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ब्यावरा में फिर खूनी साबित हुआ ‘मौत का टर्न, जनप्रतिनिधियों की चेतावनियों को ठेंगा दिखाने का खौफनाक अंजाम,बेंगलुरु के सायबर इंस्पेक्टर समेत 4 की मौत !

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खराब डिजाइन और ओवर स्पीडिंग बनी काल पुलिस स्टाफ सहित 12 लोग लहूलुहान,राजगढ़ एसपी और एसडीएम ने संभाला मोर्चा ।

घनश्याम शर्मा माचलपुर

ब्यावरा / राजगढ़ :- जिले के ब्यावरा में शुक्रवार सुबह एक दिल दहला देने वाला भीषण सड़क हादसा हो गया । यहाँ नेशनल हाईवे-52 पर ब्यावरा-इंदौर बायपास के ट्रायंगल ओवरब्रिज पर बने खतरनाक 90 डिग्री घुमावदार मोड़ पर एक तेज रफ्तार स्लीपर कोच बस नंबर NL 01 D 3436 अनियंत्रित होकर सेफ्टी वॉल से जा टकराई टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि बस के परखच्चे उड़ गए और ऊपरी केबिन व स्लीपर बर्थ में सो रहे यात्री शीशे टूटने के कारण पुल से करीब 20 फीट नीचे भोपाल रोड पर जा गिरे । इस खौफनाक हादसे में बेंगलुरु पुलिस के सायबर निरीक्षक (इंस्पेक्टर) समेत 4 लोगों की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई, जबकि पुलिस स्टाफ सहित 12 यात्री गंभीर रूप से घायल हैं ।

“आरोपी को पकड़ने जा रही थी बेंगलुरु सायबर सेल की टीम”
देहात पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार, बस लखनऊ से इंदौर की तरफ जा रही थी । बस में बेंगलुरु (कर्नाटक) के साउथ-ईस्ट सायबर क्राइम पुलिस स्टेशन की एक टीम सवार थी,जो उत्तर प्रदेश में एक मामले की जांच के बाद आरोपी की धरपकड़ के लिए इंदौर जा रही थी । सुबह का वक्त होने के कारण सभी यात्री गहरी नींद में थे और किसी को संभलने का मौका तक नहीं मिला घटना की गंभीरता को देखते हुए मंत्री नारायण सिंह पॉवर,राजगढ़ एसपी अमित तोलानी और एसडीएम गोविंद दुबे तुरंत बल सहित सिविल अस्पताल पहुंचे और घायलों के त्वरित उपचार के इंतजाम किए ।

पुलिस प्रशासन द्वारा हादसे में मृत सभी 4 व्यक्तियों के शवों की शिनाख्त कर ली गई है जिनमें :-
रवि के.बी. पिता बसप्पा, उम्र 45 साल पुलिस निरीक्षक (इंस्पेक्टर), सायबर क्राइम स्टेशन, बेंगलुरु कर्नाटक ।विकास शुक्ला (बस चालक), उम्र 29 साल पिता अवध नारायण, निवासी- तेंदुली, फतेहपुर उत्तर प्रदेश । सह-चालक गुड्डू पिता कुंवर कुशवाह, निवासी- सीतापुर सुरक्षित ।
बेलाल अली,उम्र 23 साल: पिता कलीमुल्लाह मियां, निवासी- साथी, गोपालगंज बिहार ।
ज्योतिरादित्य सिंह गौड़: पिता विक्रम सिंह गौड़, निवासी- बिजवाड़ ।

