चौथे दिन धूमधाम से मनाया गया शिव-पार्वती विवाह उत्सव,भजनों पर जमकर झूमे श्रद्धालु ।
घनश्याम शर्मा माचलपुर
माचलपुर :- नगर के बजरंग रोड पर स्थित अग्रवाल धर्मशाला में स्वर्गीय सेठ राधाकिशन गोयल की पुण्य स्मृति में आयोजित संगीतमय शिवमहापुराण कथा के चौथे दिन मंगलवार को आस्था,दर्शन और आनंद का अनूठा संगम देखने को मिला । उज्जैन से पधारे सुप्रसिद्ध मानस मर्मज्ञ पंडित श्याम मनावत के मुखारबिंद से जैसे ही भगवान शिव और माता पार्वती के अलौकिक विवाह का प्रसंग शुरू हुआ,पूरा पंडाल ‘हर-हर महादेव’ के जयकारों से गूंज उठा । कथा मंडप में वेद मंत्रों के साथ भगवान शिव और माता पार्वती का पाणिग्रहण संस्कार धूमधाम से संपन्न कराया गया ।
चौथे दिन की शुरुआत मुख्य यजमान अरुण कुमार गोयल ने सपरिवार व्यासपीठ और पवित्र शिवमहापुराण ग्रंथ का विधि विधान से पूजन-अर्चन कर की । गोयल परिवार ने व्यासपीठ पर विराजमान पंडित श्याम मनावत का माल्यार्पण कर आशीर्वाद लिया मुख्य यजमान अरुण कुमार गोयल ने इस दिव्य विवाह उत्सव में शामिल हुए सभी श्रद्धालुओं का स्वागत किया ।
“विवाह कोई समझौता नहीं, बल्कि एक संकल्प है”
शिव-पार्वती विवाह उत्सव पर बोलते हुए पंडित श्याम जी मनावत ने सनातन संस्कृति में विवाह के गहरे अर्थ को समझाया । उन्होंने अपने सारगर्भित प्रवचन में कहा “विवाह दो व्यक्तियों का नहीं बल्कि दो वंशों का मिलन है । यह दो शरीरों का नहीं दो आत्माओं का, दो परंपराओं का और दो विचारों का मिलन है । विवाह दो तन का नहीं,दो मन का और दो काया का नहीं,बल्कि दो कुलों का पवित्र मिलन है ।”पंडित जी ने पति-पत्नी के रिश्ते को एक ‘निर्विकल्प संबंध’ बताते हुए कहा कि जीवन में सगे पिता के अलावा गुरु, ससुर, जीविका प्रदाता और संकट में प्राण बचाने वाले को भी धर्मपिता का दर्जा दिया जाता है । इसी तरह सनातन शास्त्र में 16 धर्म माताएं और धर्म के भाई बहन भी मान्य हैं । परंतु, पति या पत्नी के रिश्ते में कोई विकल्प नहीं होता,यहाँ केवल एक ही सर्वोपरि है इसी संदर्भ में उन्होंने एक बेहद सुंदर पंक्ति कही :
“ईश्वर ने नहीं बनाया तेरा कोई विकल्प है,जिंदगी तेरे साथ समझौता नहीं संकल्प है ।
“श्रद्धा और विश्वास का मिलन ही शिवरात्रि है, धूमधाम से निकली भोले की बारात”
पंडित मनावत ने आध्यात्मिक रहस्य उजागर करते हुए कहा कि भगवान शंकर साक्षात विश्वास हैं और माता पार्वती श्रद्धा का स्वरूप हैं । जब आत्मा की भक्ति और श्रद्धा भगवान के प्रति अटूट विश्वास का वरण कर लेती है, तभी जीवन में शिव-पार्वती विवाह उत्सव घटित होता है । श्रद्धा और विश्वास का यही परम मिलन ही वास्तव में शिवरात्रि का महापर्व है ।
कथा के दौरान जब भगवान शिव की दिव्य बारात निकाली गई,तो पूरा कथा पंडाल साक्षात देवलोक की तरह नजर आने लगा । सुमधुर भजनों और मंगल गीतों पर श्रद्धालुओं ने जमकर नृत्य किया कथा के विश्राम पर मुख्य यजमान अरुण कुमार गोयल सहित उपस्थित गणमान्य नागरिकों ने भगवान शिव पार्वती के दिव्य स्वरूप की भव्य महाआरती उतारी । विवाह उत्सव के इस पावन अवसर पर बड़ी संख्या में उपस्थित भक्तों के बीच प्रसाद का वितरण किया गया ।










