
पलक-पावड़े बिछाकर अगवानी,श्रद्धालुओं ने घरों के सामने पूजे बाबा के चरण, फूलों से महकीं सड़कें ।
घनश्याम शर्मा माचलपुर
राजगढ़ / माचलपुर:- सावन मास की पूर्णता पर अंचल के आराध्य स्वयंभू श्री गुप्तनाथ महादेव और श्री बिल्लेश्वर महादेव अपनी प्रजा का हाल जानने राजसी ठाठ-बाठ के साथ नगर भ्रमण पर निकले । इस भव्य शाही सवारी का सबसे मुख्य और आध्यात्मिक केंद्र बाजार चौक स्थित राधा-कृष्ण मंदिर के सम्मुख रहा,जहां दोनों महादेव (हर) का मिलन साक्षात भगवान विष्णु स्वरूप श्री राधा-कृष्ण (हरि) से हुआ । इस अलौकिक ‘हरि-हर मिलन’ के साक्षी बनने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की आंखें श्रद्धा से झुक गईं ।
शास्त्रों और सनातन परंपरा के अनुसार, ‘हरि’ (भगवान विष्णु/कृष्ण) और ‘हर’ (भगवान शिव) दोनों एक ही परम सत्ता के दो रूप हैं । शिवपुराण और श्रीमद्भागवत महापुराण में उल्लेख है कि “शिवाय विष्णु रूपाय, विष्णवे शिव रूपाय” अर्थात शिव ही विष्णु हैं और विष्णु ही शिव हैं जब महादेव नगर भ्रमण पर निकलते हैं और श्री राधा कृष्ण मंदिर के सम्मुख पहुंचते हैं तो यह मिलन ब्रह्मांड की दो सर्वोच्च शक्तियों के एकाकार होने और सृष्टि के संतुलन व कल्याण का प्रतीक माना जाता है । शास्त्रों के अनुसार, इस महामिलन के दर्शन मात्र से मनुष्य के समस्त पाप नष्ट हो जाते हैं और सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है ।
सवारी का सबसे मुख्य और अनूठा आकर्षण बिल्लेश्वर भक्त मंडल के युवा रहे । मंडल के सभी युवा पारंपरिक और आकर्षक धोती पोशाक पहने हुए थे,जो भारतीय संस्कृति की अनुपम छटा बिखेर रहे थे ये युवा हाथों में डमरू और मजीरे लेकर बाबा के भजनों पर उन्हें बजाते और गाते हुए पूरे उत्साह के साथ चल रहे थे। डमरू की डम-डम और मजीरे की खनक से पूरा माहौल शिवमय हो गया वहीं दूसरी ओर,सवारी में शामिल आधुनिक डीजे की गगनभेदी धुन पर बाबा के भक्त और युवा पूरी तरह थिरकते और झूमते हुए आगे बढ़ रहे थे ।
“पग-पग पर पूजा,पुष्पवर्षा और जलपान की संपूर्ण व्यवस्था”
शाही सवारी जिधर से भी गुजरी,श्रद्धालुओं ने पलक पावड़े बिछाकर बाबा का स्वागत किया । नगरवासियों ने अपने-अपने घरों के सामने चौक पूरकर, रंगोली सजाई और पालकी के रुकते ही बाबा की कपूर व दीपकों से श्रद्धापूर्वक महाआरती और पूजा-अर्चना की। व्यापारिक संगठनों और सामाजिक संस्थाओं द्वारा पूरी सवारी मार्ग पर क्विंटलों फूलों से पुष्पवर्षा की गई, जिससे पूरी माचलपुर नगरी सुगंधित हो उठी । दूर-दराज से आए श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए पूरे सवारी मार्ग पर जगह जगह स्वैच्छिक संगठनों द्वारा शुद्ध पेयजल, फलाहारी स्वल्पाहार और जलपान की संपूर्ण व्यवस्था की गई थी ।
इस वर्ष की सवारी में भक्ति और आधुनिकता का अनूठा संगम देखने को मिला । सवारी के साथ कई भव्य और सजीव चलित झांकियां चल रही थीं इनमें सबसे विशेष आकर्षण भगवान शिव के प्रमुख द्वादश ज्योतिर्लिंगों में से कुछ ज्योतिर्लिंगों चलित झांकियां थीं, जिन्हें देखकर ऐसा प्रतीत हो रहा था मानो साक्षात सारे तीर्थ माचलपुर की धरा पर उतर आए हों । पूरे नगर का भ्रमण करने और प्रजा को आशीर्वाद देने के बाद बाबा गुप्तनाथ और बिल्लेश्वर महादेव की शाही सवारी पुनः अपने मूल स्थान (मंदिर प्रांगण) पहुंची । यहां देर रात भगवान का विशेष श्रृंगार कर भव्य महाआरती उतारी गई इसके बाद उपस्थित बड़ी संख्या में भक्तों और श्रद्धालुओं के बीच महाप्रसाद का वितरण किया गया, जिसके साथ ही इस ऐतिहासिक धार्मिक उत्सव का गरिमामय समापन हुआ।










