घरेलू हिंसा पीड़ित महिलाओं को मिला सुरक्षित भविष्य का भरोसा,उपहार पाकर खिल उठे बेसहारा बच्चों के चेहरे
जिला ब्यूरो घनश्याम शर्मा
राजगढ़ / माचलपुर :- रक्षाबंधन का पावन पर्व अमूमन हर घर में खुशियाँ लेकर आता है,लेकिन इस बार जिला प्रशासन की एक अनूठी और संवेदनशील पहल ने उन जिंदगियों में भी त्योहार की उमंग भर दी, जिन्हें विपरीत परिस्थितियों ने अपनों से दूर कर दिया था । महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा संचालित शक्ति सदन (स्वधार गृह) गोपाल महिला मंडल में इस बार रक्षाबंधन का पर्व पारंपरिक औपचारिकताओं से परे,आत्मीयता और पारिवारिक गरिमा के साथ मनाया गया ।अवसर था जिले के संवेदनशील मुखिया कलेक्टर डॉ.गिरीश कुमार मिश्रा ने शक्ति सदन में आश्रय प्राप्त घरेलू हिंसा से पीड़ित महिलाओं के बीच पहुँचकर उनसे आत्मीय संवाद किया और उनकी कुशलक्षेम जानी । इस भावुक क्षण में जब महिलाओं ने कलेक्टर की कलाई पर रक्षासूत्र बांधा,तो डॉ. मिश्रा ने भी एक बड़े भाई और प्रशासनिक अभिभावक की भूमिका निभाते हुए उन्हें केवल स्नेह और सम्मान ही नहीं दिया, बल्कि उनके सुरक्षित भविष्य, पुनर्वास और सामाजिक पुनरुत्थान का दृढ़ भरोसा दिलाया ।
“बच्चों के साथ बिताए पल, खिलखिला उठा सदन”
उत्सव का सबसे खूबसूरत नजारा तब देखने को मिला जब कलेक्टर डॉ.मिश्रा ने वहाँ रह रहे बेसहारा बच्चों के साथ समय बिताया । उन्होंने बच्चों को दुलारते हुए बेहद सहजता से उनकी बातें और नटखट किस्से सुने जब बच्चों के हाथों में रंग-बिरंगे उपहार और मिठाइयाँ आईं, तो उनके चेहरे मासूम मुस्कान से खिल उठे । कुछ ही देर में पूरा शक्ति सदन किसी सरकारी संस्थान की जगह एक खुशहाल संयुक्त परिवार जैसा नजर आने लगा, जहाँ प्रशासन और स्टाफ के लोग बच्चों के साथ खुशियाँ साझा कर रहे थे ।
“रक्षाबंधन केवल पर्व नहीं, सुरक्षा और जिम्मेदारी का संकल्प है”
इस आत्मीय आयोजन के दौरान कलेक्टर डॉ. गिरीश कुमार मिश्रा ने समाज को एक बड़ा संदेश देते हुए कहा, की “रक्षाबंधन केवल भाई-बहन के रिश्ते का पर्व नहीं है, बल्कि यह एक-दूसरे की सुरक्षा, सम्मान और जिम्मेदारी का संकल्प लेने का दिन है । समाज में कोई भी महिला खुद को अकेला या असहाय महसूस न करे और कोई भी बच्चा अपनत्व की छांव से वंचित न रहे, इसके लिए जिला प्रशासन पूरी संवेदनशीलता के साथ उनके साथ खड़ा है । उन्होंने आश्वस्त किया कि प्रशासन इन महिलाओं और बच्चों के बेहतर भविष्य के लिए निरंतर प्रयासरत रहेगा ।
इस गरिमामयी अवसर पर महिला एवं बाल विकास विभाग के वरिष्ठ अधिकारी, कर्मचारी और शक्ति सदन का समस्त स्टाफ उपस्थित रहा । आयोजन ने शहर और समाज को यह मर्मस्पर्शी संदेश दिया कि सच्चे उत्सव की पूर्णता और असली खुशी तभी संभव है, जब हम समाज के उन अंतिम छोर पर खड़े लोगों को भी गले लगाएं, जिन्हें जीवन के थपेड़ों ने कभी अकेला छोड़ दिया था। प्रशासन की इस मानवीय पहल की पूरे जिले में जमकर सराहना हो रही है ।