हादसे में कुल 12 लोग घायल हुए हैं, जिनमें से 5 अत्यंत नाजुक मरीजों को प्राथमिक उपचार के बाद तुरंत भोपाल रेफर किया गया है । घायलों में बेंगलुरु पुलिस के एएसआई और सब-इंस्पेक्टर भी शामिल हैं जिनको भोपाल रेफर किया उनके नाम है ।
अमित कुमार, उम्र 40 साल पिता विनोद कुमार सिंह, निवासी- मोहम्मदपुर, जौनपुर उत्तर प्रदेश ।
सुरेंद्र प्रताप सिंह,उम्र 68 साल पिता भद्रसेन सिंह, ग्राम हुरुरी जिला- जौनपुर उत्तर प्रदेश ।सुमन शर्मा,उम्र 36 साल पति रवि शर्मा,निवासी- कानपुर उत्तर प्रदेश ।
श्रीनिवास,उम्र 50 साल पिता वेंकटेश गिरी,निवासी बेंगलुरु कर्नाटक — ASI, बेंगलुरु पुलिस ।
केशव,उम्र 28 साल पिता श्रीपाल,निवासी मथुला अलीगढ़ उत्तर प्रदेश ।

ब्यावरा सिविल अस्पताल में उपचाराधीन घायल 7 यात्री जिनके नाम ।
मीनू सिंह,उम्र 37 साल पति अमित कुमार,निवासी मोहम्मदपुर,जौनपुर उत्तर प्रदेश ।
रक्षित सिंह,उम्र 13 साल पिता अमित सिंह, निवासी- जौनपुर उत्तर प्रदेश ।
रवि शर्मा,उम्र 42 साल पिता दीनानाथ शर्मा, निवासी- कानपुर उत्तर प्रदेश ।
पार्थ शर्मा,उम्र 08 साल पिता रवि शर्मा,निवासी कानपुर उत्तर प्रदेश ।
सोनू उम्र 39 साल पिता हरी बाबू,निवासी- खैराबाद, सीतापुर उत्तर प्रदेश ।
रमेश नायक: पिता पंडप्पा, निवासी- बेंगलुरु (कर्नाटक) — सब-इंस्पेक्टर (SI), बेंगलुरु पुलिस ।
विश्वनाथ, उम्र 39 साल: पिता श्री मोहन, निवासी- बेंगलुरु (कर्नाटक) — पुलिस स्टाफ, सायबर सेल ।

“संजीवनी 108′ की खुली पोल आधे घंटे तक तड़पते रहे घायल”

इस भीषण हादसे ने राजगढ़ जिले की आपातकालीन चिकित्सा सेवा ‘संजीवनी 108’ पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं । प्रत्यक्षदर्शियों और स्थानीय लोगों का आरोप है कि हादसे के तुरंत बाद सूचना दिए जाने के बावजूद करीब आधे घंटे तक कोई भी सरकारी एम्बुलेंस मौके पर नहीं पहुंची । लहूलुहान यात्री पुल के नीचे सड़क पर तड़पते रहे स्थानीय लोगों ने रोष जताते हुए कहा कि जब इमरजेंसी के समय पर ही एम्बुलेंस उपलब्ध न हो, तो ऐसी आपातकालीन सेवा का क्या औचित्य है ? बाद में पुलिस वाहनों और निजी साधनों से घायलों को अस्पताल पहुँचाया गया ।

“त्रुटिपूर्ण डिजाइन फिर सवालों के घेरे में”

इस ओवरब्रिज पर बना सिंगल-वे मार्ग और अचानक आने वाला करीब 90 डिग्री का तीखा टर्न ही हादसे की मुख्य वजह बना । स्थानीय निवासियों के अनुसार, निर्माण कार्य के दौरान ही इस ओवरब्रिज के डिजाइन और खतरनाक टर्न को लेकर गंभीर सवाल उठे थे । क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों ने इस संबंध में राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) और संबंधित अधिकारियों को कई बार लिखित शिकायतें और पत्र भेजकर खामी दूर करने की मांग की थी लेकिन विभाग की लापरवाही के कारण इस ‘ब्लैक स्पॉट’ को दुरुस्त नहीं किया गया, जिसका खामियाजा आज फिर मासूम जिंदगियों को भुगतना पड़ा ।

Khushi Samvad
Author: Khushi Samvad

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