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माचलपुर में लोधा (लववंशी) क्षत्रिय समाज ने धूमधाम से मनाई भगवान लव-कुश जयंती,भव्य चल समारोह निकला गया !

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डीजे की धुन और भक्ति गीतों के बीच नगर में हुआ भव्य स्वागत,समाज के प्रबुद्ध जनों ने कुप्रथाओं को त्यागकर समाज हित में एकजुट होने का किया आह्वान ।

घनश्याम शर्मा माचलपुर

माचलपुर :- स्थानीय नगर में लोधा (लववंशी) क्षत्रिय समाज द्वारा अपने आराध्य देव भगवान लव-कुश की जयंती अत्यंत हर्षोल्लास, श्रद्धा और ओजस्वी वातावरण में मनाई गई इस पावन अवसर पर समाज की अटूट एकता और अनूठा उत्साह देखने को मिला ।

जयंती महोत्सव के उपलक्ष्य में एक चल समारोह का आयोजन किया गया यह चल समारोह चाठा कुंडी बालाजी मंदिर से विधि-विधान से पूजा-अर्चना के बाद प्रारंभ हुआ । इस शोभायात्रा में समाज के बुजुर्ग, युवा, महिलाएं और नन्हे-मुन्ने बच्चे बड़ी संख्या में पारंपरिक वेशभूषा में शामिल हुए चल समारोह में विशेष रूप से समाज की महिलाएं और बालिकाएं अपने सिर पर मंगल कलश धारण कर कदम से कदम मिलाकर चल रही थीं साथ ही डीजे की थाप पर गूंज रहे भक्ति गीतों की धुन ने पूरे माहौल को धर्ममय बना दिया, जिस पर युवा जमकर थिरके हाथ ध्वज पताका लिए चल रहे थे ।

चल समारोह का मुख्य आकर्षण रथ पर सजी भगवान लव-कुश और माता सीता की आकर्षक चलित झांकी थी, झांकी में बच्चों द्वारा निभाए गए लव-कुश और माता सीता के जीवंत पात्रों ने सभी का मन मोह लिया वही भगवान का विमान भी साथ था । यह जुलूस बालाजी मंदिर से प्रारंभ होकर नगर के विभिन्न प्रमुख मार्गों से निकला,जहां नगरवासियों ने पलक-पावड़े बिछाकर जगह-जगह पुष्पवर्षा कर यात्रा का आत्मीय स्वागत किया और जल पान फलाहार करवाया इसके बाद चल समारोह देव गुलाब गार्डन पहुंचा ।

“पूजा-अर्चना और सामाजिक कुप्रथाओं को दूर करने का संकल्प”

देव गुलाब गार्डन पहुंचने पर उपस्थित समाज जनों द्वारा भगवान लव-कुश और माता सीता के स्वरूपों की विधि विधान से पूजा-अर्चना कर महाआरती की गई।। आरती के पश्चात समाज की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित हुई,जिसमें समाज हित के कई अहम मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की गई । वक्ताओं ने समाज में व्याप्त रूढ़िवादी कुप्रथाओं और फिजूलखर्ची को दूर करने पर विशेष बल दिया इसके साथ ही समाज को सशक्त बनाने के लिए शिक्षा का प्रसार करने, युवाओं को व्यसनों से दूर रखने और सामाजिक एकता को मजबूत करने जैसे समाज हित के विचारों को साझा किया गया ।

कार्यक्रम के दौरान मंच से समाज के वक्ताओं ने इतिहास और पूर्वजों के गौरव को याद करते हुए सीधे दिल को छू जाने वाली ये पंक्तियां कहीं :

“रगों में जिनकी मर्यादा पुरुषोत्तम का रक्त बहता है,
जिनका शौर्य महर्षि वाल्मीकि के आश्रम से कहता है,
अश्वमेध का घोड़ा रोक दे, वो पराक्रम हमारी पहचान है,
हम ‘लववंशी लोधा’ हैं, स्वाभिमान ही हमारी जान है।”

इन ओजस्वी पंक्तियों के गूंजते ही पूरा प्रांगण “जय लवधेश्वर” और “जय श्रीराम” के गगनभेदी नारों से गुंजायमान हो उठा। मंच से समाज के वरिष्ठ जनों ने संदेश देते हुए कहा कि हम उस महान वंश के वंशज हैं जिसका इतिहास महर्षि वाल्मीकि के आश्रम से शुरू होकर अयोध्या के राजसिंहासन तक जाता है। आज का दिन केवल उत्सव मनाने का नहीं, बल्कि समाज में संस्कार, शिक्षा और संगठन की अलख जगाने का है। अंत में भगवान की महाआरती के बाद उपस्थित सभी श्रद्धालुओं को महाप्रसाद का वितरण किया गया  इस सफल और भव्य आयोजन के लिए समाज के पदाधिकारियों ने सभी सहयोगियों, मातृशक्ति और नगरवासियों का आभार व्यक्त किया ।

Khushi Samvad
Author: Khushi Samvad

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