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तारीख पे तारीख देने वाले बाबू तैनात,पर न्याय करने वाले साहब गायब,जिले की सबसे बड़ी उप-तहसील में तारीख पर तारीख देने का खेल,कब थमेगा ?

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क्या सिर्फ चक्कर काटने के लिए बने हैं ग्रामीण ? घोर प्रशासनिक लापरवाही के बीच फूटा ग्रामीणों के सब्र का बांध, राजगढ़ कलेक्टर से दखल की मांग ।

 घनश्याम शर्मा माचलपुर 

 राजगढ़ / माचलपुर :- जिले की सबसे बड़ी उप-तहसीलों में शुमार माचलपुर इन दिनों प्रशासनिक अव्यवस्था, घोर लापरवाही और अधिकारियों की कमी के चलते फरियादियों के लिए परेशानी का सबब बन चुकी है । आलम यह है कि सोमवार को जहाँ पूरा कार्यालय एक अदद चौकीदार के भरोसे नजर आया था, वहीं मंगलवार को राजस्व प्रकरणों में पेशी की तारीख पर पहुंचे ग्रामीणों को अधिकारी के न होने से बिना सुनवाई के बैरंग लौटना पड़ा । दूर-दराज के गांवों से समय और पैसा खर्च कर पहुंच रहे ग्रामीण अब खुद को ठगा सा महसूस कर रहे हैं ।

“प्रभार” के चक्रव्यूह में फंसी जनता की सुनवाई”

माचलपुर उप-तहसील का नियमित प्रभार जीरापुर तहसीलदार मनोज वर्मा के पास है । एक ही अधिकारी के पास दो बड़े क्षेत्रों की जिम्मेदारी होने का सीधा असर यहाँ के राजस्व मामलों की सुनवाई पर पड़ रहा है । मंगलवार को अपनी पेशी के लिए पहुंचे गोवर्धन दांगी भगोरा,गिरवर सिंह,प्रभुलाल सहित दर्जनों ग्रामीणों का दर्द छलक उठा ग्रामीणों का कहना था कि राजस्व मामले पहले ही बहुत जटिल और लंबे खिंचते हैं । उस पर भी जब विभाग खुद लिखित में पेशी की तारीख तय करता है, तो उस दिन सुनवाई की गारंटी क्यों नहीं होती ? अधिकारी के न मिलने से ग्रामीणों को केवल अगली तारीख का फरमान थमा दिया जाता है ।

“एसडीएम की दलील,कोर्ट केस के कारण बाहर हैं तहसीलदार”

इस प्रशासनिक अव्यवस्था को लेकर जब जीरापुर एसडीएम ज्योति राजोरे से बात की गई, तो उन्होंने अपनी मजबूरियां गिनाईं । एसडीएम ने बताया कि तहसीलदार एक कोर्ट प्रकरण (अदालती मामले) के सिलसिले में छतरपुर गए हुए हैं । उन्होंने दावा किया कि वैकल्पिक व्यवस्था के तौर पर माचलपुर कार्यालय में दो कर्मचारियों को बैठाया गया है, जो आवेदकों को अगली तारीख देने सहित अन्य जरूरी बुनियादी कागजी कार्य देख रहे हैं ।

“सुलगते सवाल तारीख तय करने वाले ही सुनवाई से क्यों कतरा रहे” ?

प्रशासन भले ही कर्मचारियों को बैठाकर अपनी पीठ थपथपा ले,लेकिन जमीनी हकीकत पर कई तीखे सवाल खड़े होते हैं :

1. जवाबदेही किसकी ? जब राजस्व विभाग खुद पेशी की तारीख मुकर्रर करता है, तो उस दिन अधिकारी की मौजूदगी सुनिश्चित करना किसकी जिम्मेदारी है ?
2. गरीब ग्रामीणों के नुकसान की भरपाई कौन करेगा ? पेट काटकर,मजदूरी छोड़कर और किराया लगाकर आने वाले ग्रामीणों को सिर्फ ‘अगली तारीख’ थमाना कहाँ का न्याय है ?
3. क्या सिर्फ तारीख देना ही समाधान है ? बाबू सिर्फ तारीख आगे बढ़ा सकते हैं, लेकिन ग्रामीणों की समस्याओं का निपटारा और न्याय तो केवल सक्षम अधिकारी ही कर सकता है । ऐसे में दफ्तर सिर्फ ‘डेट’ देने का केंद्र क्यों बनकर रह गया है ?
“आक्रोशित ग्रामीणों की एक ही मांग— स्थायी अधिकारी दो !
माचलपुर और आसपास के पूरे ग्रामीण अंचल में इस प्रशासनिक ढर्रे को लेकर भारी आक्रोश है । क्षेत्र की जनता ने अब शासन-प्रशासन से दोटूक मांग की है कि माचलपुर उप-तहसील में नियमित रूप से नायब तहसीलदार अथवा तहसीलदार स्तर के स्थायी अधिकारी की नियुक्ति की जाए। ग्रामीणों का कहना है कि जब तक यहाँ स्थायी अधिकारी की टेबल नहीं लगेगी, तब तक लोगों को माचलपुर और जीरापुर के चक्कर काटने से मुक्ति नहीं मिलेगी और यह दफ्तर महज एक ‘तारीख केंद्र’ बनकर रह जाएगा।

Khushi Samvad
Author: Khushi Samvad

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