
कलेक्टर डॉ. गिरीश कुमार मिश्रा के निर्देश पर संयुक्त टीम का औचक निरीक्षण,राजगढ़ जिले को बाल श्रम मुक्त बनाने का अभियान तेज,दोषी संचालक पर मामला दर्ज ।
घनश्याम शर्मा माचलपुर
राजगढ़ / माचलपुर :- जिले को बाल श्रम मुक्त बनाने के उद्देश्य से जिला प्रशासन एवं कलेक्टर डॉ. गिरीश कुमार मिश्रा के मार्गदर्शन में बाल श्रम के विरुद्ध एक विशेष अभियान निरंतर संचालित किया जा रहा है । इसी क्रम में श्रम विभाग, पुलिस विभाग एवं अहिंसा वेलफेयर सोसायटी की संयुक्त टीम द्वारा ब्यावरा नगर के विभिन्न प्रतिष्ठानों एवं कार्यस्थलों का औचक निरीक्षण किया गया ।
निरीक्षण के दौरान पुरानी नगर पालिका कॉम्प्लेक्स स्थित मां कालका ऑटो गैरेज में एक 13 वर्षीय बालक को खतरनाक माहौल में कार्य करते हुए पाया गया । संयुक्त टीम ने तत्काल कार्रवाई करते हुए बाल श्रमिक को कार्यस्थल से मुक्त कराया आवश्यक प्रशासनिक और कागजी प्रक्रिया पूर्ण करने के बाद बालक को बाल कल्याण समिति के समक्ष प्रस्तुत किया गया । समिति द्वारा अब बच्चे के संरक्षण,उचित देखभाल एवं पुनर्वास के संबंध में नियमानुसार आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं ।
“दोषी संचालक पर कानूनी शिकंजा”
इस मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए प्रशासन ने स्थापना संचालक के विरुद्ध बाल एवं किशोर श्रम (प्रतिषेध एवं विनियमन) अधिनियम, 1986 के सख्त प्रावधानों के अंतर्गत प्रकरण पंजीबद्ध कर वैधानिक कार्रवाई शुरू कर दी है । निरीक्षण के दौरान टीम ने क्षेत्र के अन्य प्रतिष्ठान संचालकों को भी बाल श्रम से जुड़े कड़े कानूनों की जानकारी दी साथ ही स्पष्ट निर्देश दिए कि किसी भी बच्चे को रोजगार अथवा श्रम में नियोजित न किया जाए ।
“कलेक्टर की अपील,बाल श्रम दिखे तो तुरंत दें सूचना”
कलेक्टर डॉ. मिश्रा ने विभागीय अधिकारियों को निर्देशित किया है कि जिले में यह अभियान बिना किसी ढिलाई के निरंतर संचालित किया जाए । उन्होंने स्पष्ट किया कि बाल श्रम बच्चों की शिक्षा,स्वास्थ्य और सर्वांगीण विकास में सबसे बड़ी बाधा है, इसलिए राजगढ़ को बाल श्रम मुक्त बनाना प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है ।
कलेक्टर ने आम नागरिकों, व्यापारियों और प्रतिष्ठान संचालकों से भावुक अपील करते हुए कहा कि बच्चों के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए उन्हें काम पर न रखें । यदि किसी भी नागरिक को जिले में कहीं भी बाल श्रम की जानकारी मिलती है,तो वे तत्काल इसकी सूचना संबंधित विभाग अथवा प्रशासन को दें,ताकि बच्चों का संरक्षण और पुनर्वास सुनिश्चित किया जा सके ।










