लापरवाही और वित्तीय गड़बड़ी पर गिरी गाज, 6 साल के लिए चुनाव लड़ने पर रोक,चांदपुरा में दिवंगत सचिव के वारिसों से होगी1.06 लाख रु की वसूली ।
घनश्याम शर्मा माचलपुर
राजगढ़ / माचलपुर :- पंचायतों में सरकारी बजट को अपनी जागीर समझने वाले जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों के खिलाफ राजगढ़ जिला पंचायत ने अब तक की सबसे बड़ी दंडात्मक कार्रवाई की है । न्यायालय मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत डॉ. इच्छित गढ़पाले ने मध्यप्रदेश पंचायत राज एवं ग्राम स्वराज अधिनियम 1993 की धारा 89/92 के तहत कड़ा फैसला सुनाया है । वित्तीय अनियमितता और शासकीय धन के दुरुपयोग के गंभीर मामलों में 5 अलग-अलग ग्राम पंचायतों के सरपंचों/पूर्व सरपंचों को 6 वर्ष की अवधि के लिए अयोग्य (चुनाव के लिए अयोग्य) घोषित कर दिया गया है साथ ही दोषियों से लाखों रुपये की वसूली के आदेश जारी किए गए हैं ।
“जीरापुर की भण्डावद पंचायत बना भ्रष्टाचार का केंद्र, रु 21.92 लाख की वसूली”
इस पूरी कार्रवाई का मुख्य केंद्र जनपद पंचायत जीरापुर की ग्राम पंचायत भण्डावद रही, जहाँ विकास कार्यों के नाम पर ₹21,92,692 का भारी वित्तीय घोटाला उजागर हुआ है
सरपंच 6 साल के लिए बाहर: जिला पंचायत न्यायालय ने दोष सिद्ध होने पर भण्डावद की वर्तमान सरपंच श्रीमती मंजूबाई राठौर को तत्काल प्रभाव से 6 वर्ष के लिए अयोग्य घोषित कर दिया है । उन पर ₹10,96,346 की निजी वसूली निकाली गई है।
सचिव पर भी गिरेगी गाज: तत्कालीन सचिव श्रीलाल सिसोदिया पर भी समानुपातिक रूप से ₹10,96,346 की वसूली अधिरोपित की गई है । सचिव के खिलाफ विभागीय अनुशासनात्मक कार्रवाई के लिए सीईओ जीरापुर और कार्यपालन यंत्री को कड़े निर्देश जारी किए गए हैं ।
“चांदपुरा में अनोखा मामला: दिवंगत सचिव के वारिस भुगतेंगे खामियाजा”
जनपद पंचायत खिलचीपुर की ग्राम पंचायत चांदपुरा में राजीव गांधी सेवा केन्द्र निर्माण में ₹2,12,080 का गबन पाया गया । यहाँ पूर्व सरपंच श्रीमती शैतानबाई को 6 साल के लिए अयोग्य कर ₹1,06,040 की वसूली तय की गई है । वहीं, तत्कालीन सचिव श्री मदनलाल की मृत्यु हो चुकी है,जिसके कारण प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाते हुए उनके हिस्से की आधी राशि ₹1,06,040 की रिकवरी उनके उत्तराधिकारियों से भू-राजस्व के बकाए की तरह करने के निर्देश दिए हैं।
जिला पंचायत सीईओ के न्यायालय ने जनपद पंचायत सारंगपुर की तीन पंचायतों में भी जांच के बाद सजा मुकर्रर की है । इन तीनों मामलों में खास बात यह रही कि जांच और केस दर्ज होने के डर से काम तो पूरे करा दिए गए, लेकिन वित्तीय अनुशासनहीनता के कारण सरपंच अपनी कुर्सी और भविष्य नहीं बचा सके:
ग्राम पंचायत टिकोद : राजीव गांधी सेवा केन्द्र मामले में ₹2,23,659 की राशि का कार्य तो पूरा करा लिया गया, लेकिन वित्तीय अनियमितता और घोर लापरवाही के चलते पूर्व सरपंच श्री जगदीश को 6 साल के लिए अयोग्य कर दिया गया ।
ग्राम पंचायत रायपुरिया: यहाँ सीसी रोड के नाम पर ₹1,96,000 की राशि का एडवांस आहरण कर लिया गया था लेकिन काम नहीं कराया गया । एफआईआर/प्रकरण दर्ज होने के बाद काम पूरा हुआ । पूर्व सरपंच जगदीश पिता भेरूलाल को 6 साल के लिए अयोग्य घोषित किया गया ।
ग्राम पंचायत कांकरिया: अतिरिक्त कक्ष निर्माण में भी गड़बड़ी पाए जाने और प्रकरण दर्ज होने के बाद काम कराया गया । वित्तीय अनियमितता साबित होने पर पूर्व सरपंच श्री दुर्गाप्रसाद मालवीय को 6 वर्ष की अवधि के लिए अयोग्य घोषित किया गया ।
“पारदर्शिता से समझौता नहीं”
“पंचायतों में शासकीय राशि के उपयोग में वित्तीय अनुशासन, पारदर्शिता एवं जवाबदेही सुनिश्चित करना प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है । सरकारी धन का दुरुपयोग या कर्तव्यों में लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। संबंधितों के विरुद्ध ऐसी सख्त दंडात्मक कार्रवाई आगे भी निरंतर जारी रहेगी।”
— डॉ. इच्छित गढ़पाले, मुख्य कार्यपालन अधिकारी, जिला पंचायत राजगढ़










