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समय,साधन और समझ की त्रिवेणी से ही गढ़ा जा सकता है श्रेष्ठ विद्यार्थी जीवन : पं. श्याम मानावत !

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माचलपुर के सराफ मैरिज गार्डन में आयोजित ‘शिक्षाविद् दिशा बोध’ कार्यक्रम में विद्यार्थियों को गुरुदेव ने दिए सफलता के मूलमंत्र ।

घनश्याम शर्मा माचलपुर

माचलपुर :- नगर के स्थानीय सराफ मैरिज गार्डन में मंगलवार को ‘शिक्षाविद् दिशा बोध’ कार्यक्रम का आयोजन किया गया, कार्यक्रम की शुरुआत अतिथियों द्वारा माँ सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण एवं पूजन के साथ की गई । इस अवसर पर राजेंद्र सिंह मंडलोई द्वारा सुमधुर गीत के माध्यम से सरस्वती वंदना की मनमोहक प्रस्तुति दी गई । कार्यक्रम के मुख्य वक्ता, प्रख्यात धर्मविद् और चिंतक पंडित श्याम मनावत ने बड़ी संख्या में उपस्थित विभिन्न विद्यालयों के छात्र छात्राओं को अपने अमूल्य वचनों से लाभान्वित किया । उन्होंने विद्यार्थी जीवन में सफलता साधना और समय की महत्ता को बहुत ही तार्किक और गणितीय उदाहरणों के साथ समझाया ।

“विचार ही जीवन की असली औषधि’

अपने संबोधन की शुरुआत करते हुए पंडित मनावत ने कहा कि आज संसार में जितनी भी विषमताएँ और समस्याएँ हैं,उनका एकमात्र समाधान मनुष्य के भीतर छिपा है । उन्होंने कहा,संसार की समस्त व्याधियों की औषधि ‘सकारात्मक विचार’ हैं विचार ही हमारे आचरण और व्यवहार को श्रेष्ठ बनाते हैं जब तक मनुष्य की सोच नहीं बदलेगी,तब तक समाज का कल्याण संभव नहीं है ।

“समय की बर्बादी का गणित,शिक्षक का1मिनट = बच्चों के 40 मिनट”

उन्होंने उदाहरण दिया,यदि एक शिक्षक क्लास में पढ़ाते समय अपने व्यक्तिगत मोबाइल फोन पर केवल 1 मिनट 60 सेकंड बात करता है,तो वह केवल अपना समय नष्ट नहीं करता । यदि कक्षा में 40 बच्चे बैठे हैं,तो वह सामूहिक रूप से देश के भविष्य का पूरे 40 मिनट का अमूल्य समय नष्ट कर देता है इसी तरह उन्होंने देश के शीर्ष नेतृत्व का उदाहरण देते हुए कहा कि जब प्रधानमंत्री मोदी जी किसी राज्य (जैसे माचलपुर) में10 मिनट देते हैं, तो वह 10 मिनट कलेक्टर एसपी आदि अधिकारी नेताओं व्यवस्थाओं में दिन लगाते है । इसलिए बड़े पदों पर बैठे लोगों के समय का एक ‘पलक झपकना’ भी करोड़ों घंटों के बराबर कीमती होता है हमारा यह भौतिक शरीर और मोबाइल तो एक दिन नष्ट (पार्टिकल रूप में) हो जाएंगे, इसलिए समय रहते इसकी कीमत पहचाननी होगी ।

“समय, साधन और समझ तीन देवियों की सच्ची उपासना”

पंडित जी ने विद्यार्थी जीवन में देवी उपासना का एक नया और व्यावहारिक दर्शन सामने रखा । उन्होंने कहा कि आगामी नवरात्रि और विद्यार्थी जीवन का गहरा संबंध है । छात्र के जीवन में तीन देवियाँ बहुत महत्व रखती हैं:

महाकाली (समय की देवी): काल यानी समय ब्रह्मांड में समय से मूल्यवान कुछ भी नहीं है । जो विद्यार्थी ‘कण’ (संसाधन) और ‘क्षण’ (समय का एक-एक पल) की कीमत समझ जाता है,वह काल पर विजय प्राप्त करता है, काल की देवी की सच्ची उपासना समय का आदर करना है ।
महालक्ष्मी (साधनों की देवी): हमारे पास उपलब्ध वस्तुएं जैसे किताबें,पेन, या सामने रखा माइक्रोफोन—यह सब महालक्ष्मी की कृपा से मिले साधन हैं । परंतु साधनों से बड़े हमेशा हमारे संकल्प होने चाहिए एक व्यक्ति वह होता है जो अधिकतम साधनों के होने पर भी न्यूनतम (सबसे कम) उपलब्धि प्राप्त करता है, जबकि एक सच्चा साधक न्यूनतम साधनों में भी अपने दृढ़ संकल्प से अधिकतम (सर्वोच्च) सफलता हासिल करके दिखा देता है ।             महासरस्वती समझ की देवी : जब तक जीवन में सही समझ या विवेक नहीं होगा,तब तक समय और साधन दोनों व्यर्थ चले जाएंगे । आप जिसके सामने बैठकर ज्ञान अर्जित कर रहे हैं, वह यही महासरस्वती स्वरूपा बुद्धि और समझ की शक्ति है ।

“आलस्य से टूटते हैं सौ आँखों के सपने”

विद्यार्थियों को आलस्य और प्रमाद से सचेत करते हुए उन्होंने एक बेहद मर्मस्पर्शी बात कही । उन्होंने कहा,जब एक विद्यार्थी की दो आँखें सोती हैं (वह आलस्य करता है), तो वह केवल खुद नहीं सोता,बल्कि अपने पीछे उम्मीद लगाए बैठे माता-पिता और परिवार की सौ आँखों के खूबसूरत सपनों को एक पल में तोड़ देता है ।

राम और रावण की परिभाषा देते हुए यह बताया गया है कि राम वह है जो माता-पिता का सिर गर्व से ऊँचा करे,जबकि रावण अपने अहंकार के कारण अपयश का कारण बनता है। जनक जी की चिट्ठी के माध्यम से परम संकल्प की प्रतिबद्धता और हारकर भी खुश होने वाले तीन लोगों (मां, गुरु और पिता) के भावों को रेखांकित किया गया है ।

“वरिष्ठ जनों एवं शिक्षकों की गरिमामयी उपस्थिति”
इस भव्य कार्यक्रम में मुख्य रूप से वरिष्ठ नेता रामगोपाल खंडेलवाल, पुरुषोत्तम गोयल, दिनेश सोनी,सरस्वती शिशु मंदिर के प्राचार्य महोदय सहित नगर के तीनों प्रमुख विद्यालयों के शिक्षक शिक्षिकाएं एवं गणमान्य नागरिक बड़ी संख्या में उपस्थित थे । कार्यक्रम के सफल आयोजन के अंत में सभी आगंतुकों और विद्यार्थियों के प्रति बालमुकुंद सर्राफ द्वारा आभार व्यक्त किया गया । उपस्थित छात्र-छात्राओं ने गुरुदेव के इन दिव्य सूत्रों को जीवन में अक्षरशः उतारने का संकल्प लिया ।

Khushi Samvad
Author: Khushi Samvad

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