

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कलेक्टर के आदेश बेअसर रसूखदारों के कब्जें में चरनोई भूमि,रात के अंधेरे में ग्रामीण भी नगर में छोड़ रहे पशु भटकते बेजुबान खा रहे पॉलीथिन ।

 घनश्याम शर्मा माचलपुर 

 राजगढ़ / माचलपुर :- “गौ-सेवा” के दावों और प्रशासनिक तंत्र की संवेदनशीलता माचलपुर में पूरी तरह दम तोड़ चुकी है । जिला कलेक्टर द्वारा सड़कों को पशुमुक्त करने के कड़े निर्देश स्थानीय स्तर पर पूरी तरह बेअसर साबित हो रहे हैं आदेशों को दरकिनार कर आज भी नगर की मुख्य सड़कों से लेकर तंग गलियों में भी बेसहारा गौवंश का जमावड़ा लगा हुआ है,जिससे दावों और हकीकत का अंतर साफ उजागर होता है । इस दुर्दशा की सबसे बड़ी वजह गौवंश के हिस्से की जमीन पर हुआ डाका है,राजस्व के रिकॉर्ड में पशुओं के लिए एकड़ के हिसाब से ‘चरनोई’ (गोचर) भूमि दर्ज है, लेकिन धरातल पर इन बेजुबानों को खड़े रहने के लिए एक फीट जमीन भी नसीब नहीं है आखिर इनके हक की भूमि कह गई ? इस जमीन को अपने पूर्वजों की जागीर मानकर बेखौफ खेती शुरू कर दी है और जिम्मेदार राजस्व विभाग हाथ पर हाथ धरे बैठा है । प्रशासन को तो सिर्फ ठेला गुमटी वाले उन गरीबों का अतिक्रमण दिखाई देता जो अपने बच्चों का पेट भरते है।

“दर-दर की ठोकरें और लाठियों का साया रात के अंधेरे में ग्रामीण भी छोड़ जाते पशु”

गोचर भूमि खत्म होने के कारण जब ये बेजुबान भूख मिटाने खेतों या रिहायशी इलाकों की तरफ जाते हैं, तो लोग इन्हें बेरहमी से लाठी डंडों से पीटकर भगाते हैं । एक रोटी की आस में घरों के दरवाजों पर टक टकी लगाए खड़े रहने वाले इन पशुओं को केवल दुत्कार मिल रही है पेट भरने का कोई साधन न होने से ये कचरे के ढेरों पर पॉलीथिन कागज आदि चबाने को मजबूर है ।

माचलपुर के लिए एक और बड़ी मुसीबत यह है कि आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों के लोग भी अपने अनुपयोगी पशुओं को रात के अंधेरे में चुपचाप नगर की सीमाओं में छोड़ जाते हैं । ग्राम पंचायतों में लाखों-करोड़ों की लागत से बनी सरकारी गौशालाएं केवल बजट ठिकाने लगाने का माध्यम बनकर रह गई हैं पंचायतों की इस नाकामी का खामियाजा अब पूरे माचलपुर नगर को भुगतना पड़ रहा है और सड़कों पर हादसों का ग्राफ तेजी से बढ़ रहा है ।

“जनता की दो टूक मांग प्रशासन को उठाने होंगे ये कदम”

नगर के सजग नागरिकों और गौ-सेवकों का कहना है कि केवल कागजी निर्देश जारी करने से हालात नहीं बदलेंगे। जिला प्रशासन को तुरंत ये दो कड़े कदम उठाने होंगे जिसमें

1. चरनोई भूमि को मुक्त कराई जावे : पटवारी और तहसीलदार की टीम भेजकर दर्ज चरनोई भूमि की पैमाइश की जाए । अवैध कब्जा कर खेती करने वाले रसूखदारों पर कानूनी कार्रवाई कर जमीन खाली कराई जाए ।
2. गौशालाओं का औचक निरीक्षण हो: जिला पंचायत सीईओ ग्रामीण क्षेत्रों की गौशालाओं का औचक निरीक्षण करें। कागजों पर चल रही गौशालाओं की सच्चाई जांचकर, उनकी क्षमता के अनुसार शत-प्रतिशत गौवंश को उनमें शिफ्ट कराया जाए ।

Khushi Samvad
Author: Khushi Samvad

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