भौतिक दान से कहीं बढ़कर है किसी की समस्या का ‘समाधान’ करना :- पं. श्याम मनावत ।
घनश्याम शर्मा माचलपुर
माचलपुर :– बजरंग रोड पर स्थित अग्रवाल धर्मशाला में विगत 14 अगस्त से बह रही शिवमहापुराण की ज्ञानगंगा का आज 21 अगस्त को भक्तिमय माहौल में भव्य विश्राम हुआ । यह अलौकिक धार्मिक महोत्सव स्वर्गीय सेठ राधाकिशन गोयल की पावन स्मृति में आयोजित किया गया था इस भव्य आयोजन के मुख्य सूत्रधार और यजमान माचलपुर नगर के सुप्रसिद्ध समाजसेवी अरुण कुमार गोयल रहे,जिन्होंने सपरिवार व्यासपीठ का विधि-विधान से पूजन कर पूर्णाहूर्ति संपन्न कराई। अपनी उदारता और निरंतर दान-पुण्य के संकल्पों के कारण नगर में ‘भामाशाह’ के रूप में विख्यात अरुण कुमार गोयल के इस आतिथ्य में पूरा पंडाल शिवमय नजर आया ।
“ज्ञान और समाधान का दिव्य संगम है ‘शिव तत्व”
कथा के अंतिम दिन प्रख्यात कथाव्यास पंडित श्याम मनावत ने दान,समाधान और दिशाओं के वैज्ञानिक व आध्यात्मिक अंतर्संबंध को एक साथ जोड़कर समझाया । उन्होंने एक विशेष रहस्य उजागर करते हुए कहा कि भगवान शिव सदैव वास्तु के ईशान कोण (उत्तर-पूर्व) में ही विराजते हैं, क्योंकि पूर्व दिशा ‘ज्ञान’ की प्रतीक है और उत्तर दिशा ‘समाधान’ की दिशा है जहाँ ज्ञान और समाधान का मिलन होता है,वहीं साक्षात शिव तत्व प्रकट होता है । इसी मर्म को समझाते हुए पंडित जी ने मानवता का संदेश दिया कि जीवन में समाधान का महत्व भौतिक दान से भी कहीं बड़ा होता है,आप भले ही किसी को धन या वस्तु का दान मत करो,लेकिन अगर आपने किसी व्याकुल या परेशान व्यक्ति की समस्या को सुलझाकर उसका ‘समाधान’ कर दिया,तो वह कर्म दुनिया के किसी भी महादान से बड़ा पुण्य देता है ।
उन्होंने आगे कहा कि जो पूरी तरह संतुष्ट है,वही शिव है जीवन में जो मिले,जैसा मिले, उसी में आनंदित रहना ही वास्तविक शिव भक्ति है । शिव परिवार में स्वभाव की बहुत विविधता है,फिर भी भगवान शिव सब में परस्पर प्रेम और सामंजस्य बनाकर रखते हैं, इसीलिए वे समन्वय के देवता हैं । शमशान में रहकर, बाघम्बर लपेटकर और भस्मी रमाकर भी जो परम आनंद में हैं,उनसे बड़ा संतोषी कौन हो सकता है महादेव देवों के देव होकर भी निरंतर राम नाम की साधना और समर्पण में डूबे रहते हैं । सांसारिक भौतिक प्रपंचों से पार चले जाना ही समाधि है और महादेव हमें संसार में रहकर भी इससे अलग रहने की कला सिखाते हैं ।
“भजनों पर झूमे भक्तभंडारे में उमड़ा जनसैलाब”
कथा के दौरान बीच-बीच में पंडित जी द्वारा गाए गए मधुर और संगीतमय भजनों पर उपस्थित श्रद्धालु खुद को रोक नहीं पाए और भक्तिभाव में लीन होकर झूमते नजर आए । पूरा पंडाल महादेव के जयकारों से गुंजायमान हो उठा कथा की पूर्णाहूर्ति पर मुख्य यजमान अरुण कुमार गोयल द्वारा भगवान शिव की दिव्य महाआरती उतारी गई । इसके पश्चात धर्मशाला परिसर में एक विशाल भंडारे का आयोजन किया गया,जिसमें माचलपुर नगर और आसपास के क्षेत्रों से आए सैकड़ों श्रद्धालुओं ने बाबा का महाप्रसाद ग्रहण कर पुण्य लाभ कमाया ।










