Edition

ऑपरेशन मनी ट्रैप पैसे दोगुने करने के नाम पर 2 करोड़ रुपए ठगने वाला अंतर्राज्यीय गिरोह दबोचा,2.92 करोड़ रु का मशरूका जप्त !

👇समाचार सुनने के लिए यहां क्लिक करें

होटल प्रेसिडेंट व रेडिएंट में वीआईपी मीटिंग कर बने थे नकली CA व डायरेक्टर,4 करोड़ रु का फर्जी RTGS स्क्रीन शॉट दिखा कर हुए थे फरार ।

 घनश्याम शर्मा माचलपुर 

 राजगढ़ / माचलपुर :- राजगढ़ पुलिस ने ‘ऑपरेशन मनी ट्रैप’ के तहत देश के 10 राज्यों में अब तक का सबसे बड़ा सर्च ऑपरेशन चलाकर 2 करोड़ रुपए की सनसनीखेज धोखाधड़ी करने वाले अंतर्राज्यीय गिरोह का पर्दाफाश किया है । पुलिस अधीक्षक राजगढ़ अमित तोलानी के निर्देशन व एसडीओपी ब्यावरा के नेतृत्व में गठित 50 सदस्यीय विशेष टीम ने 35 दिनों में 30,000 किमी का सफर तय कर गिरोह के 14 आरोपियों को गिरफ्तार किया है । आरोपियों के कब्जे से 1.73 करोड़ रुपए नगद, 04 चार पहिया वाहन और 19 एंड्रॉइड मोबाइल सहित कुल 2,92,91,000 रुपए का मशरूका जप्त किया गया है ।

“भोपाल के होटलों में बुना जाल, कूरियर ऑफिस पर ली नगद राशि”

फरियादी देवेन्द्र पिता कृपाशंकर पालीवाल 46 निवासी ब्यावरा ने 24 जुलाई 2026 को थाना ब्यावरा शहर में रिपोर्ट दर्ज कराई थी । फरियादी को जाल में फंसाने के लिए आरोपी माधव असोरे, सुजीत टेम्बेकर और साहिल नीसवाडे ने पहले उसकी रेकी की । इसके बाद प्रफुल्ल गजभिये और सचित कामले ने कंपनी एजेंट, दिनेश वीरानी ने चार्टर्ड अकाउंटेंट और वासुदेव गाडेकर ने खुद को कंपनी का डायरेक्टर बताकर भोपाल व ब्यावरा के होटल प्रेसिडेंट व होटल रेडिएंट में बैठकें कीं । विश्वास में लेकर आरोपियों ने 22 जुलाई को जहांगीराबाद भोपाल स्थित ‘बाबूलाल कांतिलाल कूरियर ऑफिस’ पर फरियादी से 2 करोड़ रुपए नगद प्राप्त किए । अंगड़िया हेड आरिफ हुसैन के कहने पर सन्नी उर्फ शमीम मंडल और मुस्कीम मंडल कैश लेकर भागे और पीड़ित को भ्रमित करने के लिए 4 करोड़ रूपये के भुगतान का फर्जी RTGS स्क्रीनशॉट दिखा दिया । ब्यावरा पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए अपराध क्रमांक 590/2026, धारा 318(4), 61(2), 338, 336(3), 340(2) बीएनएस के तहत केस दर्ज किया था ।

“गिरोह की शातिर 5-लेयर कार्यप्रणाली और ‘कट-आउट’ नेटवर्क”

यह गिरोह पांच स्तरों पर काम करता था लेयर 1 में मालदार पीड़ितों को चिन्हित करना, लेयर 2 में महंगी कारों व होटलों में नकली कॉर्पोरेट रसूख दिखाकर भरोसा जीतना, लेयर 3 में फर्जी ई-मेल व जाली दस्तावेज दिखाकर निवेश को असली सिद्ध करना, लेयर 4 में बैंकिंग ट्रेल से बचने के लिए केवल नगद राशि लेना और लेयर 5 में रकम को हवाला/आंगड़िया नेटवर्क के जरिए तुरंत ठिकाने लगाना शामिल था। गिरोह ‘कट-आउट’ मॉड्यूल पर काम करता था, जहाँ हर आरोपी अपना असली नाम छिपाकर ‘ट्रेड नाम’ रखता था और कोई भी सदस्य अपने से ठीक ऊपर या नीचे की लिंक के अलावा किसी तीसरे व्यक्ति को नहीं जानता था ।

इस महा-अभियान को अंजाम देने में संबंधित राज्य की पुलिस टीम व थाना प्रभारी ब्यावरा शहर (TI), ब्यावरा थाने के उप-निरीक्षक (SI), सहायक उप-निरीक्षक (ASI), प्रधान आरक्षकों व आरक्षकों सहित जिला साइबर सेल राजगढ़ की तकनीकी टीम (जिन्होंने 3,000 से अधिक CCTV फुटेज खंगाले) की मुख्य भूमिका रही टीम की इस देशव्यापी त्वरित कार्रवाई की चहुंओर सराहना हो रही ।

Khushi Samvad
Author: Khushi Samvad

Leave a Comment

और पढ़ें

traffic tail