दावे सुशासन के,हकीकत राम भरोसे महीनों से खाली है नायब तहसीलदार की कुर्सी क्लर्क भी गायब,हफ्ते में सिर्फ एक दिन ‘मंगलवार’ को दर्शन देते हैं प्रभारी साहब ।
घनश्याम शर्मा माचलपुर
राजगढ़ / माचलपुर :- मध्य प्रदेश सरकार इन दिनों सूबे में सुशासन का ढोल पीटते हुए बड़े जोर-शोर से ‘मुख्यमंत्री जनविश्वास अभियान’ चला रही है । विज्ञापनों और दावों की मानें तो सरकार खुद चलकर ‘जनता के द्वार’ पहुँच रही है और उनकी समस्याओं का ऑन-द-स्पॉट निपटारा कर रही है लेकिन सरकार के इस तथाकथित ‘जनविश्वास’ की हवा माचलपुर के उप-तहसील (टप्पा) कार्यालय में आकर पूरी तरह निकल जाती है । यहाँ ‘जनविश्वास’ का कम और जनता के साथ ‘विश्वासघात’ का तमाशा ज़्यादा देखने को मिल रहा है, जहां जनता प्रशासन के द्वार जाकर खाली हाथ आ रही है,क्योंकि लाखों की लागत से बना यह सरकारी दफ्तर हफ़्तों से केवल एक चौकीदार के भरोसे सांसें ले रहा है ।
साहबों के इस रवैये को देखकर क्षेत्र के परेशान किसान और ग्रामीण पूछ रहे हैं कि—”मुख्यमंत्री जी ! जब आपके दफ्तरों के ताले कुर्सी के दर्शन करने को खुलते है और कुर्सियां धूल खा रही हो, तो यह कैसा जनविश्वास अभियान” ?
“साहब सिर्फ ‘मंगलवार’ के मेहमान, बाकी समय दफ्तर में पसरा सन्नाटा”
अभियान के तहत आला अधिकारी भले ही जनता से सीधे संवाद का दावा कर रहे हों,लेकिन माचलपुर टप्पा कार्यालय में महीनों से नायब तहसीलदार की कुर्सी खाली पड़ी है । जीरापुर तहसीलदार सुनील वर्मा को यहाँ का प्रभार सौंपकर वरिष्ठ अधिकारियों ने अपने कर्तव्यों की इतिश्री कर ली है साहब केवल ‘मंगलवार दोपहर’ को कुछ घंटों के लिए यहाँ दर्शन देते हैं—जैसे कोई साप्ताहिक हाट करने आए हो । रही-सही कसर दो क्लर्कों सुनील वर्मा और उमेश शर्मा को जीरापुर अटैच करके पूरी कर दी गई । अब दफ्तर में केवल एक चौकीदार की ड्यूटी बच गई है,जो कुर्सियों से धूल साफ करने और ताला खोलने-बंद करने के अलावा कुछ नहीं कर सकता ।
“साहब का ‘घिसा-पिटा’ जवाब” (अफसरशाही का चश्मा)
“जीरापुर तहसीलदार दो दिन माचलपुर बैठते हैं और वहां रहते हुए भी यहाँ का काम देखते हैं। यह सच है कि अभी वहाँ कोई स्टाफ नियुक्त नहीं है, पर जल्द ही किसी कर्मचारी को माचलपुर भेजेंगे” — ज्योति राजोरे, एसडीएम, खिलचीपुर
सोचने वाली बात यह है कि जब मुख्यमंत्री जनविश्वास अभियान के दौर में भी जनता को ‘अस्थायी व्यवस्था’ और ‘जुगाड़’ के भरोसे छोड़ा जा रहा है,तो ऑन-द-स्पॉट काम कैसे होंगे ?
“जनता का तीखा सवाल, फाइलों पर सुशासन या जमीनी हकीकत” ?
सोमवार को अपनी जेब से किराया फूंककर दफ्तर पहुंचे ग्रामीण मुकेश राठौर, राजेंद्र सिंह पंवार और गंगाराम मालवीय का गुस्सा सातवें आसमान पर था । उन्होंने अपना दर्द बयां करते हुए कहा, “सरकार टीवी और अखबारों में बड़े-बड़े दावे कर रही है, लेकिन यहाँ नामांतरण सीमांकन और जाति प्रमाण-पत्र जैसे जरूरी कामों के लिए हमें हफ़्तों से एड़ियां घिसनी पड़ रही हैं हमारा समय और पैसा दोनों पानी की तरह बह रहा है” ।
स्थानीय जनता ने अब साफ चेतावनी दी है कि उन्हें शासन-प्रशासन के कागजी अभियान या ‘हफ्ते में दो दिन वाला’ लॉलीपॉप नहीं चाहिए। क्षेत्रवासियों की पुरजोर मांग है कि माचलपुर में स्थायी नायब तहसीलदार और पूरे स्टाफ की तत्काल नियुक्ति की जाए, वर्ना इस कागजी घोड़े को दौड़ाने वाले दफ्तर पर ताला जड़ देना ही बेहतर होगा ।










